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Description
by जगदानन्द झा 'मनु'
Aug 10
अहाँ मुस्कैत रही हमरा देखैत रही
अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही
रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही
सगर गुणगान अहाँक हम गाबैत रही
मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही
अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही
अहाँ ढारैत रही डुबि हम पीबैत रही
सुनरकी संग हिया रसमे तीतैत रही
अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही
पिया मनुहारसँ ई जीवन जीबैत रही
(मात्राक्रम : 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे।दोसर शेरक, दोसर पाँतीमे “अहाँक” “क”केँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)
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मैथिली साहित्य
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गजल
by जगदानन्द झा 'मनु'
Aug 10
अहाँ मुस्कैत रही हमरा देखैत रही
अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही
रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही
सगर गुणगान अहाँक हम गाबैत रही
मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही
अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही
अहाँ ढारैत रही डुबि हम पीबैत रही
सुनरकी संग हिया रसमे तीतैत रही
अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही
पिया मनुहारसँ ई जीवन जीबैत रही
(मात्राक्रम : 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे।दोसर शेरक, दोसर पाँतीमे “अहाँक” “क”केँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)