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Shiv Kumar Patel
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Profile Information

Gender
Male
City State
लखनऊ
Native Place
देवरिया
Profession
विद्यार्थी
About me
सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर | देखन में छोटन लगे घाव करे गम्भीर ||

Shiv Kumar Patel's Blog

दो मुक्तक

ख़ुश गावों की गलियों में अब मेरा मन नहीं लगता

तुम्हारे बिन यहाँ जीना कोई जीवन नहीं लगता

पहले ग़ैरों की आहट भी तो अपनी सी ही लगती थी

अब तो अपनों की आहट में भी अपनापन नहीं लगता ,-१ …

Continue

Posted on May 28, 2015 at 1:00pm — 8 Comments

दो मुक्तक

1.

ये शामें जब भी ढलती हैं, तब इक चाँद आता है

संग में और अपने वो सितारों को भी लाता है

मैं अक़्सर देखता हूँ दुनिया जब होती है नींदो में

तब वो चाँद आकर…

Continue

Posted on August 19, 2014 at 12:00pm — 6 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 4:03pm on October 30, 2013, सन्दीप सिंह सिद्धू "बशर" said…

आभार शिव कुमार जी. ख़ुश'​आमदीद​!

At 2:23pm on October 30, 2013, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय शिव जी।

At 9:22pm on October 29, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

स्वागत है मित्र !!!!!

At 7:01pm on October 29, 2013, विजय मिश्र said…
शिव कुमारजी
स्नेह और शुभकामना
साहित्य साधना और स्वाध्याय की सामग्री है और लेखन निरंतर अभ्यास की . आपने सही समय से उपयुक्त और सर्वाधिक निष्पक्ष साहित्यिक मंच का वरण किया है , ज्ञानियों का बहुत विशाल ध्रुवीकरण है यहाँ .इनके द्वारा इंगित दोषों का निवारण करते बढ़ेंगे तो साहित्य की कोई बिधा नहीं है जिसमें यह मंच माँजने में सक्षम न हो . परिणाम आपकी सचेष्टता के अनुपातिक होगा .एकबार पुनः स्नेह .
At 12:53pm on October 29, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" स्वागत है आपका आदरणीय शिवकुमार पटेल जी.."

 
 
 

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