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Surkhab Bashar
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Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जी वो ग़लती से पोस्ट हो गई थी   अब मुझे डिलीट करने का ऑप्शन नही मिल रहा है"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जनाब शिज्जू शकूर साहब  बहुत उम्दा ग़ज़ल  की तख़लीक़ हुई है  हर शेर क़ाबिले दाद है"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"मोहतरम  समर कबीर साहिब  आपने ख़ाकसार की ग़ज़ल पे दाद दे कर  मेरे होसला अफ़जाई फरमाई  आपका बहुत शुक्रिया "
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जनाब अजय गुप्ता जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"[12/23, 11:14 AM] Samar Kabeer S.: मुलाक़ात करें ।[12/24, 7:35 PM] surkhabbashar232: इक मकाँ पक्की सड़क पर क्या हमारा बन गया दोस्तो, दुशमन उसी दिन से ज़माना बन गया मैं तो पीतल था मेरी क़ीमत यहाँ कुछ भी न थी आपने अपना लिया तो मैं भी सोना बन गया कैमरे…"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
" इक मकाँ पक्की सड़क पर क्या हमारा बन गया दोस्तो, दुशमन उसी दिन से ज़माना बन गया मैं तो पीतल था मेरी क़ीमत यहाँ कुछ भी न थी आपने अपना लिया तो मैं भी सोना बन गया कैमरे में कै़द करते जा रहे थे यार सब उनकी नज़रों में मिरा मरना तमाशा बन…"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
" आ.  लक्ष्मी धामी जी बहुत उम्दा ग़ज़ल पढने को मिली  बधई स्वीकार करें"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जनाब मिर्ज़ा जावेद बेग साह उम्दा ग़ज़ल के लिये  मुबारक बाद "
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जनाब मोहम्मद आरीफ़ साहब  तरही मिस्रे पर बहुत उम्दा ग़ज़ल  कही है मुबारक बाद आप को "
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"मोहतरम समर कबीर साहिब  उम्दा ग़ज़ल के लिये शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल करें मक़ते का तो जवाब ही नही"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"मोहतरम समर कबीर साहब तरही मिसरे पर बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने मक़ते का तो जवाब नही  शेर दर शेर मुबारक बाद  कुबूल करें"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आ. महेंद्र जी उम्दा ग़ज़ल के लिये मुबारक बाद  क़बूल करें"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जनाब अशफाक़ अली साहब आदाब  ग़ज़ल का प्रयास बहुत उम्दा है    मगर आपने नून अलीफ़ के पाबंद, क़वाफिये  इस्तेमाल  कर गये"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"ग़ज़ल   इक मकाँ पक्की सड़क पर क्या हमारा बन गया दोस्तो, दुशमन उसी दिन से ज़माना बन गया मैं तो पीतल था मेरी क़ीमत यहाँ कुछ भी न थी आपने अपना लिया तो मैं भी सोना बन गया कैमरे में कै़द करते जा रहे थे यार सब उनकी नज़रों में मिरा…"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"[12/23, 11:14 AM] Samar Kabeer S.: मुलाक़ात करें ।[12/24, 7:35 PM] surkhabbashar232: इक मकाँ पक्की सड़क पर क्या हमारा बन गया दोस्तो, दुशमन उसी दिन से ज़माना बन गया मैं तो पीतल था मेरी क़ीमत यहाँ कुछ भी न थी आपने अपना लिया तो मैं भी सोना बन गया कैमरे…"
Dec 28, 2018
Surkhab Bashar commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ग़ज़ल: यूँ इश्क़ चुभ गया है विष-ख़ार की तरह
"आ. पंकज कुमार मिश्रा  जी ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है लेकिन आपकी ग़ज़ल के तीसरे शेर का ऊला मिस् रा  प्रसिद्ध  हिंदी फिल्म ़का है मतलब निकल गया है तो पहचानते नही ........."
Dec 25, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
Poet

Surkhab Bashar's Blog

ग़ज़ल: फिर ज़िंदगी से अपनी पहचान हो न जाए

फिर ज़िंदगी से अपनी पहचान हो न जाए

साँसों का आना जाना आसान हो न जाए



अपनी शनावरी पे इतरा न ऐ शनावर

शोहरत का ये समुंदर दालान हो न जाए



इस बार भी मैं दफ़्तर ताख़ीर से गया तो

डर है कि नौकरी का नुक़सान हो न जाए



मज़लूम पे सितम के तुम ती मत चलाओ

अशकों से रेज़ा रेज़ा चट्टान हो न जाए



अपना समझ के जिस की देहलीज़ चढ़ रहा हूँ

यारों कहीं वो हम से अंजान हो न जाए



"सुरख़ाब"उड़ न जाएें यादों के ये कबूतर

दिल का…

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Posted on December 12, 2018 at 11:00am — 1 Comment

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At 11:47am on December 25, 2018, Samar kabeer said…

बहुत बहुत शुक्रिया,सुरख़ाब बशर साहिब ।

At 6:45am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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