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Mohit mishra (mukt)
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"सादर प्रणाम सर"
Apr 1
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post मृत्यु और वर्तमान- लेख
"जनाब मोहित मिश्रा जी आदाब,अच्छा लेख लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 31
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

मृत्यु और वर्तमान- लेख

मृत्यु और वर्तमान*****************मृत्यु, जीवन की अहर्निश साधना का प्रांजल गंतव्य है और परमाकाश के उदात्त एकांत की प्राप्ति जीवात्मा के नैसर्गिक परिणति का एकमात्र सिद्ध परिणाम। शास्त्रीय सिद्धान्तों की सम्मति में, चाहे वे पुनर्जन्म के चक्र को मान्यता दें या न दें, अनेकानेक मार्ग अन्ततोगत्वा आत्मा को उस अनंत एकांत की ओर ले जाते हैं जहाँ निस्सीम शून्य के वर्तुल प्रभामंडल में जीवन-मृत्यु का चक्र लयबद्ध रूप से अनवरत चलता रहता है। अदम्य शांति का महान एकांत।हालाँकि प्रकृति का यह सिद्धांत अवश्यम्भावी…See More
Mar 31
केशव commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"वाह असाधारण रचना  बधाई स्वीकार हो मोहित जी "
May 27, 2019
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"मोहित जी,उत्तम रचना हुई"
May 27, 2019
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना

कभी गर ठान लो मन में,समर्पित हो ही जाना है।जगत कल्याण के हित में,जो अर्पित हो ही जाना है।तो बंधन मोह का चुन चुन के तुमको तोड़ना होगा..स्वजन की आँख में आँसू भी तुमको छोड़ना होगा ..सहज है स्वार्थ का जीवन, कठिन है त्याग कर जाना ।द्रवित होकर किसी के आँसुओं की धार से अविरल,कहीं ऐसा न करना लौटकर तुम फिर चले आना।तड़प कर तात ने तन को-विसर्जित कर दिया अपने।नयन में मर गए घुटकर,बिचारी माँ के भी सपने ।मगर जो लौट जाते राम तो वे राम न होते..अवध के भूप तो होते मगर भगवान न होते..लौटना मन की दुर्बलता, कर्म है…See More
May 27, 2019

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allahabad
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allahabad univercity
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student
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SIDHA SADA AUR SULJHA HUA

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At 10:14pm on November 28, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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मृत्यु और वर्तमान- लेख

मृत्यु और वर्तमान

*****************

मृत्यु, जीवन की अहर्निश साधना का प्रांजल गंतव्य है और परमाकाश के उदात्त एकांत की प्राप्ति जीवात्मा के नैसर्गिक परिणति का एकमात्र सिद्ध परिणाम। शास्त्रीय सिद्धान्तों की सम्मति में, चाहे वे पुनर्जन्म के चक्र को मान्यता दें या न दें, अनेकानेक मार्ग अन्ततोगत्वा आत्मा को उस अनंत एकांत की ओर ले जाते हैं जहाँ निस्सीम शून्य के वर्तुल प्रभामंडल में जीवन-मृत्यु का चक्र लयबद्ध रूप से अनवरत चलता रहता है। अदम्य शांति का महान…

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Posted on March 31, 2020 at 8:00am — 2 Comments

ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना

कभी गर ठान लो मन में,

समर्पित हो ही जाना है।

जगत कल्याण के हित में,

जो अर्पित हो ही जाना है।

तो बंधन मोह का चुन चुन के तुमको तोड़ना होगा..

स्वजन की आँख में आँसू भी तुमको छोड़ना होगा ..

सहज है स्वार्थ का जीवन, कठिन है त्याग कर जाना ।

द्रवित होकर किसी के आँसुओं की धार से अविरल,

कहीं ऐसा न करना लौटकर तुम फिर चले आना।

तड़प कर तात ने तन को-

विसर्जित कर दिया अपने।

नयन में मर गए घुटकर,

बिचारी माँ के भी सपने ।

मगर जो लौट…

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Posted on May 26, 2019 at 8:32am — 2 Comments

रंगों का उपहार :- मोहित मुक्त

प्रकाश के तंतुओं से निर्मित,

हमें मिला है प्रकृति द्वारा,

रंगीनियों का उपहार। 

और हम, उसी का धन्यवाद देते हैं,

होली के त्यौहार में।

रंगों का महापर्व, होली !

सिर्फ उत्सव नहीं,

अपितु यह तो है,

दुनिया की प्राचीनतम -

और महानतम सभ्यता का विचार तत्व।

जीवन और प्रकाश से परे,

जब शून्य था ब्रह्मांड,

काले अँधेरे की शक्ल में-

रंग तब भी विद्यमान थे।

और फिर विधाता…

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Posted on March 20, 2019 at 6:01pm — 2 Comments

वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा

चिर अखण्डित वेदना को कर समर्पित प्राण अपने-

ध्वंस के अवशेष पर नित नेह का दीपक जलाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर…

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Posted on February 3, 2019 at 7:23am — 5 Comments

 
 
 

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