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Discussion Forum

प्रशनोत्तर 1 Reply

महोदय, विधाता लिखकर सेव एस ड्राफ्ट पर क्लिक करके सेव करते हैं तो इसे द्वारा देखने के लिए किस जगह मिलेगी, यह किस जगह सेव होती हैं. कृपया करके बताईयेगा. बबीता गुप्ता Continue

Tags: प्रशनोततर

Started by babitagupta. Last reply by योगराज प्रभाकर Apr 30.

एडमिन के लिए 5 Replies

O.B.O एक अच्छा मंच  है अपनी रचनाओं को प्रदर्शित करने के लिए किन्तु किसी भी रचना में कोई keyword  ना होने से रचनायें केवल इसी मंच तक सीमित हैं। और मंच से तो कहने को तीन हजार  से अधिक सदस्य हैं किंतु लगभग कुछ ही  लोग नियमित हैं बाकी तो दिखने की भीड़ हैंContinue

Started by रोहित डोबरियाल "मल्हार". Last reply by Samar kabeer Apr 5.

Response to Discussions 4 Replies

Dear friends:As many of us have noticed, usually there is not much response to the discussions at various Groups. This is true with English poems, as well, and one feels like a loner walking at night in the darkness in a big city with no street…Continue

Started by vijay nikore. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Oct 13, 2017.

ग़ज़ल प्रकाशित नही होने के सम्बन्ध में 1 Reply

महोदय मैंने अभी अपनी एक ग़ज़ल को तीन बार पोस्ट किया परंतु प्रकाशित नही की गयीं है 3 दिन बीत गए । यदि कोई समस्या हो तो बताने का कष्ट करें ।

Started by Naveen Mani Tripathi. Last reply by योगराज प्रभाकर Oct 17, 2016.

ओबीओ का रंग 1 Reply

आदरणीय प्रधान  सम्पादक  जी ,                            नमस्कारमेरा  मानना है  कि हमारा  ओबीओ मंच साहित्य के  विविध  रंगों से  सरोबार  है। इसको  इतना फीका , उदास -सा  रंग यानी  रंगहीन-सा  बिलकुल नहीं  होना  चाहिए। मेंबर  होने  के  नाते ये  सिर्फ…Continue

Started by kanta roy. Last reply by Er. Ganesh Jee "Bagi" Jun 8, 2016.

कोई प्रदीप नील को बताएगा क्या ? 1 Reply

आदरणीय OBO टीम के वरिष्ठ सदस्य्गण ,मैं समझता हूँ कि यह उचित मंच है जहाँ मानकों के  आधार पर किसी चुटकुले को  लघुकथा , या लघुकथा को  चुटकुला घोषित किया जाता है।  अभी लघुकथा महा उत्सव ख़त्म हुआ है ,  थके होंगे तथा वहां शामिल रचनाओं के संकलन में व्यस्त…Continue

Started by प्रदीप नील वसिष्ठ. Last reply by योगराज प्रभाकर Dec 2, 2015.

थोड़ी हैरान हूं । 2 Replies

आदरणीय वरिष्ठ जन,सादर नमस्कार, मुझे शिकायत नहीं हैरानी है कि रचनाओं को जितने पाठक मिल रहे है उसकी तुलना में आधी मात्रा में भी प्रतिक्रिया नहीं मिलती।जबकि इस ग्रुप में काफ़ी सदस्य है । तो थोड़ी हताशा होती है । यूं लगता है जैसे लिखना व्यर्थ गया । सादर…Continue

Started by Rahila. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Nov 10, 2015.

छंद विधान के साथ संबंधित छंद का मानक/आदर्श वाचन का आडियो भी दिया जाये 1 Reply

एक निवेदनभरतीय छंद विधा में विभिन्न छंदों के मात्रिकता आंतरिक संरचना पर जानकारी उपलब्ध है । जिसके आधार पर मैं रचनाकर्म का अभ्यास करता हूॅ किंतु मुझे बार बार गेयता पर ध्यान देने का सुझाव दिया जाता है जो स्वागतेय  है इस परिप्रेक्ष्य में एक आग्रह है…Continue

Started by रमेश कुमार चौहान. Last reply by Prakash Chandra Baranwal Oct 6, 2015.

List of latest postings in various GroupsI 1 Reply

Just like OBO posts a list of the latest blogs on the right side of the screen, I suggest that OBO also post a list of latest additions to the various groups. This will serve the same significance as is presently offered to the 'blog posts'.…Continue

Started by vijay nikore. Last reply by Saurabh Pandey Jul 23, 2015.

क्या यह मेरा भ्रम है ? 17 Replies

व्यक्तिगत जीवन की व्यस्तताओं व विवशताओं के कारण पूर्व की भाँति न तो लिख पा रहा हूँ और न ही प्रतिक्रिया ही प्रकट कर पा रहा हूँ किन्तु ओबीओ पर पोस्ट रचनायें प्रतिदिन नियमित तौर पर पढ़ रहा हूँ. हाँ ! मासिक आयोजनों में सक्रिय रहने की यथा शक्ति कोशिश…Continue

Tags: है, ?, भ्रम, मेरा, यह

Started by अरुण कुमार निगम. Last reply by मिथिलेश वामनकर Jul 2, 2015.

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Comment by Ravi Prabhakar on May 3, 2017 at 4:21pm

आदरणीय प्रधान संपादक जी, 25वीं लाइव लघुकथा गोष्‍ठी की अपार सफलता को देखते हुए मैं आग्रह करूंगा कि प्रतिमाह होने वाले आयोजन को किसी भी विषय से मुक्‍त रखा जाए । विषय पर लिखना न केवल कठिन होता है बल्‍िक इससे सारा प्रवाह एक ही तरफ हो जाता है । विषय मुक्‍त रखने से अलग अलग फ्लेवर की लघुकथाएं पढ़ने को मिलती हैं। सादर

Comment by Samar kabeer on April 21, 2017 at 5:44pm
इन्ना लिल्लाहि व् इन्ना इलयहि राजेऊन ।

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 21, 2017 at 3:31pm

जी, मोहतरम जनाब समर कबीर साहिबI श्रीमती कांता रॉय अब ओबीओ की सदस्या नहीं हैंI 

Comment by Samar kabeer on April 21, 2017 at 3:08pm
तो फिर ये मान लिया जाये कि उनकी सदस्यता निरस्त कर दी गई ?

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 21, 2017 at 11:01am

ऐसा होना ही था. आपकी संवेदना और ओबीओ के प्रति आपकी उच्च भावनाएँ हैं आदरणीय समर साहब, जिसका मान रखना सभी सदस्यों का कर्तव्य है. और हमने अपनी ओर से सदा ही इस ओर ध्यान दिया है. 

सादर

Comment by Samar kabeer on April 21, 2017 at 10:38am
मेरी गुज़ारिश क़बूल की,इसके लिये शुक्रगुज़ार हूँ,जनाब सौरभ पाण्डेय साहिब,ओबीओ ज़िंदाबाद ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 21, 2017 at 12:29am

आदरणीय समर साहब, आ० कान्ता रॉय के अनुचित व्यवहार से भोपाल चैप्टर के सभी सदस्य चकित भी थे तो दुःखी भी थे. भोपाल चैप्टर के व्हाट्सअप समूह में भी उन्होंने कोई सधा और संंयत आचरण नहीं दिखाया था. मैं उस वक्त यात्रा पर था. लेकिन सुबह उनके कॉमेण्ट्स पढ़कर भारी निराशा हुई थी. और उन्हें समूह और चैप्टर से हकाल दिये जाने मैंने निवेदन किया था. 

ओबीओ के इस मंच से भी उनके अशोभनीय आचरण केलिए उन्हें मुअत्तल किया जाता है. 

आपकी संवेदना के लिए हार्दिक धन्यवाद.

शुभ-शुभ

Comment by Samar kabeer on April 20, 2017 at 11:38pm
आदाब,16 अप्रैल 2017 को भोपाल चैप्टर की शुरुआत हुई उस आयोजन के अंत में इस मंच की सदस्य मोहतरम कांता रॉय ने लगातार इस मंच को अपमानित किया है ,वो इस मंच और इसके सदस्यों को भ्रमित बताती हैं और दूसरे व्हाट्स एप ग्रुप में ओबीओ मुर्दाबाद के नारे लगा रहीं हैं,वो इस मंच के लिये हानिकारक हैं,मैं प्रबंधन समिति से पुरज़ोर गुज़ारिश करता हूँ कि मंच की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाए,प्रबंधन समिति चाहे तो मेरे लगाये हुए इलज़ाम की तस्दीक़ और तहक़ीक़ कर सकती है । उम्मीद है मेरी गुज़ारिश पर जल्द ही अमल किया जायेगा ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 13, 2016 at 4:01pm

सहित्य वस्तुतः तप और प्रेम की श्रेणी का अभ्यास है. यहाँ कुछ भी रेडीमेड या इन्स्टण्ट टाइप नहीं होता. होना भी नहीं चहिए. इस मंच पर विधाओं पर जितना कुछ उपलब्ध है, उनका अध्ययन करें फिर मनन करे, मंथन करें. फिर, रचनाकर्म करें. रचनाएँ ही सभी अभ्यासियों की सीख की आईना हुआ करती हैं. 

एक बात और,

विधाओं के लिए नियमावलियाँ और विधाओं के व्याकरण अभ्यासियों को मात्र साधन-सम्पन्न करते हैं. जिसकी (साधन की) जानकारी अत्यंत आवश्यक है. रचनाकर्म में भावबोध इसके बाद की चीज़ है. लेकिन वही सर्वोपरि है. इसलिए साधन को बिना पूरा जाने और उस पर बिना अभ्यास किये, भावबोध के नाम पर भावुक पंक्तियाँ लिख मारना साहित्य नहीं है. जैसा कि आजकल लोग बहुतायत में करते दिखते हैं. इसीको ओबीओ पर ’फेसबुकिया’ साहित्य कहा जाता है. वर्ना फेसबुक के पटल पर भी केवल कमज़ोर रचनाकर्म नहीं होता. लेकिन वहाँ अंकुश नही होता.

सादर

Comment by Kalipad Prasad Mandal on June 13, 2016 at 3:45pm

एक सुझाव :- मेरे जैसे लोग जो अभी अभी ओ बी ओ ज्वाइन किया है और ग़ज़ल तथा छन्द सिखने में प्रयत्नशील हैं उनको बहुत समस्यायों का सामना करना पड़ता है और छोटी छोटी बातों में एडमिन से या किसी सदस्य से पूछना पड़ता है और ऐसे प्रश्न करीब करीब हर बार रिपीट होता है | क्या ऐसा नहीं हो सकता कि ओ बी ओ में FAQ का  एक बटन हो जिसमे ग़ज़ल , छंद इत्यादि के बारेमें अक्सर पूछे गए प्रश्नों का जवाब हो | उससे हम जैसे नए लोगों आसानी होगी और आपको भी बार बार एक ही प्रश्न का उत्तर दोहराना नहीं  पडेगा | मेरे इनबॉक्स के sent में कुछ प्रश्न पड़े है ,जवाब की प्रतीक्षा कर रहा हूँ 

सादर 

कालीपद प्रसाद 

 
 
 

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