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Kumar Gourav
  • Male
  • Samastipur Bihar
  • India
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Kumar Gourav's Page

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babitagupta commented on Kumar Gourav's blog post अमानत (लघुकथा)
"रस्सी जल गई, पर ऐठ नहीं गई, कहावत को चरितार्थ करती लघुकथा, झूठी शान में, फिर चाहे बेटी का माल ही क्यों ना चला गया हो, बेहतरीन रचना,बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सर जी. "
Jul 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Kumar Gourav's blog post अमानत (लघुकथा)
"आ. कुमार गौरव जी, नमस्कार । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 7
Neelam Upadhyaya commented on Kumar Gourav's blog post अमानत (लघुकथा)
"आदरणीय कुमार गौरव जी, नमस्कार।  अच्छी लघु कथा हुई है।  बधाई स्वीकार करें। "
Jul 6
Samar kabeer commented on Kumar Gourav's blog post अमानत (लघुकथा)
"जनाब कुमार गौरव जी आदाब,लघुकथा का अच्छा प्रयास हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 6
Kumar Gourav posted blog posts
Jul 6
babitagupta commented on Kumar Gourav's blog post सफेदपोश (लघुकथा)
"आदरणीय सर जी, वर्तमान व्यवस्था पर शब्दों से अच्छा कटाक्ष किया है, बधाई स्वीकार कीजिए प्रस्तुत रचना के लिए ।"
May 16
vijay nikore commented on Kumar Gourav's blog post पापनाशिनी
"लघु कथा अच्छी लगी, बधाई।"
May 15
Samar kabeer commented on Kumar Gourav's blog post पापनाशिनी
"जनाब कुमार गौरव साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Kumar Gourav commented on मोहन बेगोवाल's blog post पर्दा (लघुकथा)
"पर्दे के पीछे का सच , बहुत सुंदर विचारोत्तेजक रचना । बहुत बहुत बधाई ।"
May 13
TEJ VEER SINGH commented on Kumar Gourav's blog post पापनाशिनी
"हार्दिक बधाई आदरणीय कुमार गौरव जी। मातृदिवस पर माँ की महिमा और मजबूरी दोनों को दर्शाती लघुकथा।"
May 11
Neelam Upadhyaya commented on Kumar Gourav's blog post पापनाशिनी
"आदरणीय कुमार गौरव जी, नमस्कार।  निम्न माध्यम वर्ग की दैनिन्दिनी के यथार्थ को दर्शाती बहुत ही बढ़िया लघुकथा हुई  है। बधाई  स्वीकार करें।   "
May 11
Kumar Gourav posted a blog post

पापनाशिनी

चिड़िया का निवाला खाकर और भालू से डरकर बालक सो गया था। वह जूठे बरतनों से को ऐसे रगड़ रही थी जैसे कोई अपराधी सबूत मिटा रहा हो।वह बिस्तर पर लेटा उस पंखे को घूर रहा था जिसके डैने बिजली बिल न देने के कारण थम गये थे । आँचल में हाथ पोंछते हुए वह आई और बिना कोई शोर किए बगल में लेट गई ।उसने करवट लेते हुए उसके बदन पर हाथ रखा तब उसने धीरे से हाथ हटा दिया " सो जाओ कल से मुन्ने का स्कूल सुबह की पाली में है सबेरे उठना होगा।"हाथ खींचकर उसने तकिया बना लिया " सो गया अपना शेर ।"वो धीरे से हँसी " शेर .. भालू आ…See More
May 11
Rahila commented on Kumar Gourav's blog post कमाई (लघुकथा)
"वाह... जिंदगी भर की पूंजी डूब गई , वहाँ महीने का हिसाब क्या करना । " पूरी रचना का सार समेट लिया । बहुत सुंदर।"
May 9
Neelam Upadhyaya commented on Kumar Gourav's blog post कमाई (लघुकथा)
"बहुत ही बेहतरीन लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय कुमार गौरव जी ।"
May 8
Dr Ashutosh Mishra commented on Kumar Gourav's blog post कमाई (लघुकथा)
"आदरणीय गौरव जी  इस रचना की अंतिम पंक्तियाँ तो दिमाग में घूंम रही हैं। सम्बाद शैली मंत्र मुग्ध करने वाली है  कभी कभार ऐसी रचा पढ़ने को मिलती है।।।।शिल्प की जानकारी मुझे ज्यादा नहीं है आपकी बात मुझ तक पहुँची अनद आया।।रचना पर हार्दिक बधाई सादर"
May 7
Samar kabeer commented on Kumar Gourav's blog post कमाई (लघुकथा)
"जनाब कुमार गौरव जी आदाब,बहुत बढ़िया लघुकथा हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Samastipur bihar
Native Place
Shahapur patory
Profession
Business

Kumar Gourav's Blog

अमानत (लघुकथा)

जमींदार रामलोचन की आर्थिक स्थिति उस स्तर पर पहुंच गई थी जहाँ कहा जाता है कि हाथी बिक गया जंजीर ढ़ो रहे हैं।

उधर गाँव के टेलर का लड़का हाथी खरीदने को आतुर था। तीनों पहर के भोजन की निश्चिंतता न थी, लेकिन बंगलौर के किसी फैशन संस्थान में नामांकन के लिए इंटरव्यू दे आया था । वहाँ फीस की रकम सुनकर ही समझ गया था ये रकम सीधे तरीके से वह हफ्ते भर में नहीं जुटा सकता ।

घर लौटने के रास्ते में उसने हर सीधे टेढ़े तरीके से सोचा तब उसे लगा जमींदार के घर में ही उसकी मंशा पूरी हो सकती है, वरना गाँव में…

Continue

Posted on July 6, 2018 at 8:00am — 4 Comments

पापनाशिनी

चिड़िया का निवाला खाकर और भालू से डरकर बालक सो गया था। वह जूठे बरतनों से को ऐसे रगड़ रही थी जैसे कोई अपराधी सबूत मिटा रहा हो।



वह बिस्तर पर लेटा उस पंखे को घूर रहा था जिसके डैने बिजली बिल न देने के कारण थम गये थे । आँचल में हाथ पोंछते हुए वह आई और बिना कोई शोर किए बगल में लेट गई ।

उसने करवट लेते हुए उसके बदन पर हाथ रखा तब उसने धीरे से हाथ हटा दिया " सो जाओ कल से मुन्ने का स्कूल सुबह की पाली में है सबेरे उठना होगा।"

हाथ खींचकर उसने तकिया बना लिया " सो गया अपना शेर ।"

वो… Continue

Posted on May 11, 2018 at 11:00am — 4 Comments

कमाई (लघुकथा)

छुटपुट अंधेरा फैलने लगा था । दलन ने बाहर साइकिल खड़ी और आकर अम्मा के पैर छुए "कार्ड छप गया भौजी तो भगवान के बाद सबसे पहला आपको अर्पण करने आया हूं । "

"जय हो , बाल बच्चा सुखी रहे। अरे हाँ बिटिया ने झुमके के लिए कहा था। बनवा लाये हैं, ले जाओ दिखा देना । एकदम डिट्टो सेम डिजाइन है जैसा रमेश की बहू के लिए बनवाया था। "

अम्मा कार्ड को निहारती हर्ष ने भर गई "अरे बहू आलमारी में जेवरवाला बटुआ होगा नया सा, वो लाकर देना जरा। "

दलन वही जमीन पर पालथी मार के बैठ गया।

अम्मा की बतकही शुरू हो… Continue

Posted on May 5, 2018 at 11:04pm — 6 Comments

क्षितिज

संडे छुट्टी को कैश करने के लिए शनिवार को ही निकल लिए । प्रोग्राम लेट बना इसलिए रिजर्वेशन तो मिला लेकिन आरएसी सीट मिली। कोई खास परेशानी की बात नहीं थी दिल्ली से मथुरा है ही कितनी दूर। सहयात्री गोरा चिट्टा कश्मीरी लड़का था। जो हाथ में डायरी और कलम लिए सोच में डूबा था।

"कश्मीरी हो बॉस।"

"हाँ ",उसका जबाव बहुत संक्षिप्त था।

"यहाँ कब से हो ", बेधड़क उसके पास गया तो उसने खड़े होकर बैठने के लिए जगह बनाई।

"दस बारह साल हो गये जब अम्मी अब्बू नहीं रहे तभी से "

ओह् .... थोड़ी देर हम… Continue

Posted on April 25, 2018 at 12:13am — 4 Comments

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