For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Vivek Raj
Share
 

Vivek Raj's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"आ. विवेक जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 26
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय चूक पर ध्यान दिलाने के लिए आप का आभारी हूँ।निवेदन के साथ आशा है गलतियां ठीक करने में मदद करेंगे"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय आप का आभारी हूँ बहुत बहुत शुक्रिया"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय आप का बहुत बहुत शुक्रिया"
Nov 23
राज़ नवादवी commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"जहाँ का दर्द समाया सभी की आह में है।तमाम शहर का मंज़र मेरी निगाह में है।। वाह वाह बहुत खूब जनाब विवेक राज जी, ख़ूबसूरत मतला. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए बधाई. सादर. "
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"( ग़ज़ल ) भूल कर भी न ऐसे काम करें।नींद जो आप की हराम करें।। कडुवे सच का भी एहतिराम करें। काम ही झूठ का तमाम करें।। शह सवारी तो बे लगाम सही।बात हर वक्त बा लगाम करें।। घर के भेदी से हिफ़ाज़त कैसे।दोस्त दीवार दर-ओ-बाम करें।। तुरबतों में जो सो रहे उनकी।आप…"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब जीत साहब अच्छी ग़ज़ल कही है मुबारकबाद कूबूल फरमाएं"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब बेग साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"वाह वाह सुरख़ाबसाहब अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब आरिफ साहब शेर दर शेर पर मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब नादिर खान साहब रिज़्क लिक्खा तो है मुक़द्दर में बढ़िया शेर, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब राज़ नदवी जी अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23
Vivek Raj commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"आदरणीय उत्साह वर्धन हेतु आपका आभारी रहूँगा।"
Nov 23
TEJ VEER SINGH commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"हार्दिक बधाई आदरणीय विवेक राज जी। बेहतरीन गज़ल। बचा रहा है बशर ख़ुद को हक़ बयानी से ।के ख़ौफ़ इतना है जैसे वो क़त्ल गाह में है।।"
Nov 23
Samar kabeer commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"जनाब विवेक "राज़" साहिब आदाब, मजरूह की ज़मीन में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ' नहीं है कुछ भी ख़बर रोज़-ए-हस्र क्या होगा' इस मिसरे में 'हस्र' को "हश्र" कर लें । ' जो कर रहीं हैं…"
Nov 22
Vivek Raj posted a blog post

जहाँ का दर्द समाया.....

( ग़ज़ल )जहाँ का दर्द समाया सभी की आह में है।तमाम शहर का मंज़र मेरी निगाह में है।।जिसे भी कमियों से उसकी किया ज़रा आगाह।बड़ा सा दाग़ दिखाता वो शख़्स माह में है।।तमाम ख़ार में इक आध गुल कहीं दिखता।बहार गर्दिश-ए-सहरा की ज्यूँ पनाह में है ।बचा रहा है बशर ख़ुद को हक़ बयानी से ।के ख़ौफ़ इतना है जैसे वो क़त्ल गाह में है।।नहीं है कुछ भी ख़बर रोज़-ए-हस्र क्या होगा।फँसा हर एक बशर शौक से गुनाह में है।।जो कर रहीं हैं सभी साँस की लहरों पे सफ़र।हर एक कश्ती वो तूफ़ान की निगाह में है।।तलाशग़ीर है तू साहिल-ए-समंदर पर।जो एक…See More
Nov 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Khairabad
Native Place
purani bazar

Vivek Raj's Blog

जहाँ का दर्द समाया.....

( ग़ज़ल )

जहाँ का दर्द समाया सभी की आह में है।

तमाम शहर का मंज़र मेरी निगाह में है।।

जिसे भी कमियों से उसकी किया ज़रा आगाह।

बड़ा सा दाग़ दिखाता वो शख़्स माह में है।।

तमाम ख़ार में इक आध गुल कहीं दिखता।

बहार गर्दिश-ए-सहरा की ज्यूँ पनाह में है ।

बचा रहा है बशर ख़ुद को हक़ बयानी से ।

के ख़ौफ़ इतना है जैसे वो क़त्ल गाह में है।।

नहीं है कुछ भी ख़बर रोज़-ए-हस्र क्या होगा।

फँसा हर एक बशर शौक से गुनाह में है।।

जो कर रहीं हैं सभी साँस की लहरों पे…

Continue

Posted on November 21, 2018 at 5:55pm — 6 Comments

कौन है देख लें रो रहा कौन है

कौन है देख लें रो रहा कौन है

कौन है उस पे हँसता हुआ कौन है

कौन है लूट कर बन गया ज़िन्दगी

ज़िन्दगी ऐ तुझे भा गया कौन है

कौन है जिसका इक बार टूटे न दिल

दिल मुकम्मल जहाँ में बचा कौन है

कौन है ढूंढ़ता इक बशर बेखता

बेखता आज कल दिख रहा कौन है

कौन है आशना जो मिटा डाले ग़म

ग़म से रब के सिवा आशना कौन है

कौन है देखलूँ हू ब हू फूल सा

"फूल सा मुस्कुराता हुआ कौन है"

कौन है जान लें 'राज़' का…

Continue

Posted on March 4, 2016 at 8:30pm — 5 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी, सबसे पहले तो अच्छी ग़ज़ल और अलग अंदाज़ अशार के लिए बधाई. अब आपकी ग़ज़ल पर आते है. ///वेदना…"
2 hours ago
Muzammil shah is now a member of Open Books Online
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर जी, बेहतरीन कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय राज नवादवी जी।"
4 hours ago
PHOOL SINGH posted a blog post

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जबतुमसे ही आश बाँधी हैमैं नहीं तो तुम सहीसमर्थ जीवन की ठानी है|| मजबूर नहीं…See More
4 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।"
5 hours ago
PHOOL SINGH updated their profile
5 hours ago
surender insan commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"मोहतरम समर साहब आदाब।वाह जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल जी। मतले से मकते तक हर शेर लाजवाब।बहुत बहुत दिली…"
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

रंगहीन ख़ुतूत ...

रंगहीन ख़ुतूत ...तन्हाई रात की दहलीज़ पर देर तक रुकी रही चाँद दस्तक देता रहा मन उलझा रहा किसका दामन…See More
7 hours ago
राज़ नवादवी commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी, आदाब, सुंदर गजल हुयी है, हार्दिक बधाई. सादर. "
8 hours ago
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी. सुन्दर गज़ल. सादर. "
8 hours ago
राज़ नवादवी commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"आदरणीय तेज वीर सिंह साहब, बड़े घटनाक्रम वाली एक लघु कथा. बाल एवं अपराध मनोविज्ञान को सफलता पूर्वक…"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service