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All Discussions Tagged 'कविता' (9)

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तब ही मंज़िल पाओगे |

उठो  पढ़ो  नित  नव उमंग  से , आलस दूर भगा डालो |  सुबह शाम करो  याद  मन से , रोज  आदत बना डालो  |  मेहनत से कभी डरो नहीं ,   आगे  कदम बढा…

Started by Shyam Narain Verma

2 May 21
Reply by Shyam Narain Verma

पढने चलो गुड़िया रानी ।

रोना छोडो गुड़िया रानी । पढ़ने चलो छोड़ मनमानी । चलो उठाओ बस्ता अपना ,  करो  ना कभी आनाकानी । चलो कदम बढ़ाओ आगे , बढ़ते जाओ सीना तानी । ग…

Started by Shyam Narain Verma

1 Mar 13, 2016
Reply by सतविन्द्र कुमार राणा

लालटेन

लालटेन मेरी रात की साथी, जलती है इसमें एक बाती. घासलेट से जलती है ये, बङी ही प्यारी लगती हैं ये. इसकी रोशनी में पढ़ता हूँ, इसकी रोशनी में…

Started by shree suneel

0 Apr 9, 2015

उसके मुखड़े पे तो ,एक अलग आस थी

एक सफ़र था मेरा , जिसमें वो साथ थी मैं अकेला था पर , वो बाप के साथ थीएक नवेली किरन ,खुद में थी वो मगनउसे देखकर देखो, झूमे धरती गगनवहां सब खा…

Started by maharshi tripathi

0 Dec 5, 2014

झगड़ा है बेकार |

काम क्रोध मद लोभ पर , जब ना लगे लगाम | बिना विचारे जो करे , क्षण में बिगड़े काम | रघुवन में वट वृक्ष विशाला | ताहि समीप बहे लघु नाला | न…

Started by Shyam Narain Verma

2 Jan 17, 2014
Reply by Shyam Narain Verma

बूझो तो जाने (कविता )

 बूझो तो जाने ....      टिक- टिक ,टिक- टिक करती चलते चलते कभी न थकती दिन भर करती काम लेती न एक दाम बूझो तो कौन ......... ?   एक बार लगाओ अग…

Started by annapurna bajpai

3 Jan 17, 2014
Reply by Saurabh Pandey

परोपकार |

जंगल में जा लकड़ी चुनता  , सिर पर रख जाता बाज़ार |  सर्दी गरमी या बारिश हो , लकड़ी बेच चले परिवार | एक दिन गया जब जंगल में , वह देखा गज शिश…

Started by Shyam Narain Verma

0 Jun 13, 2013

चिड़िया रानी...(बाल कविता)

चिड़िया रानी बड़ी सयानीदाना चुगने आई है,प्यारे-प्यारे रंग कईसाथ में अपने लाई है| आओ बच्चों तुम भी देखोइसकी कारगुजारी,भोली आँखें, मासूम चेहर…

Started by कुमार गौरव अजीतेन्दु

3 Jul 18, 2012
Reply by Dr.Prachi Singh

आओ बच्चों खेलें खेल

आओ बच्चों खेलें खेल दोस्तों,इस बाल कविता पर अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएँ| आओ बच्चों खेलें खेल चलो बनायें मिलकर रेल| रामू तुम इंजन बन जान…

Started by dr a kirtivardhan

0 May 6, 2011

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satish mapatpuri replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलियाँ रोटी  तो दुश्वार थी ,  पानी हुआ मुहाल । हे भगवन इस देश में , कैसा पड़ा अकाल…"
48 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Arpana Sharma's blog post "धरा की पाती"/ कविता-अर्पणा शर्मा, भोपाल
"बहुत सुंदर अलंकृत शब्द मोतियों से परिपूर्ण रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया अपर्णा शर्मा जी।"
5 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Arpana Sharma's blog post लघुकथा- फर्क (अर्पणा शर्मा)
"अंतर/दोगलापन स्पष्ट करती बहुत बढ़िया प्रस्तुति।हार्दिक बधाइयां आदरणीया अपर्णा शर्मा जी।"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आरिफ  भाई छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय  भाई छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीकभाई छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सुरेन्द्र  भाईजी छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हम अगर राहे वफ़ा में कामरां हो जाएँगे)
"जनाब अफरोज़ साहिब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी यह सही निर्णय है। वरना हम एक माह पीछे हो जाते। निर्धारित दिन और समय पर आयोजन का…"
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Mohammed Arif commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकू
"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी आदाब,                  …"
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Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी आदाब,                  …"
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