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Mirza Hafiz Baig
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Welcome, Mirza Hafiz Baig!

Latest Activity

Neelam Upadhyaya commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
" आदरणीय मिर्ज़ा हाफिज बेग जी, नमस्कार।  आज की ज्वलंत समस्या - बेरोजगारी पर कटाक्ष करती बहुत ही उम्दा लघुकथा।   हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Sep 17
Nita Kasar commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
" आपने रोज़गार से जुड़ी समस्या पर कथा जरिये प्रकाश डाला है जीवन से जुड़े चक्रव्यूह को भेदने के लिये धैर्य व भरोसे का होना ज़रूरी है ।हर रात के बाद सुबह आती है ,बधाई आद० हफ़ीज़ बैग जी ।"
Sep 16
Samar kabeer commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
"जनाब हफ़ीज़ बैग साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 16
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mirza Hafiz Baig's blog post शर्म हमको मगर नही आती
"बेशर्मों की विवशता और पोल के साथ उनके नेटवर्क बताती  बेहतरीन तंजदार, विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मिर्ज़ा ह़ाफ़िज़ बेग साहिब!  लघुकथा संदर्भ में मुझे लगा कि कुछ पुनरावृत्तियों/शब्दों को कम किया जा…"
Sep 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mirza Hafiz Baig's blog post बकरे की अम्मा
"अधोलिखित सभी उपयोगी व मार्गदर्शक टिपप्णियां पढ़कर मेरे मन में आज जो सूझा, उसे सांझा कर आप  सुधी पाठकगण की राय और इस्लाह चाहता हूँ : संवाद // “देखिये ! हम किसी पर अत्याचार नहीं करते । हमारी व्यवस्था भी लोकतांत्रिक है । हम हर एक बकरे…"
Sep 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mirza Hafiz Baig's blog post उल्टी गंगा
" बेहतरीन प्रवाहमय, यथार्थपूर्ण, कटाक्षपूर्ण सृजन।  हार्दिक बधाई मुहतरम जनाब मिर्ज़ा ह़ाफ़िज़ बेग  साहिब।"
Sep 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य 2
"दो पड़ोसी शासकों के स्वार्थपूर्ण रवैये और फैसलों और मासूम सी निर्दोष जनता पर मानसिक, आर्थिक ज़ुल्म-ओ-सितम को मिश्रित लघुकथा शैली में उभारती बेहतरीन भावपूर्ण, यथार्थपूर्ण रचना। आपकी अपनी विशिष्ट शैली। हार्दिक बधाई मुहतरम जनाब मिर्ज़ा ह़ाफ़िज़…"
Sep 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"बेहतरीन भावपूर्ण, यथार्थपूर्ण सृजन। आपकी अपनी विशिष्ट शैली। हार्दिक बधाई मुहतरम जनाब मिर्ज़ा ह़ाफ़िज़ बेग  साहिब।"
Sep 15
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
"स्थायी संतोषजनक रोज़गार की समस्याओं और पहेलियों और नेताओं के बड़बोलेपन पर बढ़िया कटाक्ष करती रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब  मिर्ज़ा ह़ाफ़िज़ बेग  साहिब।  थोड़ा और समय देकर टंकण त्रुटियाँ सुधारते हुए इसमें अधिक निखार…"
Sep 14
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
"आद0 मिर्ज़ा हाफ़िज़ सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार कीजिये।"
Sep 14
TEJ VEER SINGH commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मिर्ज़ा हफ़ीज़ बेग जी। आज के हालात पर बेहतरीन कटाक्ष करती सुंदर लघुकथा।"
Sep 14
Mirza Hafiz Baig posted a blog post

सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)

बहुत अंधेरा है। सुबह बहुत दूर है अभी। अमेरिका से अभी चली हो शायद...नींद नहीं आती। आये भी कैसे? पेट खाली नहीं, भविष्य तो खाली है। खाली पेट नींद भले आ जाये; लेकिन भविष्य की सुरक्षा की चिंता कब सोने देती है? माँ बाप के लाखों फूंक कर, रात और दिन की तपस्या से व्यवसायिक डिग्री हासिल करने के बाद भी यह साल दो साल के एग्रीमेंट? इससे तो बेहतर था पकोड़े तलता। लेकिन वहां भी पहले से जमे लोग आपका स्वागत नहीं करते... “यहां नहीं, यहां नहीं। हम इतने बरसों से यहां झक मार रहे हैं क्या?”“एक तो धंधा वैसे ही मंदा है।…See More
Sep 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"बहुत बढ़िया मिर्ज़ा साहब...बड़ी ही सार्थकता से आपने अपनी बात कही है लघुकथा में..बधाई"
Jul 29
Lalbahadur Yadav commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"युद्ध और साम्राज्य kahani bahut achchi lagi"
Jul 28
Dr Ashutosh Mishra commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"आदरणीय  मिर्ज़ा हफ़ीज़ बैग जी हॉस्पिटल का सजीव चित्रण करती सार्थक लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई सादर "
Jul 26
Samar kabeer commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"जनाब मिर्ज़ा हफ़ीज़ बैग साहिब आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai
Native Place
Bhilai
Profession
service at Bhilai Steel Plant (SAIL)

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Mirza Hafiz Baig's Blog

सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)

बहुत अंधेरा है। सुबह बहुत दूर है अभी। अमेरिका से अभी चली हो शायद...

नींद नहीं आती। आये भी कैसे? पेट खाली नहीं, भविष्य तो खाली है। खाली पेट नींद भले आ जाये; लेकिन भविष्य की सुरक्षा की चिंता कब सोने देती है? माँ बाप के लाखों फूंक कर, रात और दिन की तपस्या से व्यवसायिक डिग्री हासिल करने के बाद भी यह साल दो साल के एग्रीमेंट? इससे तो बेहतर था पकोड़े तलता। लेकिन वहां भी पहले से जमे लोग आपका स्वागत नहीं करते... “यहां नहीं, यहां नहीं। हम इतने बरसों से यहां झक मार रहे हैं क्या?”

“एक तो…

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Posted on September 14, 2018 at 11:00am — 6 Comments

दर्द (लघुकथा)

दर्द फिर उठा है। दर्द बहुत तेज़ है। कहते हैं, दर्द का हद से गुज़र जाना दवा है। ऐ दर्द गुज़र जा आज अपनी हदों से तू। ज़रा मैं भी तो देखूँ तेरा दवा हो जाना।

दर्द सचमुच बड़ा बेदर्द है। वह सचमुच बढ़ता जाता है; अपनी हदों को पार करता हुआ। अब नही, अब नही.......। अब बर्दाश्त नही होता। लेकिन दर्द तो बेदर्द है। बढ़ता ही जा रहा है; बर्दाश्त की हदों को पार करता हुआ। अब लगता है, जैसे सिमट आया है एक ही जगह।

दिल!

आह, दर्द-ए-दिल। सिमट आता है एक ही मुकाम पर। लगता है जैसे दिल किसी शिकंजे में कसा…

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Posted on July 23, 2018 at 1:00pm — 7 Comments

युद्ध और साम्राज्य 2

पुराने ज़माने की बात है ।

        दो पङोसी देशों मे आपस सहयोग बढने लगा था । कहते हैं कि जब सहयोग बढता है तो परस्पर विश्वास जनम लेता है और विश्वास से प्रेम । प्रेम से मेल जोल बढता है और मेलजोल से खुशहाली आती है । लेकिन खुशहाल प्रजा भलीभांति शासित नही होती । क्योंकि खुशहाल व्यक्ति सम्पन्न होता है और समपन्न ही शक्तिशाली । फिर शक्तिशाली तो शासन ही करता है , उसे शासित नही किया जा सकता । गडरिया तो भेड़ों  के झुंड को ही चराता है , कभी शेरों के झुंड को चराते किसी को देखा गया है क्या ?…

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Posted on March 20, 2018 at 1:00pm — 6 Comments

युद्ध और साम्राज्य

एक राजा के राज्य मे जब प्रजा का असंतोष चरम पर पहुंच गया और साम्राज्य की रक्षा करना असंभव लगने लगा तो वह जंगल मे महात्मा की शरण मे जा पहुंचा ।

       "महात्मा ! विकट परिस्थिति है । उपाय बताएं ।" राजा ने हाथ जोङकर महात्मा से विनती की ।

       "उपाय तो आसान है राजन ।" महात्मा ने कहा "तेरे राज्य की कौनसी सीमा सबसे ज्यादा अशांत है ?"

       "कोई नही ! मेरे तो सभी पङोसी राजाओं से मधुर संबंध है । इससे बाहरी आक्रमण से देश सुरक्षित रहता है ।" राजा ने उत्तर दिया ।

      …

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Posted on March 20, 2018 at 1:00pm — 9 Comments

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At 6:19am on November 25, 2016, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदाब। आप से मुझे लेखन संबंधी बहुत सी बातें सीखने को मिलेंगीं। शुक्रिया सूची में शामिल करने का मौका देने के लिए।
At 10:43pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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