For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन ।

पिछले 90 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91

विषय - "लक्ष्य"

आयोजन की अवधि- 11 मई 2018, दिन शुक्रवार से 12 मई 2018, दिन शनिवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
नज़्म
हाइकू
सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.

रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 11 मई 2018, दिन शुक्रवार लगते ही खोल दिया जायेगा)

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम.

Views: 1298

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

आदरणीय तस्दीक अहमद जी, बेहतीन ग़ज़ल, हर एक शेर उम्दा, बधाई हो !

जनाब ब्र जेंद्र नाथ साहिब  , हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

आदरणीय तस्दीक अहमद साहब विषयानुकूल बेहतरीन गजल लिखने के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये

जनाब डॉक्टर छोटे लाल साहिब,, हौसला अफज़ाई का शुक्रिया 

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,प्रदत्त विषय को सार्थक करती उम्दा ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'क़सदन फ़रेब हुस्न का खाने का लक्ष्य है'

इस मिसरे में दो बार 'का' शब्द खटक रहा है,मिसरा यूँ होना था:-

'क़सदन फ़रेब हुस्न से खाने का लक्ष्य है'

दूसरे शैर के ऊला में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें 'दर्स सिखाने' ।

तीसरे शैर के सानी मिसरे में भी ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें 'उस संग' ।

मुहतरम जनाब समर साहिब  आदाब , हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

आदरणीय तस्दीक अहमद जी सादर 

         प्र्दत्त् विषय के अनुरूप लाजबाब ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय सादर बधाई प्रेषित है. 

जनाब सत्य नारायण साहिब, हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

कठिन शब्दों के अर्थ अंत में होने से बहुत सुविधा रही। इस बेहतरीन व सबक़ देती ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान  साहिब

भ्रष्ट की अभिलाषा  [ परम लक्ष्य है खूब कमाना ]

 

[ ताटंक छंद ]

......................                                               

 

काम गलत हो या अच्छा हो, चाहे धंधा काला हो।                                                        

अरबों का हो वारा न्यारा , रोज बड़ा घोटाला हो।।                                         

हर चैनल पर चर्चा हो, हर, अखबार में नाम मेरा।                                                      

चाहे हो जाये बदनामी,  रुके कभी न काम मेरा।।                                                                        

 

इज्ज़त खोकर जी लेंगे पर,  दौलत बिन जीना कैसा।                                                                        

मातु पिता भगवन से बढ़कर, भूमि भवन रुपया पैसा।।                                                           

वैसे भी भारत में भगवन, इज्ज़त हर दिन बिकती है।                                                         

धन गोरा हो या काला हो, धन से इज्ज़त मिलती है।।                                                     

 

कृपा करो प्रभु हम पर ऐसी, सब सुख बिन माँगे आए।                                                 

धन लक्ष्मी की चिंता है वो, मुझसे रूठकर न जाए।।                                                      

शुभ संस्कार शील मर्यादा, ग्रामीणों का गहना है।                                                                  

शहर चतुर चालाकों की है,  गिरगिट बनकर रहना है।।                                                       

 

कालिख लगा दो चेहरे पर,  या तन ही कर दो काला।                                                      

काले धन के मतवालों को, फर्क नहीं पड़ने वाला।।                                                   

सदगुण अर्थहीन कलियुग में, भ्रष्ट आचरण मन भाए।                                     

दया करो हे अंतर्यामी,  सुख वैभव सब घर आए।।

 

मूल मंत्र

 

इज्ज़त गई तो कुछ न खोया, धन खोया सब कुछ खोया।                                              

भारत के बच्चों के मन में,  यही बीज हम ने बोया।।                                                              

-------

मौलिक एवं अप्रकाशित

 

आ. भाई अखिलेश जी , अच्छी रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।

आदरणीय लक्ष्मण  भाईजी

व्यंग्य रचना आपको पसंद आई , हृदय से धन्यवाद आभार

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

डॉ छोटेलाल सिंह posted a blog post

जनहित में

जनहित मेंअप शब्दों से बचना सीखेंसबके दिल में बसना सीखेंगम की सारी खायी पाटेंहिल मिलकर के हँसना…See More
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुशील सरना जी जीवंत क्षणिकाएं पढ़कर बहुत आनन्द की अनुभूति हुई दिली मुबारकबाद"
1 hour ago
Harihar Jha commented on Harihar Jha's blog post अच्छे दिन थे
"आदरणीय समर  कबीर जी, नाम लिखने में पिछली बार भूल हुई क्षमा चाहता हूँ। मुझे  'My…"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल। जब  दवा  ही  नहीं  है …"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'नज़रिये के ज़रिये' (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। बहुत सुन्दर संदेश देती बेहतरीन लघुकथा।"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय जी। बहुत सुन्दर संदेश देती बेहतरीन लघुकथा।"
3 hours ago
santosh khirwadkar posted a blog post

बीते लम्हों को चलो .....संतोष

अरकान:-फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुनबीते लम्हों को चलो फिर से पुकारा जाएवक़्त इक साथ सनम मिलके…See More
4 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत

बात लिखूँ मैं नई पुरानी, थोड़ी कड़वी यारसही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।झेल रहा है बचपन देखो,…See More
4 hours ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post फिर ज़ख़्मों को ...संतोष
"बहुत धन्यवाद आ लक्ष्मण धामी साहब!!!"
4 hours ago
Sudha mishra is now a member of Open Books Online
16 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post आशंका के गहरे-गहरे तल में
"सराहना के लिएआपका हार्दिक आभार, आदरणीय तेज वीर सिंह जी"
16 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन क्षणिकाएँ लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
16 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service