For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Anuraag Vashishth
Share

Anuraag Vashishth's Groups

 

Anuraag Vashishth's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
pilani
Native Place
pilani

Anuraag Vashishth's Blog

घनेरे पेड़ पर है चाँद और हम छत पर बैठे हैं - अनुराग

मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन

घनेरे पेड़  पर है चाँद  और हम छत पर बैठे हैं

हवा के पास  जैसे  आज  बस  तेरे ही किस्से हैं

अगर आ जाओ तुम तो और मीठे हो के महकेंगे

तुम्हारे  बोये   पेड़ों   पर  सुनहरे  आम  आये हैं

 

तेरे कमरे में  जो जैसे था  सब  वैसे का वैसा है

क़िताबें शेल्फ में है  मेज पर कुछ फूल रक्खे हैं

 

बचा के  रख सकूँगा क्या  इन्हें मैं गर्म झोंकों से

मेरे आँगन में इक लड़की ने उजले फूल बोये…

Continue

Posted on May 23, 2017 at 1:28pm — 16 Comments

हमारे हौसले अब तक कहाँ जालिम ने देखे हैं - अनुराग

मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन  मुफ़ाईलुन

हमारे हौसले अब तक  कहाँ जालिम ने देखे हैं

चटानें  टूट जाती  हैं  जहाँ  हम  पाँव रखते हैं

 

हमी  ने फूल  महकाए हैं सहराओं  के सीने में

हमी  ने  बंजरों  के सूने  दिल  में  बीज बोये हैं

 

हमी सर मार  के  मरते  रहे  हैं अपने तेशे पर

हमी  ने  पर्वतों  को  काट  के  रस्ते  बनाये  हैं

 

हमी ने आँधियों की सरकशी के रूख को मोड़ा है

हमी ने  जिद्दी  तूफानों  के  जालिम पंख तोड़े…

Continue

Posted on May 14, 2017 at 8:30am — 28 Comments

पंडित-मुल्ला खुद नहीं समझे, हमको क्या समझायेंगे - अनुराग

फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फा

पंडित-मुल्ला खुद नहीं समझे, हमको क्या समझायेंगे

मीर  कबीर  से  चल  के  पूछें,   वे  ही  राह  बतायेंगे 

 

झूठ  हैं  सारे  मंदिर-मस्जिद,  पंडित-मुल्ला  झूठे  हैं            

ये  कुछ  और नहीं  करने  के, सुलझे  को  उलझायेंगे

 

राह दुई की  जहर है प्यारे, इधर-उधर क्यों जाएँ हम

केवल  अपनी रूह की सुनियो, बाकी सब भटकायेंगे        

 

राह कठिन है; तल में अगिन है, ऊपर बरसे है…

Continue

Posted on April 25, 2017 at 5:42pm — 11 Comments

इक तेरी याद के भँवर में हूँ - अनुराग

फाइलातुन  मुफाइलुन  फैलुन

इक   तेरी  याद  के भँवर में हूँ

मैं   अभी  दूर  के  सफ़र में  हूँ

 

अपने ही ख्वाब की नजर में हूँ

अपने ही  आइने  के  घर में हूँ

 

तुझको अब तक यकीं नहीं है मगर

मैं  तो अब भी  तेरे  असर में हूँ

 

इर्तका में  कभी जो भड़का था

आज  भी  मैं  उसी  शरर में हूँ

 

आसमानों का मुझको खौफ नहीं

जानियो  मत की  तेरे डर में हूँ

 

तप  रहा  है  गुलाब  का सूरज

एक…

Continue

Posted on April 12, 2017 at 6:56pm — 16 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार। बहुत ही सुन्दर रचना, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
3 hours ago
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"आदरणीय नादिर जी, बहुत बहुत आभार। आपके द्वारा बताई त्रुटी को मैं शीघ्र ही सुधार लेती हूँ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post धरती पुत्र (लघुकथा)
"बेहतरीन विषय और कथा.."
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
"बहुत खूब"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"शुक्रिया आदरणीय श्याम नारायण जी...सादर"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आ. भाई सुशील जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आ. भाई श्याम नारायन जी, आपको गजल अच्छी लगी , लेखन सफल हुआ । मार्गदर्शन करते रहिए । हार्दिक आभार ।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आ. भाई नादिर जी, गजल का अनुमोदन और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
13 hours ago
Shyam Narain Verma commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"क्या बात है, हार्दिक बधाई l सादर"
14 hours ago
Shyam Narain Verma commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"बहूत ही उम्दा प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
14 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on विनय कुमार's blog post स्टेटस--लघुकथा
"विसंगतियों को शाब्दिक और चित्रित करती इन्सानियत पर विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत…"
14 hours ago
Shyam Narain Verma commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"क्या बात है, बहुत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service