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रकमिश सुल्तानपुरी
  • Male
  • Sultanpur UP
  • India
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रकमिश सुल्तानपुरी's Page

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रकमिश सुल्तानपुरी updated their profile
Nov 3, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"आ. रकमिश जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 18, 2018
narendrasinh chauhan commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"खुब सुन्दर रचना"
Oct 18, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही ज़नाब रकमिश जी.."
Oct 18, 2018
Samar kabeer commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"जनाब रकमिश सुल्तानपुरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । एक दो जगह टंकण त्रुटियाँ देखें,कुछ शब्दों में स्पेस नहीं है । 'उम्र का बेशक़ तज़ुर्ब भी मुझे हो जाएगा, तब' इस मिसरे में 'तज़ुर्बा' शब्द की वजह से मिसरा…"
Oct 17, 2018
रकमिश सुल्तानपुरी posted a blog post

ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर

वक़्त आने दो ज़रा फ़िर न झुकूंगा देख लेना । एक दिन पत्थर पे पानी से लिखूंगा देख लेना ।.मैं तेरे रहमोकरम की काफिरी करता नही हूँ । हूँ मुकम्मल एक तूफ़ां जब उडूँगा देख लेना ।.हौसला रख चल पड़ा हूँ रौशनी लाने दिलों में । एक जुगनू सा अँधेरों से लड़ूँगा देख लेना ।.रास्तों में हूँ यक़ीनन दूर मुझसे मंज़िलें, पर । चल रहा हूँ मंजिलों पर ही रुकूँगा देख लेना ।.वक़्त का क्यावक़्त गुज़रेगा अँधेरी रात का भी । जगमगाता भोर का तारा बनूगा देख लेना ।.उम्र का बेशक़ तज़ुर्बा भी मुझे हो जाएगा, तब । रहनुमाई आपसे बेहतर करूँगा…See More
Oct 17, 2018
रकमिश सुल्तानपुरी is now a member of Open Books Online
Oct 15, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Sultanpur
Native Place
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

रकमिश सुल्तानपुरी's Blog

ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर

वक़्त आने दो ज़रा फ़िर न झुकूंगा देख लेना ।

एक दिन पत्थर पे पानी से लिखूंगा देख लेना ।

.

मैं तेरे रहमोकरम की काफिरी करता नही हूँ ।

हूँ मुकम्मल एक तूफ़ां जब उडूँगा देख लेना ।

.

हौसला रख चल पड़ा हूँ रौशनी लाने दिलों में ।

एक जुगनू सा अँधेरों से लड़ूँगा देख लेना ।

.

रास्तों में हूँ यक़ीनन दूर मुझसे मंज़िलें, पर ।

चल रहा हूँ मंजिलों पर ही रुकूँगा देख लेना ।

.

वक़्त का क्यावक़्त गुज़रेगा अँधेरी रात का भी ।

जगमगाता भोर का…

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Posted on October 17, 2018 at 3:00am — 4 Comments

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At 6:46am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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