For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ पवन मिश्र
  • Male
  • कानपुर, उ0प्र0
  • India
Share

डॉ पवन मिश्र's Friends

  • Samar kabeer
  • Saurabh Pandey

डॉ पवन मिश्र's Groups

 

डॉ पवन मिश्र's Page

Latest Activity

डॉ पवन मिश्र replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आद0 जनाब अफ़रोज़ जी, दिल से धन्यवाद। त्रुटियों को मूल में ठीक कर लिया है। पुनः धन्यवाद आपका"
Dec 22, 2017
डॉ पवन मिश्र replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"हार्दिक आभार आद0 सुरेंद्र जी"
Dec 22, 2017
डॉ पवन मिश्र replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आप तक शेर पहुंचे। लेखन सफल रहा। शुक्रिया जनाब मो0 आरिफ जी"
Dec 22, 2017
डॉ पवन मिश्र replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"हृदय से आभार आद0 अजय गुप्ता जी"
Dec 22, 2017
डॉ पवन मिश्र replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"*२१२२ २१२२ २१२* आँधियों को छेड़ने का काम है।मेरे सर पे बस यही इल्ज़ाम है।। हुस्न ताज़िर है, तिज़ारत काम है।इश्क तो बस बेवजह बदनाम है।। मेरे होठों पे उन्ही का नाम है।उनके लब पे गैर का इक जाम है।। हम भुला पाए न उनको आज भी।ख़ाक तेरे मैकदे का जाम…"
Dec 22, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 विजय निकोर जी, हृदय से धन्यवाद"
Dec 14, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 रामबली गुप्त जी, हार्दिक आभार"
Dec 14, 2017
vijay nikore commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"सुन्दर प्रभावशाली गीत के लिए बधाई, आ० पवन जी।"
Dec 14, 2017
रामबली गुप्ता commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"सुंदर गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय पवन जी"
Dec 14, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी, सुंदर सर्जना हेतु बधाई प्रेषित है।"
Dec 13, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 सुरेंद्र नाथ सिंह जी, हार्दिक आभार"
Dec 13, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आदरणीय मनोज श्रीवास्तव जी, इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिये हृदय से धन्यवाद"
Dec 13, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 पवन मिश्र जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सर्जना हुई है, बहुत उम्दा। आपको इस प्रस्तुति पर कोटिश बधाइयाँ निवेदित है। सादर"
Dec 13, 2017
Manoj kumar shrivastava commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आदरणीय डाॅ. पवन मिश्र जी सादर वन्दे! बहुत ही अच्छी रचना है। सादर बधाई स्वीकार करें।"
Dec 12, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 राजेश कुमारी जी। इस दिशा में मेरा ज्ञान बहुत अल्प है। आग्रह है आपसे कि कृपया गीत और नवगीत को समयानुकूल व्याख्यायित कर दीजियेगा।"
Dec 12, 2017
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 राजेश कुमारी जी, हार्दिक धन्यवाद"
Dec 12, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
कानपुर
Native Place
देवरिया
Profession
अध्यापक
About me
कर्म से अध्यापक हूँ।मन के भावों की टूटे-फूटे शब्दों में सहज अभिव्यक्ति का प्रयास करता हूँ।

डॉ पवन मिश्र's Blog

नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है

अब तो आओ कृष्ण धरा ये थर्राती है।

लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है।।

द्युत क्रीड़ा में व्यस्त युधिष्ठिर खोया है,

अर्जुन का गांडीव अभी तक सोया है।

दुर्योधन निर्द्वन्द हुआ है फिर देखो,

दुःशासन को शर्म तनिक ना आती है।।

लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है।।

धधक रही मानवता की धू धू होली,

विचरण करती गिद्धों की वहशी टोली।

नारी का सम्मान नहीं अब आँखों में,

भीष्म मौन फिर गांधारी सकुचाती है।।

लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती…

Continue

Posted on December 11, 2017 at 8:30pm — 15 Comments

ग़ज़ल- आज फिर उसने कुछ कहा मुझसे

२१२२ १२१२ २२

आज फिर उसने कुछ कहा मुझसे।

आज फिर उसने कुछ सुना मुझसे।।

बाद मुद्दत के आज बिफ़रा था।

आज दिल खोल कर लड़ा मुझसे।।

जिसकी क़ुर्बत में शाम कटनी थी।

हो गया था वही ख़फ़ा मुझसे।।

दूर दिल से हुए सभी शिकवे।

टूट कर ऐसे वो मिला मुझसे।।

दरमियाँ है फ़क़त मुहब्बत ही।

अब कोई भी नहीं गिला मुझसे।।

चांद तारे या वो फ़लक सारा।

बोल क्या चाहिए ? बता मुझसे।।

क़ुर्बत= सामीप्य

फ़लक=…

Continue

Posted on December 3, 2017 at 1:30pm — 16 Comments

ग़ज़ल- नवजीवन की आशा हूँ

22 22 22 2


नवजीवन की आशा हूँ।
दीप शिखा सा जलता हूँ।।

रक्त स्वेद सम्मिश्रण से।
लक्ष्य सुहाने गढ़ता हूँ।।

जीवन के दुर्गम पथ पर।
अनथक चलता रहता हूँ।।

प्रभु पर रख विश्वास अटल।
बाधाओं से लड़ता हूँ।।

घोर तिमिर के मस्तक पर।
अरुणोदय की आभा हूँ।।

भावों का सम्प्रेषण मैं।
शंखनाद हूँ कविता हूँ।।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on February 5, 2017 at 6:58pm — 12 Comments

नवगीत- आया जाड़ा हाड़ कँपाने

अँगड़ाई ले रही प्रात है,

कुहरे की चादर को ताने।

ओढ़ रजाई पड़े रहो सब,

आया जाड़ा हाड़ कँपाने।।

तपन धरा की शान्त हो गयी,

धूप न जाने कहाँ खो गयी।

जिन रवि किरणों से डरते थे,

लपट देख आहें भरते थे।

भरी दुपहरी तन जलता था,

बड़ी मिन्नतों दिन ढलता था।

लेकिन देखो बदली ऋतु तो,

आज वही रवि लगा सुहाने।

आया जाड़ा हाड़ कँपाने।।

गमझा भूले मफ़लर लाये,

हाथों में दस्ताने आये।

स्वेटर टोपी जूता मोजा,

हर आँखों ने इनको…

Continue

Posted on January 22, 2017 at 8:30pm — 11 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:52pm on January 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रामबली गुप्ता commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"भाई लक्ष्मण जी ग़ज़ल पर बढियाँ प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। समर भाई साहब की बातों का।…"
23 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"ग़ज़ल पर बढियाँ प्रयास हुआ है भाई बृजेश कुमार जी। हार्दिक बधाई स्वीकारें।सादर"
27 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"आदरणीय शरद सिंह जी रचना पर प्रयास के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। बताना चाहूँगा कि आपकी रचना में…"
48 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" posted a blog post

इसी दुनिया में अपनी मुख़्तसर दुनिया बनाता हूँ

1222 1222 1222 1222ज़मीन-ओ-आसमाँ के दरमियाँ रस्ता बनाता हूँइसी दुनिया में अपनी मुख़्तसर दुनिया बनाता…See More
59 minutes ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post अंगुलिमाल(लघुकथा)
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब नमस्ते                 …"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है )
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,                    …"
2 hours ago
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post अंगुलिमाल(लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब,                    …"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan posted a blog post

ग़ज़ल (जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है )

(मफाईलुन-मफाईलुन-फऊलन )जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है| ये दिल फिर उसकी हसरत कर रहा है |लगाए ज़ख़्म…See More
2 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--फागुन
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी ।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--फागुन
"बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब । संशोधन कर लिया है ।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -खेल सारे, हर तमाशा छोड़ कर
"खेल सारे, हर तमाशा छोड़ करसब को जाना है ये मेला छोड़ कर वाह! वाह!!  बहुत ख़ूब ! बहुत ख़ूब! …"
4 hours ago
पीयूष कुमार द्विवेदी posted blog posts
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service