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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
 

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babitagupta commented on SudhenduOjha's blog post कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी
"उम्दा रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on SudhenduOjha's blog post कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी
"आदरणीय सुधेंदु ओझा जी आदाब,                      ज़िंदगी को केंद्र में रखकर रची गई बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब, अच्छी कविता हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post तुम जो होते तो हम भी संभल गए होते। ये हालात हैं, कुछ तो बदल गए होते॥
"जनाब सुधेन्दु ओझा साहिब आदाब,बह्र,शिल्प,व्याकरण की दृष्टि से ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,इस प्रयास पर बधाई आपको ।"
Jul 22
Sheikh Shahzad Usmani commented on SudhenduOjha's blog post तुम जो होते तो हम भी संभल गए होते। ये हालात हैं, कुछ तो बदल गए होते॥
"अनुभवों और अपेक्षाओं को पिरोती बढ़िया रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सुधेन्दु ओझा जी।"
Jul 21
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 11
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह बूँद-बूँद में व्यथा समेटे दहके कोई देह क़ा० अपने सरसी छंद से प्रारम्भ किया , पर आगे 16, 11 का निर्वाह बिखर गया . बहुत अच्छी भावपूर्ण कविता कटघरे में आ गयी . आगे ध्यान रखें . सादर ."
Jul 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह बूँद-बूँद में व्यथा समेटे दहके कोई देह क़ा० अपने सरसी छंद से प्रारम्भ किया , पर आगे 16, 11 का निर्वाह बिखर गया . बहुत अच्छी भावपूर्ण कविता कटघरे में आ गयी . आगे ध्यान रखें . सादर ."
Jul 10
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"जनाब सुधेन्दु ओझा साहिब आदाब,बहुत अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 8
Mohammed Arif commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"आदरणीय सुधेंदु ओझा जी आदाब,                        बहुत ही बेहतरीन सामयिक बारिश का गीत । पूरा मन तरबतर हो गया । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 8
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"आद0 सुधेन्दु ओझा जी सादर अभिवादन। बढिया गीत लिखा है आपने। पढ़कर अच्छा लगा। इस प्रस्तुति पर मेरी बधाई आपको।सादर"
Jul 8
Shyam Narain Verma commented on SudhenduOjha's blog post चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह
"सुंदर गीत के लिए कोटिशः बधाई ..."
Jul 7
SudhenduOjha posted a blog post

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह चन्दन सा महका कर मन कोबरसे काले मेहबूँद-बूँद में व्यथा समेटेदहके कोई देह हर आहट के धोखे नेमुझको तहस-नहस कर डालासूनी वेदी पर खड़ी रही मैंलिए हाथ में वर की मालाआएगा कि नहीं? हृदय मेंउठते सौ संदेह चन्दन सा महका कर मन कोबरसे काले मेहबूँद-बूँद में व्यथा समेटेदहके कोई देह प्यास प्रेम की वो पहचानेजो रोम-रोम से प्यासा होनट-नागर से कहीं अधिकजो, राधा सा दीवाना होरक्त-शिरा में जिसकेबहता निर्मल स्नेह चन्दन सा महका कर मन कोबरसे काले मेहबूँद-बूँद में व्यथा समेटेदहके कोई…See More
Jul 7
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।
"आदरणीय पढ़ने में रचना बड़ी सरस लगी...बाकी आदरणीय समर कबीर जी आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ने रोशनी डाली ही है...सादर"
Jul 5

Profile Information

Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Pratapgarh (UP)
Profession
Service

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कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी

कैसे-कैसे सवालों का जवाब है जिंदगी

कांटों के साथ-साथ गुलाब है जिंदगी

तुम समझ सके न जिसे हम समझ सके

ऐसे मसाएलों का अजाब (दुख/संत्रास) है जिंदगी

शज़र (वृक्ष) की ओट में चांद ठहर गया है

चांदनी कह रही है, माहताब है जिंदगी

मेरे औ चांद के जो दरम्यान था

शज़र का हल्का सा नक़ाब है जिंदगी

तेरी मुस्कुराहटों, रुसवाईयों से अलग

भूख और गुरबतों का असबाब है जिंदगी

तू रहे कहीं, मुझ से जुदा रह नहीं…

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Posted on August 13, 2018 at 10:30am — 3 Comments

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह

चन्दन सा महका कर मन को बरसे काले मेह

 

चन्दन सा महका कर मन को

बरसे काले मेह

बूँद-बूँद में व्यथा समेटे

दहके कोई देह

 

हर आहट के धोखे ने

मुझको तहस-नहस कर डाला

सूनी वेदी पर खड़ी रही मैं

लिए हाथ में वर की माला

आएगा कि नहीं? हृदय में

उठते सौ संदेह

 

चन्दन सा महका कर मन को

बरसे काले मेह

बूँद-बूँद में व्यथा समेटे

दहके कोई देह

 

प्यास प्रेम की वो पहचाने

जो…

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Posted on July 7, 2018 at 3:08pm

मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।

मुझे भी तुमसे मुहब्बत की आस है प्यारे।

कदम-कदम पे सलीबों की प्यास है प्यारे॥

ख़यालो-ख्वाब, तसव्वुर भी जुर्म होते हैं।

चले भी आओ हर नज़ारा उदास है प्यारे॥

मुझे भी पढ़ के किताबों में दफ्न कर देना।

वाकिफ हैं तुम्हारी आदत खास है…

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Posted on July 2, 2018 at 1:00pm

क्या है कविता?

क्या है कविता?

 

भाव-प्रवण शब्दों का

मोहक जाल

डम-डम, डिम-डिम

ध्वनियों का कमाल

प्रकृति में गुंजायमान,

अनहत नाद?

स्यात, प्रणय का…

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Posted on June 25, 2018 at 5:14pm

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At 6:00pm on June 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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