For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको,

सादर अभिवादन !

 

चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का आयोजन लगातार क्रम में इस बार अट्ठासीवाँ आयोजन है.   

 

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ  

18 अगस्त 2018 दिन शनिवार से 19 अगस्त 2018 दिन रविवार तक

(शनिवार एवं रविवार की तिथि सदस्यों के अनुरोध पर)
 
इस बार के छंद हैं - 

ताटंक छंद और कुण्डलिया छंद  

हम आयोजन के अंतरगत शास्त्रीय छन्दों के शुद्ध रूप तथा इनपर आधारित गीत तथा नवगीत जैसे प्रयोगों को भी मान दे रहे हैं.  छन्दों को आधार बनाते हुए प्रदत्त चित्र पर आधारित छन्द-रचना तो करनी ही है,  चित्र को आधार बनाते हुए छंद आधारित नवगीत या गीत या अन्य गेय (मात्रिक) रचनायें भी प्रस्तुत की जा सकती हैं.

साथ ही, रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, उचित यही होगा कि एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो छन्द बदल दें.   

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जायेंगीं.

ताटंक छंद के मूलभूत नियमों से परिचित होने के लिए यहाँ क्लिक करें

कुण्डलिया छंद के मूलभूत नियमों से परिचित होने के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, अन्यान्य छन्दों के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती है.

********************************************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो  18 अगस्त 2018 दिन शनिवार से 19 अगस्त 2018 दिन रविवार तक यानी दो दिनों के लिए रचना-प्रस्तुति तथा टिप्पणियों के लिए खुला रहेगा.

 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करेंआयोजन की रचनाओं के संकलन के प्रकाशन के पोस्ट पर प्राप्त सुझावों के अनुसार संशोधन किया जायेगा.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें। 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  8. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष :

यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

Views: 1123

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी , 

बहुत विस्तार से ताटंक छंदों व कुण्डलिया छंद में चित्र के सभी पहलुओं का बहुत ही  सुंदर चित्रण किया है, उचित सुझाव भी आदरणीय जन द्वारा  दिये गये हैं ।  हार्दिक बधाई।

मुह तरमा अनामिका साहिबा, छन्दों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, दोनों ही छन्दों में बेहतरीन रचना हुयी है । कोटि कोटि बधाई।

जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब , छन्दों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

कुण्डलिया

.................

हरियाली चहुँ ओर है, मंदिर है उस छोर।

बात साथ में काम भी, चलें नदी की ओर॥

चलें नदी की ओर, साथ कपड़े भी धोलो।

देखे हमें न लोग, इसलिए छाता खोलो॥

चार दशक का प्यार, प्रथम दिन से खुशहाली।

वसुधा का `शृंगार, स्वयं करती हरियाली॥

..........

ताटंक छंद

....................

खूब घटायें छाई काली, बारिश की ऋतु आई है।

पहुँच गए नदिया के तट पर, पत्नी साथ निभाई है॥

प्रथम मिलन जिस घाट हुआ था, उससे अब भी नाता है।

बीत गए चालीस बरस पर, प्यार और बढ़ जाता है॥

कपड़े भी धुलते रहते हैं, और बात हो जाती है।

पति पत्नी की ऐसी जोड़ी, नजर कहाँ अब आती है॥

जान गए कपड़े धोने से, दूषित जल की धारा है।

मजबूरी है यही हमारी, और न कोई चारा है॥

दोनों मन की बात जानते, कौन किसी से क्या बोले।

नजर लगे ना कभी प्यार को, बैठे हैं छाता खोले॥

दृश्य सुहाना मंदिर का है, तीन दिशा हरियाली है।

दिल से दिल के तार जुड़ गए, जीवन भर खुशहाली है॥

.......................................

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

 

 

 

आदरणीय अखिलेश जी सादर अभिवादन आपकी दोनों रचनाएँ चित्रानुरूप बहुत ही बेहतरीन हैं दिली बधाई कुबूल कीजिए

आदरणीय  छोटेलालजी

छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।

देखे हमें न लोग, इसलिए छाता खोलो॥//  ये भी  खूब कहा आपने, छाता  तानने का अलग ही कारण  ढूंढ लिया।  चित्र को जीवंत करते शानदार छंद।   हार्दिक बधाई आदरणीय  अखिलेश जी 

आदरणीया प्रतिभाजी

छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार। वर्षा थम चुकी है अतः छाता तानने का एक ही उद्देश्य है।

जनाब भाई अखिलेश साहिब  , प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर छंद हुए हैं , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l 

आदरणीय  तस्दीक  भाई

छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर सुंदर कुण्डलिया और ताटंक छंद रचे हैं आपने. कुण्डलिया छंद में जहाँ सावन की हरियाली से धरती के शृंगार की बात की है तो किसी प्यार करने वाले युगल को कपडे धोने के काम पर भी लगा दिया है प्यार  और साथ में घर के काम भी अद्भुत संगम है. /चलें नदी की ओर, साथ कपड़े भी धोलो।/ ...इस पंक्ति में 'चलें' के साथ 'धोलो' कुछ खटक रहा है  'चलें' को 'चलो'  भी करके देख लें. देखे/देखें. भी देख लें. 

ताटंक में आपने जहाँ प्रेम के प्रथम मिलन के महत्व को दर्शाया है तो दुसरे छंद में बुजुर्गों की आपस में मन की बात करने के बहाने को छंद के माध्यम से बहुत सुंदरता से दर्शाया है. सच है जहां प्रेम हो वहां सिर्फ साथ भी बहुत  कुछ कह जाता है मौसम तो अपना काम करता ही है. तीनों ही ताटंक भी आपने उत्तम रचे हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८४
"यूँ कर सकते हैं:- 'कुछ रह्म तो दिखा...."
1 hour ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८४
"जनाब, क्या रह्म की जगह 'करम' लफ्ज़ से बात बनेगी? कृपया बतलाएं. सादर"
2 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८४
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. ग़ज़ल में आपकी शिरकत और इस्लाह का तहेदिल से शुक्रिया. बताइ गई भूल को दूर…"
2 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक गीत मार्गदर्शन के निवेदन सहित: मनोज अहसास
"सादर आभार आदरणीय कबीर साहब"
2 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८४
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. ग़ज़ल में आपकी शिरकत और इस्लाह का तहेदिल से शुक्रिया. बताए गए ऐब को दूर…"
2 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८३
"आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का तहेदिल से शुक्रिया. सादर. "
2 hours ago
Samar kabeer commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"जनाब दयाराम मेठानी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' काम मजहब का हुआ…"
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"आ० समर कबीर साहब , बहुर -बहुत शुक्रिया "
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"आ० शेख  शहजाद उस्मानी  साहब., बहुत-बहुत धन्यवाद "
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"आ० सुरेन्द्र इंसान जी , आपका आभार i "
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

हर ख़ुशी का इक ज़रिआ चाहिये- ग़ज़ल

2122 2122 212हर ख़ुशी का इक ज़रिआ चाहिए ठीक हो यह ध्यान पूरा चाहिए।दर्द को भी झेल ले जो खेल में दिल…See More
2 hours ago
Rahul Dangi posted blog posts
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service