For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन ।

पिछले 92 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-93

विषय - "मृगतृष्णा"

आयोजन की अवधि- 13 जुलाई 2018, दिन शुक्रवार से 14 जुलाई 2018, दिन शनिवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
नज़्म
हाइकू
सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.

रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 13 जुलाई, 2018, दिन शुक्रवार लगते ही खोल दिया जायेगा)

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम.

Views: 1165

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।

आदरणीय आरिफ भाई

वर्तमान व्यवस्था और हालात पर सुंदर क्षणिकायें, हार्दिक बधाई

हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी ।

ग़ज़ल (लफ्ज़ मुझको जनाब म्रगतृष्णा)
(फाइलातुन _मफाइलुन _फ़ेलुन)

लफ्ज़ मुझको जनाब म्रगतृष्णा |
सिर्फ़ लगता है ख्वाब म्रगतृष्णा |

वो निगाहों का सिर्फ धोका है
जिसको बोलें सराब म्रगतृष्णा |

क्यूँ गुमाँ आब का हो सहरा में
उस का है इक जवाब म्रगतृष्णा |

कर गया आज शेर लिखने में
वक़्त मेरा खराब म्रगतृष्णा |

दूर से खुश्बू पास कुछ भी नहीं
कागज़ी है गुलाब म्रगतृष्णा |

उस पे आख़िर ग़ज़ल कहें कैसे
जो है लफ्जे किताब म्रगतृष्णा |

ऎसे तस्दीक इसके हैं, मअनी
जैसे हो इंक़लाब म्रगतृष्णा |

(मौलिक व अप्रकाशित)

आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,

                                   मृगतृष्णा को परिभाषित करती उम्दा ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । सही शब्द 'मृगतृष्णा ' है ।

मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

प्रदत्त विषय पर शानदार सृजन हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक जी

मुह तरमा प्रतिभा साहिबा , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

बेहतरीन गजल आदरणीय तस्दीक अहमद जी ।

मुह तरमा कनक साहिबा   , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

मृगतृष्णा जैसे शीर्षक पर ग़ज़ल की कल्पना। पढ़कर अच्छा लगा। आप कैसे अपने ख्यालों को ग़ज़ल में पिरो लेते हैं हमें भी सीखना है। ओबीओ के प्रतिष्ठित मंच पर ग़ज़ल की कक्षा को पढ़ा तो जानकारी अवश्य हुई लेकिन तख्ती और बहर जमा पाना नहीं आया। सुंदर रचना प्रस्तुति के लिए बधाई।

जनाब आशीष साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |आप जैसे क़ाबिल शख्स के लिए ग़ज़ल का फन मुश्किल नहीं है |दूसरे शायरों की ग़ज़ल पढ़ें, ओ बी ओ साइट पर जो ग़ज़ल ब्लॉग पर आएं उनमें जो शेर समझ न आए तो सवाल करें, उम्मीद है जल्द कामयाबी मिलेगी |

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बढ़िया प्रस्तुति।"
23 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - ढूँढ रहा हूँ
"हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी।बढ़िया गज़ल। डाँट-डपट सँग रूठा-राठी, माँ की लोरी मीठी-मीठी…"
26 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post समाज - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।"
31 minutes ago
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post बारिश की क्षणिकाएँ
"जनाब नरेंद्रसिंह चौहान साहिब आदाब,आप जब भी किसी रचना पर अपनी टिप्पणी देते हैं तो लगता है जैसे कोई…"
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

एक गजल - ढूँढ रहा हूँ

माँ सिलती थी बड़े जतन से, कहाँ बिछौने ढूँढ रहा हूँकहाँ गया वो नटखट बचपन, कहाँ खिलौने ढूँढ रहा…See More
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"बेहतरीन प्रस्तुति "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
" आदरणीया  Sushil Sarna जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
"आदरणीया Neelam Upadhyaya जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Mohammed Arif's blog post बारिश की क्षणिकाएँ
" खूब  सुन्दर रचना "
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post एक लम्हा ....
"खूब सुंदर रचना  पर हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील जी"
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिका :विगत कल
"बहुत खूब "
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service