by Sushil Sarna
Mar 13
दोहा पंचक. . . . . होली
अलहड़ यौवन रंग में, ऐसा डूबा आज ।मनचलों की टोलियाँ, खूब करें आवाज ।।
हमजोली के संग में, खेले सजनी रंग ।चुपके-चुपके चल रहा, यौवन का हुड़दंग ।।
पिचकारी की धार से, ऐसे बरसे रंग ।जीजा की गुस्ताखियाँ, देख हुए सब दंग ।।
कंचन काया का किया, पति ने ऐसा हाल ।अंग- अंग रंग में ढला, यौवन लगे कमाल ।।
पारदर्शिता देख कर, दिलवाले हैरान ।पिचकारी के रंग से , डोल उठा ईमान ।।
सुशील सरना / 13-3-25
मौलिक एवं अप्रकाशित
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दोहा पंचक. . . . होली
by Sushil Sarna
Mar 13
दोहा पंचक. . . . . होली
अलहड़ यौवन रंग में, ऐसा डूबा आज ।
मनचलों की टोलियाँ, खूब करें आवाज ।।
हमजोली के संग में, खेले सजनी रंग ।
चुपके-चुपके चल रहा, यौवन का हुड़दंग ।।
पिचकारी की धार से, ऐसे बरसे रंग ।
जीजा की गुस्ताखियाँ, देख हुए सब दंग ।।
कंचन काया का किया, पति ने ऐसा हाल ।
अंग- अंग रंग में ढला, यौवन लगे कमाल ।।
पारदर्शिता देख कर, दिलवाले हैरान ।
पिचकारी के रंग से , डोल उठा ईमान ।।
सुशील सरना / 13-3-25
मौलिक एवं अप्रकाशित