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Rupam kumar -'मीत'
  • Male
  • Bihar
  • India
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Rupam kumar -'मीत''s Friends

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Rupam kumar -'मीत''s Groups

 

Welcome, रुपम कुमार -'मीत'!

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आ,  लक्ष्मण धामी साहिब जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपका ग़ज़ल तक आए और हौसला बढ़ाया, सादर"
Saturday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, आदाब। ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया, सादर।"
Saturday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"मोहतरम समर कबीर साहिब , आपका बहुत शुक्रिया आपना ववक़्त दिया आपने , मैं कुछ और कोशिश करता हूँ , दिल से शुक्रिया , सादर |"
Saturday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"मोहतरम समर कबीर साहिब प्रणाम, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया साहिब, "चारागर ढूँढ न पाए कोई तदबीर तभी" यूँ कह सकते हैं? या यूँ "चारागर ढूँढ न पाए कोई उपचार तभी" 'इतने खुद्दार थे कि अपने ही मालिक की…"
Saturday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया रचना भाटिया  जी, प्रणाम बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें  देख बे-वजह तो तेरी आँखों ने बारिश नहीं की दिल से मिल कर तो कहीं माज़ी ने साज़िश नहीं की इस मत्ले का ऊला मिसरा बह्र में नहीं लग रहा  यूँ कर सकती हैं…"
Saturday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय , dandpani nahak जी, प्रणाम आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया। सादर।"
Saturday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया ऋचा जी, प्रणाम आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया। सादर।"
Friday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"2122 / 1122 / 1122 / 112 धूप से ओस की बूंदों ने गुज़ारिश नहीं कीमरना मंजूर था जीने की सिफ़ारिश नहीं की [1] चारागर ढूँढ न पाए कोई ईलाज तभी"हम ने बाज़ार में ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की" [2] एक ही शहर में हम दोनों का है घर फिर भीहमने इक दूसरे से…"
Friday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"सालिक गणवीर सर ,प्रणाम तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया  ऋचा  जी नमस्कार बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई वाह ,  हर शे'र कमाल का हुआ है "
Friday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी प्रणाम  बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई।  बात  करते  हैं  वही  लोग  नतीजों  की  यहाँयार थोड़ी भी जिन्होंने कभी कोशिश नहीं की खूब शे'र हुआ है वाह !!"
Friday
Rupam kumar -'मीत' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय डिम्पल जी नमस्कार बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई वाह "
Friday
Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"आ, समर कबीर साहिब, प्रणाम आपकी ग़ज़ल पढ़ के बहुत अच्छा लगा, इस मंच पर जब से आया था आज पहली बार आपकी ग़ज़ल पढ़ी जो आपने हाल में लिखी हो,  माल पानी वाला शे'र वाह, यह 2020 का सबसे बड़ा शे'र हुआ, शे'र दर शे'र दाद पेश कर रहा हूँ साहिब,…"
Nov 12
anjali gupta and Rupam kumar -'मीत' are now friends
Nov 3
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?
"आ, नीलेश साहिब,  आप पहेलियों में ही बात करते हैं क्या साहिब?, दिल्ली अभी दूर है साहिब,।।"
Nov 1
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?
"आ, नीलेश साहिब प्रणाम बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें,  "ख़राब मिला" डबल quote में क्यों लिखा है साहिब यह, ?? सादर।"
Oct 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Motihari
Native Place
Bihar
Profession
Student
About me
मुझे तो सभी बोलते है कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है -'मीत'

Rupam kumar -'मीत''s Blog

ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)

ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा

और हँसते हुए दुनिया से गुज़र जाऊँगा [1]

जो सिला मुझ को मिला है यहाँ सच बोलने से

अब तो मैं झूट ही बोलूँगा जिधर जाऊँगा [2]

रात को ख़्वाब में आऊँगा फ़रिश्ते की तरह

और आँखों से तेरी सुब्ह उतर जाऊँगा [3]

ख़ून छन छन के निकलता है कलेजे से मेरे

रोग ऐसा है कि कुछ रोज़ में मर जाऊँगा [4]

सामना होने पे पूछेगा तू , पहचाना मुझे?

गर मैं पहचान भी…

Continue

Posted on October 15, 2020 at 5:30pm — 12 Comments

हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 1212 / 1122 / 1212 / 22 (112)

अज़ाब-ए-हिज्र में सुख-दुख के गीत गाए भी

हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी [1]

ख़ुदा ने ख़ल्क़ किया है चराग़ जैसा हमें

वही जलाए हमें फिर वही बुझाए भी [2]

अजीब साल ये गुज़रा हमारी जिंदगी में

ख़ुदा करे न दुबारा कभी फिर आए भी [3]

हमारे यार का अंदाज़-ए-इश्क़ सबसे जुदा

कभी हँसाए वो हमको कभी रुलाए भी [4]

गुलाब जैसे लबों से वो हमको चूमता है

निशान प्यार के सीने से फिर मिटाए…

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Posted on September 27, 2020 at 1:00am — 17 Comments

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ

और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]

जब आँखों को दरिया करने का मन हो

तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ [2]

दिन से रात तलक मैं तुमको रोता हूँ

तुम भी मुझको आठ-पहर रोना जानाँ [3]

अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम

वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ [4]

तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी

सीखो ख़ुद से मिलकर ख़ुश होना जानाँ [5]

आज जला दी वो…

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Posted on September 16, 2020 at 5:30am — 10 Comments

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे

घर की कमज़ोर हैं दीवार ख़ुदा ख़ैर करे [1]

कर न दें मुफ़लिसों पे वार ख़ुदा ख़ैर करे

चंद पैसों के तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे [2]

लौटने का मेरा है ख़ुद में इरादा लेकिन

"ये सफ़र है बड़ा दुश्वार ख़ुदा ख़ैर करे" [3]

नौकरी भी नहीं है हाथ में उस पर मेरा

हर समेस्टर गया बे-कार ख़ुदा ख़ैर करे [4]

मुझको हर सम्त से घेरा हुआ है दुश्मन ने

और गर्दन पे है तलवार…

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Posted on August 27, 2020 at 8:00am — 6 Comments

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At 5:49pm on July 3, 2020, Chetan Prakash said…

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