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Sunil Verma
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श्याम किशोर सिंह 'करीब' commented on Sunil Verma's blog post ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा
"सुंदर एवं प्रेरक प्रस्तुति ! बहुत बधाई।"
Aug 8
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"कथा का संदेश बहुत अच्छा है| शैली तो हमेशा की तरह प्रभावी होती है इस बार कथानक भी बहुत प्रभावी है| खास बात यह है कि आपकी यह कथा किसी बोधकथा की हमशक्ल होते हुए भी उसके जैसी नही है|यह एक सार्थक प्रतिनिधित्व करती है, हाँलाकि अंतिम संवाद कुछ बोझिल सा हो…"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"हिम्मत जगाती लाजवाब लघुकथा| बधाई आदरणीया"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"हमारे इधर घड़ा रखनेकेलिए बनाये गये एक रस्सी या लोहे के गोलाकार रिंग को 'घड़ोची' कहते हैं जिसके सहारे लुढ़कने वाले घड़े को स्थिर रखा जाता है| शीर्षक पढ़कर लगा की वैसा ही कुछ कथा में होगा कि किसी अस्थिर पात्र को कटाक्ष के द्वारा स्थिरता…"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"मैनें कथा को पहली बार पढ़ा तब झबरा मेरे दिमाग में एक कुत्ता था| कथा के अंत में उसकी वफादारी के बीच अपने गम को भूल जाना और उस मूक प्राणी के साथ मजाने में एक गजब के सुख अनुभूति हुई| फिर जहन में आया कि मुनिया की स्कूल की फीस और मलकिन की दिली इच्छा के…"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"आदरणीय कल्पना जी, बहुत प्रभावित किया आपकी लघुकथा ने इस बार|कथा के अंत में पात्र का संवाद पूरी कथा का निचोड़ है| कथा की एक मुख्य बात जो मुझे बहुत अच्छी लगी कि वह बेरोजगार उस बालक से 'रोजगार समाचार' खरीदता था| हाँ एक जगह देखियेगा कि 9-10 बरस…"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"अंजना जी आपकी लघुकथा तो बहुत अच्छी है, परंतु उतनी विषयपरक नही हो पायी| आखिर में गानें के बोल कथा में जबरन प्रवेश की भाँति लग रहे हैं| बहरहाल लेखन शैली बढ़िया है जो प्रभावित करती है"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"सच कहूँ... मुझे पहली पंक्ति के बाद का पूरा पैरा अनावश्यक सा लगा| वह कुछ कुछ भूमिकामय सा हो गया| 'ग्यारह बजने को आये है...' कथा को अगर पहली पंक्ति के बाद यहाँ से भी पढ़ा जाये तो कथा का पूरा प्रभाव ज्यूँ ता त्यूँ रहता है| कथा अपने संवादों और…"
Jul 31
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"शीर्षक में नयापन है, बचपन में गाया जाने वाला यह बाल गीत कथा से गजब का सम्बन्ध स्थापित कर रहा है। कथा की पंक्ति /जैसे आत्ममुग्ध रंग- बिरंगी मछलियों को गहरे पानी की सुरक्षा से घसीट कर मनोरंजन के निमित्त छोटे से काँच के ज़ार में छोड़ दिया जाय, जीवन भर…"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"फिर तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ...मुझे टिप्पणी से बचना चाहिए था|"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"यह शायद आपका आयोजन के प्रति मोह है, परंतु एक गंभीर मंच पर इतना उतावलापन सही नही है| जिस कथा को आपने 'सत्य' को आधार बनाकर उसी विषय के अंतर्गत लिखकर कुछ देर पहले पोस्ट किया था, उसे मात्र 'सत्य' हटाकर 'सुख' लिख दिया और…"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"कथा देखने मे जितनी लंबी लग रही थी पढ़ते वक्त उसका अहसास नही हुआ| संवाद चुस्त दुरूस्त हैं, मगर परिस्थितियों के चित्रण में कसावट की गुंजाइश है| मध्य तक आते आते यह पूर्वाभास हो जाता है कि अंत में क्या होगा, मगर प्रस्तुतीकरण इतना अच्छा है कि अंत तक यह…"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"/माँ की पहली बरसी र घर आने के लिए कह रहे थे पापा/ इस पंक्ति द्वारा स्पष्टीकरण देने की कोई आवश्यकता न थी| कथा का पहला संवाद ही सब कुछ क्लीयर कर दे रहा है| /मगर इन ब्राम्हणों का पेट मानो अंधा कुंआ था । बात - बात पर रिवाज और धर्म का वास्ता दे रहे…"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"अनैतिक संबंधों में सुख तलाशते लोगों पर अच्छी कथा लिखी है| कथा की चौथी और वाँचवी पंक्ति देखिये| चौथी पंक्ति मोहित का संवाद है तो पाँचवी पंक्ति का पहला वाक्य भ्रम पैदा कर रहा है कि वह रमन का है या मोहित का ! हाँलाकि ठहरकर पढ़ने पर यह समझ आ जाता है,…"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"शायद अपनों का सुख इसे ही कहते हैं| कथा में मुख्य पात्र को अपनों का कौनसा सुख मिल रहा है? बेटा बेटी विदेश बस गये, भतीजा बगावत कर रहा है..वह तो बस संकोचवश कुछ कह नही पा रहे, यह एक अपनेपन के भाव के अधीन हो रहा है पर इसमें सुख नही मिल रहा| अंतिम पंक्ति…"
Jul 30
Sunil Verma replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"सार्थक सुझाव"
Jul 30

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भरोसा (लघुकथा) -सुनील वर्मा

टूटी सड़क| भारी यातायात| साफ सुथरे कपड़े पहने हुए एक युवक बार बार अपने गले में बँधी टाई सही कर रहा था| तभी सामने ने ऑटो आता देख उसने हाथ देकर उसे रोका|

ऑटो में बैठते ही युवक ने चालक को अपने गंतव्य स्थान के बारे में बताया और ज़ेब से फोन निकालकर किसी से बातें करनी शुरू कर दी| देश में बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और धार्मिक अराजकता पर बातें करता हुआ वह सरकार को कोस ही रहा था कि ऑटो चालक ने अब तक लगभग दो सौ मीटर की दूरी तय करने के बाद आगे बने एक पेट्रोल पंप पर अपना ऑटो रोका|

"साहब पेट्रोल… Continue

Posted on July 19, 2017 at 9:20am — 5 Comments

कमज़ोर आदमी (लघुकथा) -सुनील वर्मा

बेहद कमजोरी के बावजूद सुगणा ने कंधो के सहारे जोर लगाकर नीचे सरक आये अपने सिर को तकिये पर टिकाया| अधखुली आँखों से खुद को देखा| रक्तस्राव की अधिकता के कारण हर बार वह पहले से ज्यादा अशक्त होती जा रही थी| तीन बार की ज़चगी के बाद अब उसमें और हिम्मत नही बची थी| बात करने पर उसके पति ने उसकी बात मान भी ली थी, मगर शर्त थी की आवश्यक ऑपरेशन वह ही करवायेगी| आज उसी ऑपरेशन के बाद वह बिस्तर पर पड़ी थी| शरीर पहले से ही सुन्न था, अब दिमाग भी सुन्न हो चुका था|

गहरी फूँक छोड़ते हुए उसने…

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Posted on July 15, 2017 at 8:00am — 6 Comments

ऑक्सीजन (लघुकथा ) -सुनील वर्मा

रविवार का दिन था| अखबार पढ़ने के बाद कमलेश जी बरामदे में बैठे रेडियो पर गानें सुन रहे थे| एकाएक उनके कानों में इकतारे की धुन के साथ साथ लोक संगीत के बोल घुल गये|

आँखे खोलकर उन्होने आवाज की दिशा में देखा| दरवाजे पर खड़ा एक बूढ़ा याचक कुछ गाते हुए इकतारा बजा रहा था| वह दरवाजे तक गये और उसे वहीं बाहर बने चबूतरे पर बैठने के लिए कहा|

"बहुत अच्छा गाते हो| कहाँ से हो?" उसके बैठते ही उन्होनें सवाल किया|

"बहुत दूर से…

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Posted on July 11, 2017 at 11:43am — 11 Comments

तज़ुर्बा (लघुकथा) -सुनील

दोपहर जरा ढ़ली तो छोटी बहू ने चाय बनाई | आँगन में बैठी अपनी सास और दो जेठानियों को उनके गिलास पकड़ाये और कुछ दूरी बनाते हुए खुद भी अपना गिलास लेकर वहीं फर्श पर बैठ गयी|

ठीक आँगन के बीच में पिड्डे पर बैठी अम्मा को एक टेर सामने वाले घर की तरफ देखकर उस संयुक्त परिवार की बड़ी बहू ने पूछा "उधर क्या देख रही हो अम्मा?"

"देख री हूँ के सामणे के घर म जो नये किरायेदार आये हैं, उणमें प्रेम तो ना है|" गिलास से अपनी कटोरी में चाय उंडेलती हुई अम्मा बोली|

"ल्यो बोलो, न कोई रामा श्यामा होई..अरर न… Continue

Posted on June 3, 2017 at 9:09pm — 1 Comment

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At 8:06pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुनील वर्मा जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "तृप्ति" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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