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माओवादी के लाल तांडव (सरकार के लापरवाही)

न जाने केतना बहिन बिना भाई के,केतना औरत बिना सिन्दूर के ,केतना मई बिना बेटा के हो गइली.सिर्फ सरकार के बिना सोचे समझल कदम उठावे के चक्कर में.
जी हम बात कर रहल बनी २ दीं पहले ७६ भारत माँ के सपूत के जे की ऑपरेशन ग्रीन हंट खातिर जात रहन लेकिन रस्ते में ही मौत के घात उतर दिहल गैलन सब.हम पूछ रहे है की क्या जरुरत थी ,बिना कोई तगड़ा जानकारी जुटाए और खुफिया होमेवोर्क किये १०० जवानों को नाक्सिलियों के गढ़ में भेजने की.अगर किसी भी तरह के खतरे से मुक्त है तो वह है देश का नेता ,क्योंकि उन्होंने ने जनता के पैसा से ही अपने सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त कर रखा है .VIP की श्रेणी में आने वाले १३००० हज़ार नेतावाओं ने ही अपनी सुरक्षा में ४७००० हज़ार से ज्यादा पुलिसकर्मी लगा रखे है .VVIP नेतावों के सुरक्षा में तो SPG AUR NSG जैसे जाबाज तैनात रहते है.इस गरीब मुल्क में इस सब पर सालाना जनता के १० अरब रुपया से भी ज्यादा बहा दिए जाते है .मुफ्त में इतने सुरक्षित माहोल में रहने वाले नेतावो के मन में यही रहता है की जनता भी उनकी ही तरह सुरक्षित है.जब कभी यह वहम टूटता है तो बयानबाज़ी कर के अपनी इछ्हा जताते है.नहीं तो करीब ५०००० नाक्सालियो को काबू करना उस देश के लिए मुस्किल नही होता जिसके पास दुनिया की दूसरी बड़ी सेना हो.क्या होगा जब सहीद हुए ७६ जवानों के परिजन यह सवाल करेंगे.हम भगवन से उन सहिदो के आत्मा की सन्ति की दुआ करते है.उनका दर्द तब पता चलता उन कमीने नेतावो को जब उनका कोई अपना मारा गया होता .

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यूपी ने खोए सबसे ज्यादा 43 सपूत>
ठ्ठ जागरण संवाददाता, लखनऊ दंतेवाड़ा नक्सली हमले में शहीद 76 जवानों में सबसे ज्यादा 43 यूपी के रहे। बिहार और उत्तराखंड के छह-छह, राजस्थान के चार, तमिलनाडु के तीन, हरियाणा, छत्तीसगढ़, और उड़ीसा के दो-दो तथा असम केरल, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली का एक-एक जवान शहीद हुआ। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे शहीदों के पार्थिव शरीर वायुसेना के एएन-32 विमान से लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर लाये गए। सीआरपीएफ के जवानों, अफसरों और विभिन्न दलों के नेताओं ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। सशस्त्र सलामी के बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास की ओर रवाना कर दिये गये। सीआरपीएफ के मुताबिक शहीद जवान रामपुर ग्रुप बटालियन के थे। शहीदों में गोरखपुर और बुलंदशहर के चार-चार, अलीगढ़ से तीन, मुरादाबाद, गाजीपुर और जेपी नगर के दो-दो जवान शामिल है। वायुसेना के विमान से पहली बार में सब इंस्पेक्टर जमीरुल हसन, कांस्टेबल वेदपाल, हेड कांस्टेबल श्यामलाल, कांस्टेबल इन्द्रजीत कुमार, कांस्टेबल रंजीत यादव, सब इंस्पेक्टर सर्वदेव सिंह यादव, कांस्टेबल प्रवीण कुमार राय, कांस्टेबल सूरज कुमार, कांस्टेबल जितेन्द्र कुमार, कांस्टेबल रामानंद यादव, कांस्टेबल महेश सिंह और कांस्टेबल विजय कुमार के पार्थिव शरीर पटना होकर लखनऊ पहुंचे। दूसरी बार में 13 पार्थिव शरीर पहुंचे। मायावती की ओर से अपर कैबिनेट सचिव नेतराम, राज्यपाल की तरफ से उनके विशेषाधिकारी पंकज धनकड़ ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पुलिस में भर्ती होंगे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवक : राज्य के चंदौली, सोनभद्र और मिर्जापुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार कई प्रयास कर रही है। पुलिस भर्ती रैली में इन तीन जिलों के 224 युवाओं को सरकारी खर्चे पर तैयारियां करायी जा रही हैं। एडीजी ब्रजलाल ने बताया कि इलाके के युवक पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पुलिस की नौकरी हासिल करेंगे। जब वह वापस अपने क्षेत्र में जाएंगे तो बाकी युवा भी उनसे प्रेरित होकर मुख्य धारा में लौटेंगे।
sabhar-dainik jagran

छत्ताीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मंगलवार को हुये नक्सली हमले में शहीद सीआरपीएफ के छह जवानों का पार्थिव शरीर बुधवार को सेना के विशेष विमान से राजधानी पहुंचा। सीआरपीएफ तथा बिहार सैन्य पुलिस के जवानों ने एयरपोर्ट पर शहीदों को गार्ड आफ आनर दिया। आरक्षी महानिरीक्षक नीलमणि, एडीजी पी के ठाकुर, एडीजी ला एंड आर्डर पीएन राय, आईजी प्रोविजन रविंद्र कुमार, डीआईजी जितेंद्र कुमार, डीआईजी सीआरपीएफ डि रिल डी सेना, एसएसपी विनीत विनायक, कमांडेंट सीआरपीएफ 131वीं बटालियन डी एस मान ने शहीदों के शवों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शवों को पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक निवास के लिए रवाना कर दिया गया।
छत्ताीसगढ़ के दंतेवाड़ा में छह अप्रैल को सीआरपीएफ की छठी बटालियन पर हुये नक्सली हमले में मिसकोट, मोतिहारी, पूर्वी चंपारण के इन्सपेक्टर प्रकाश कुमार, बड़हिया, लखीसराय के इन्सपेक्टर जीतू आनंद, बुचियाकली टोला, सिधवलिया, गोपालगंज के सब इंस्पेक्टर विश्वनाथ राव, खटूरी, गुडगुडी, रामनगर, पश्चिमी चंपारण के कान्स्टेबल बूटन यादव, अफोकी परब टोला, लालपुर, छपरा के कान्स्टेबल मोतीलाल राम तथा राजाराम, नरहवान, गोपालपुर, गोपालगंज के हेड कान्सटेबल सुरेंद्र राज शहीद हो गये थे। सेना के विशेष विमान से बुधवार की शाम पांच बजे शहीदों के पार्थिव शरीर राजधानी लाये गये। अपने साथियों को श्रद्धांजलि देने के लिए सीआरपीएफ की स्थानीय इकाई के वरीय अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में जवान भी घंटों पहले एयरपोर्ट पहुंच गये थे। बिहार हैंगर में सीआरपीएफ व बिहार सैन्य पुलिस के जवानों ने शहीदों को गार्ड आफ आनर दिया। मातमी धुनों के बीच संगीनें झुका दी गयीं और अधिकारियों समेत तमाम लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर कर्तव्य की वेदी पर शहीद हुये जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किये। आरक्षी महानिरीक्षक नीलमणि ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से शहीदों के शव पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। एडीजी पी के ठाकुर, एडीजी ला एंड आर्डर पीएन राय, आईजी प्रोविजन रविंद्र कुमार, डीआईजी जितेंद्र कुमार, डीआईजी सीआरपीएफ डि रिल डी सेना, एसएसपी विनीत विनायक, कमांडेंट सीआरपीएफ 131वीं बटालियन डी एस मान, एसपी एसटीएफ व बिहार पुलिस व सीआरपीएफ के अन्य अधिकारियों ने भी शवों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये।

sabhar-dai nik jagran
namaskaar ratnesh bhai,

sahi kahni raua...maobadi sab lal tandav macha ke chal gail...ehme galti sarkaar ke hi baa...ab batayi ki anti land mines gaadi kaise fail ho gail...ekar matlab baa ki desh ke fore ke security system me bhi kuch gadbad baa....
hamar raay baa ki jaun maobadi ke gadh baa aur jangal baa wo area ke hi saaf kar dihal jaw...kahe ke matlab ya ta hawai hamla kar ke bomb gira dewal jaw ya aag laga dihal jaw wo area ke jangal me...\
haan ehse humni ke bhi kuch nuksaan hoyi lekin kuch naa kuch jaroor ta jaroor maobadi kam hoiha san....
आह! क्या गुजर रहा होगा उन परिवारों पर जिसने अपने बाप, भाई, पति, बेटा खो दिया होगा और वो भी अपने घर मे घिर कर ,एक तरह से कहा जाय तो बिना लड़े ही मौत को गले लगाना, कारगिल मे जवान शहीद होते थे तो दिल मे अफ्शोश नहीं होता था बल्कि गर्व होता था किन्तु यहाँ तो घर के लोग ही घर के चिराग को बुझा दिये,
बढ़िया लेख लिखे है रत्नेश भाई, धन्यबाद
रत्नेश जी नमस्कार ! सबसे पहले तो मै आपको धन्यवाद देना चाहता हु की आप ने ओपन बुक्स के मंच से बहुत ही ज्वलंत और सम्बेदनसील मुद्दा पर चर्चा प्रारंभ किया है, मवोवादियो के इस कदम को कभी भी सही नहीं कहा जा सकता, इन लोगो का जो क्रिया कलाप है वो एक लोकतान्त्रिक देश के लिये कतई सही नहीं है, लोकतंत्र मे अपनी बात सभी को रखने का हक है पर एक तरीका से जिसमे लोकतान्त्रिक मर्यादा का पालन होना चाहिये, बन्दूक की भाषा आजाद देश के लिए घातक है और इससे सख्ती से निपटने की जरूरत है चाहे हमे मिलिट्री को ही क्यू नहीं लगाना पड़े,
मै अनिल जी के बातो से सहमत हू की ऐसे लोगो को जो देश का ही खाकर और देश को ही तोड़ने और कमजोर करने मे लगे हो उन्हे घर के लोग कहा भी नहीं जा सकता है , ये तो बाहरी दुश्मनों से भी बडे दुश्मन है,
दंतेवाड़ा नक्सली हमले की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं: चिदंबरम
सीआईपीएफ के शौर्य दिवस के मौके पर बोलते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने दंतेवाड़ा में हुई घटना की पूर्ण जिम्मेदारी स्वीकारी, जिसमें नक्सलियों ने बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवानों को मार डाला था।

आख़िर मान लिए की 76 जवानो के जान हमारे मनिया गृह मंत्री के करद चला गय.जान तो गया उनका ,लेकिन अब इस्तीफ़ा देंगे ताकि लोगो के प्रति हमदर्दी है हमारी .अरे ज़रा सोचिए क्या उन जवानो के जान की कीमत इनके इस्तीफ़ा के बराबर है.क्य इनका मुआवज़ा और नौकरी लौटा देगा उन मा का बेटा ,जिसने बुढ़ापा मे ये दूख देखा है.क्य इनका इस्तीफ़ा उन तमाम औरतो का सिंदूर लौटा देगा?ना जाने कितने जवानो का बेटा अभी गर्भ मे हो,वो बेचारे बिना जानम लिए ही आनाथ हो गयऽअखिर कब सुधरेंगे ये सफेद khadi को बदनाम करनेवाले ?अगर इनके पास पावर है तो इसका मतलब क्या की किसी को भी बिना सोचे समझे भेज देंगे मौत के मूह मे?
रतनेश रमण पाठक.....................
bura mat manab ja hum thoda tikha bolila.
माननीय मंत्री जी लोगो का भी अजीब फंडा है.पहले नाक्सालियो को ललकारते है फिर बाद में बोलते है" अब बस भी करो कितना खेलोगे खून की होली "!जी कुछ ऐसा ही है हमारे गृह मंत्रालय का बयां ..
कास यह बात मंत्री जी ने पहले ही सोची होती तो उन ७३ जवानों को अपनी बलि नहीं देना पड़ता !आइये दिखाते है गृह मंत्रालय का पोस्टर ...........................

photo---hindustan dainik
रत्नेष भाई, आप ने जो पोस्टर पोस्ट किया है वो अपने आप मे बहुत कुछ कह रहा है, अगर मन्त्री जी को लग रहा है कि वो पोस्टर से जो सन्देश दे रहे है उससे नक्सली हिन्सा छोड़ देगे तो ये पहले हि क्यू नही प्रकाशित करा दिया ? मन्त्री जी भ्रम कि स्थिति मे है उन्हे खुद नही समझ मे आ रहा है कि कब क्या करना चाहिए । पूरे देश सहित सरकार को भी समझ लेना चाहिए कि इस तरह के सम्वेदना जगाने वाली अपील का प्रभाव केवल ह्रिदय वाले सम्वेदनशिल लोगो पर पड़ता है, ह्रदय विहिन असम्वेदनशील नक्शलियो पर नही ।
jankari khatir dhanyabad

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