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SudhenduOjha
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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
 

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SudhenduOjha posted blog posts
6 hours ago
Rakshita Singh commented on SudhenduOjha's blog post जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।
"आदरणीय सुधेन्दु जी नमस्कार, "जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।मेरे मौला तू मुझे बस अपनी अक़ीदत देदे॥" बहुत ही सुन्दर भाव है गजल का...मुबारकबाद कुबूल करें ।"
21 hours ago
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब, ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,,कई मिसरे बह्र में नहीं हैं,ओबीओ पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें, इस प्रस्तुति पर बधाई आपको ।"
yesterday
SudhenduOjha posted a blog post

जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।

जिसकी चाहत हैउसे हूर औ जन्नत देदे। मेरे मौला मुझे बस अपनी अक़ीदत देदे॥उतार फेंकें पैरहने -शहंशाही दिल से। हो सके तो हमें, तू ऐसी तबीयत देदे॥ रुक, मेरे किस्से मेंतू क्योंकर नहीं शामिल। तेरे किस्से में रहूँ मैं, ऐसी नीयत देदे॥ रात मेरी वस्ल की हो,और साथ तेरा हो। मेरे मौला इस रात को क़यामत देदे॥ वो मजबूरन जो सजदे पेईमान लेके आता है। ऐसे मुसलमानों को भी अपनी नसीहत देदे॥ मौलिक तथा अप्रकाशित....सुधेन्दु ओझाSee More
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post है अगर कोई मुसीबत,
"अच्छी रचना है आदरणीय...विद्या भी लिख देते तो ज्यादा बेहतर होता है.."
Thursday
बसंत कुमार शर्मा commented on SudhenduOjha's blog post है अगर कोई मुसीबत,
"बहुत खूब "
Jun 11
SudhenduOjha posted a blog post

है अगर कोई मुसीबत,

है अगर कोई मुसीबत,हम तुम्हारे साथ हैं।है अगर कोई फजीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥ गूँजती हैं तूतियाँ,नक़्क़ारखानों में मगर।शहनाईओं की हो ज़रूरत, हम तुम्हारे साथ हैं॥पाँव में छाले लिए वहदूर से आया बहुत।उठ उसे देदो नसीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥ आँधी औ तूफान से वहरुक न पाएगा कभी।संघर्ष ने की थी वसीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥ लौट कर आई लपट,फिर जलाने को उसे।है मौसमों की साफ नीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥ रख नक़ब तुमने लूटाहै शहर सारा तमाम।आँसू बहाने की हो तबीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥ अब गरीबों को यहाँ पर,मौत दस्त-ए-आब…See More
Jun 10

Profile Information

Gender
Male
City State
New Delhi
Native Place
Pratapgarh (UP)
Profession
Service

SudhenduOjha's Blog

जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।

जाहिल हैं कुछ लोग,

तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।

अहले दीन की सुनो, तुम्हें ज़ाकिर लिखते हैं॥

 

वो जो इल्म के जानिब,

शमशीर ले कर निकला।

बाक़ी हैं कुछ लोग, उसे माहिर लिखते हैं॥

 

तड़पती प्यास लेकर आए

थे तुम जो सहरा से।

प्यार…

Continue

Posted on June 19, 2018 at 6:42pm

जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।

जिसकी चाहत है

उसे हूर औ जन्नत देदे।

मेरे मौला मुझे बस अपनी अक़ीदत देदे॥

उतार फेंकें पैरहने -

शहंशाही दिल से।

हो सके तो हमें, तू ऐसी तबीयत देदे॥

 

रुक, मेरे किस्से में

तू क्योंकर नहीं शामिल।

तेरे किस्से में रहूँ मैं, ऐसी नीयत देदे॥

 

रात मेरी वस्ल की हो,

और साथ तेरा हो।

मेरे मौला इस रात को क़यामत देदे॥

 

वो मजबूरन जो सजदे पे

ईमान लेके आता है।

ऐसे मुसलमानों को भी अपनी नसीहत…

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Posted on June 18, 2018 at 6:30am — 2 Comments

है अगर कोई मुसीबत,

है अगर कोई मुसीबत,

हम तुम्हारे साथ हैं।

है अगर कोई फजीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

गूँजती हैं तूतियाँ,

नक़्क़ारखानों में मगर।

शहनाईओं की हो ज़रूरत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

पाँव में छाले लिए वह

दूर से आया बहुत।

उठ उसे देदो नसीहत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

आँधी औ तूफान से वह

रुक न पाएगा कभी।

संघर्ष ने की थी वसीयत, हम तुम्हारे साथ हैं॥

 

लौट कर आई…

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Posted on June 9, 2018 at 9:00pm — 2 Comments

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे, कई बहाने मिल जाएँगे

यूँ ही.............. 

 

मुझको यदि पढ़ना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

मुझसे यदि बचना चाहोगे

कई बहाने मिल जाएँगे

 

हम दुनियावी मसलों को-

छोड़, यहाँ तक आ पहुंचे हैं

तुम, अपनी फिकरों को छोड़ो

कई बहाने मिल जाएँगे

 

खूब दिखाए बाग-तितलियाँ

औ खूब सुनाई गज़लें भी

कैसे डूब गई मैं तुझमें 

कई बहाने मिल जाएँगे

 

कौन कह रहा तनहा हैं हम

हम से दूर हुए कब तुम थे?

मजबूरी टूटे बस…

Continue

Posted on July 20, 2017 at 11:43am

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At 6:00pm on June 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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