चौपाइयाँ

दोहा

बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।

दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। 

चौपाई

वह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।

मन   साजन  यह  कैसे  भूले। साथ-साथ   तुम  हम  थे   झूले।।

*

तुम   थे  झूले   थाम   कलाई। मैं   साजन   कितनी  शरमाई।।

तुम  जब-जब  थे  पींग बढ़ाते। हम   इक  दूजे  में   खो  जाते।।

*

झुकीं-झुकीं  मेरी  ये  अँखियाँ। देख रहीं थीं हँस-हँस  सखियाँ।।

पर  साजन  तुम  रुके न माने। मिले  मुझे  सखियों   से   ताने।।

*

भूल  न  पाई  वह  पल प्यारे। स्वप्न   सरीखे   हैं   वह   सारे।।

आने  को  है  फिर  अब सावन। लेकिन पास नहीं तुम साजन।।

#

~ अशोक रक्ताले ‘फणीन्द्र’, उज्जैन.

 

 

Load Previous Comments

  • सदस्य टीम प्रबंधन

    Saurabh Pandey

    आदरणीय अशोक भाईजी,

    वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है. भावविभोर मन युवा सुलभ स्मृतियों के आलोड़न में बरबस पींगें लिये जा रहा है. तभी तो प्रस्तुति में ’साजना’ जैसा सिनेमाई शब्द भी प्रयुक्त हो कर अचंभित नहीं करता, चकित करता है. हालाँकि इस शब्द का स्थानापन्न संभव था.  

    प्रस्तुति से गुजरते हुए कुछ भाव उभर रहे हैं _ 

    दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।   ...  दूर नहीं फिर सुख-घड़ी 

    झुकीं-झुकीं मेरी ये अँखियाँ। देख रहीं थीं हँस-हँस सखियाँ।।  ... झुकी-झुकी या झुकीं झुकीं ? दोनों के प्रयोग में व्याकरण सम्मत अंतर है. यहाँ अँखियों के वचन (बहुवचन) से झुकी का निर्धारण नहीं होगा. झुकी-झुकी अँखियों की दशा है अर्थात ये विशेषण हैं. क्रिया होती तो अँखियाँ झुकतीं. यानी, अँखियाँ झुकीं (फिर उठीं. फिर बंद हो गयीं आदिक)  

    भूल  न  पाई  वह  पल प्यारे। स्वप्न   सरीखे   हैं   वह   सारे।।  .....  भूल न पायी पल वे प्यारे .. स्वप्न सरीखे हैं वे सारे 

    आने  को  है  फिर  अब सावन। लेकिन पास नहीं तुम साजन।। ...    आने को है फिर से सावन ... 

    इस रोचक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई .. 

     

  • Ashok Kumar Raktale

    आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी ! 'साजना' शब्द के प्रयोग से मैं स्वयं भी बहुत संतुष्ट नहीं था किन्तु किसी शीघ्रता में वह बदलाव नहीं हो सका था. आपके द्वारा इंगित अन्य त्रुटियों को भी मैं अवश्य ठीक कर यह रचना प्रस्तुत करूंगा. सादर 

  • Ashok Kumar Raktale

    आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार.  सादर