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Vivek Raj
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"आ. विवेक जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 26, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय चूक पर ध्यान दिलाने के लिए आप का आभारी हूँ।निवेदन के साथ आशा है गलतियां ठीक करने में मदद करेंगे"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय आप का आभारी हूँ बहुत बहुत शुक्रिया"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आदरणीय आप का बहुत बहुत शुक्रिया"
Nov 23, 2018
राज़ नवादवी commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"जहाँ का दर्द समाया सभी की आह में है।तमाम शहर का मंज़र मेरी निगाह में है।। वाह वाह बहुत खूब जनाब विवेक राज जी, ख़ूबसूरत मतला. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए बधाई. सादर. "
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"( ग़ज़ल ) भूल कर भी न ऐसे काम करें।नींद जो आप की हराम करें।। कडुवे सच का भी एहतिराम करें। काम ही झूठ का तमाम करें।। शह सवारी तो बे लगाम सही।बात हर वक्त बा लगाम करें।। घर के भेदी से हिफ़ाज़त कैसे।दोस्त दीवार दर-ओ-बाम करें।। तुरबतों में जो सो रहे उनकी।आप…"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब जीत साहब अच्छी ग़ज़ल कही है मुबारकबाद कूबूल फरमाएं"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब बेग साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"वाह वाह सुरख़ाबसाहब अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब आरिफ साहब शेर दर शेर पर मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब नादिर खान साहब रिज़्क लिक्खा तो है मुक़द्दर में बढ़िया शेर, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23, 2018
Vivek Raj replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"जनाब राज़ नदवी जी अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद कुबूल फरमाएं"
Nov 23, 2018
Vivek Raj commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"आदरणीय उत्साह वर्धन हेतु आपका आभारी रहूँगा।"
Nov 23, 2018
TEJ VEER SINGH commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"हार्दिक बधाई आदरणीय विवेक राज जी। बेहतरीन गज़ल। बचा रहा है बशर ख़ुद को हक़ बयानी से ।के ख़ौफ़ इतना है जैसे वो क़त्ल गाह में है।।"
Nov 23, 2018
Samar kabeer commented on Vivek Raj's blog post जहाँ का दर्द समाया.....
"जनाब विवेक "राज़" साहिब आदाब, मजरूह की ज़मीन में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ' नहीं है कुछ भी ख़बर रोज़-ए-हस्र क्या होगा' इस मिसरे में 'हस्र' को "हश्र" कर लें । ' जो कर रहीं हैं…"
Nov 22, 2018
Vivek Raj posted a blog post

जहाँ का दर्द समाया.....

( ग़ज़ल )जहाँ का दर्द समाया सभी की आह में है।तमाम शहर का मंज़र मेरी निगाह में है।।जिसे भी कमियों से उसकी किया ज़रा आगाह।बड़ा सा दाग़ दिखाता वो शख़्स माह में है।।तमाम ख़ार में इक आध गुल कहीं दिखता।बहार गर्दिश-ए-सहरा की ज्यूँ पनाह में है ।बचा रहा है बशर ख़ुद को हक़ बयानी से ।के ख़ौफ़ इतना है जैसे वो क़त्ल गाह में है।।नहीं है कुछ भी ख़बर रोज़-ए-हस्र क्या होगा।फँसा हर एक बशर शौक से गुनाह में है।।जो कर रहीं हैं सभी साँस की लहरों पे सफ़र।हर एक कश्ती वो तूफ़ान की निगाह में है।।तलाशग़ीर है तू साहिल-ए-समंदर पर।जो एक…See More
Nov 22, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Khairabad
Native Place
purani bazar

Vivek Raj's Blog

जहाँ का दर्द समाया.....

( ग़ज़ल )

जहाँ का दर्द समाया सभी की आह में है।

तमाम शहर का मंज़र मेरी निगाह में है।।

जिसे भी कमियों से उसकी किया ज़रा आगाह।

बड़ा सा दाग़ दिखाता वो शख़्स माह में है।।

तमाम ख़ार में इक आध गुल कहीं दिखता।

बहार गर्दिश-ए-सहरा की ज्यूँ पनाह में है ।

बचा रहा है बशर ख़ुद को हक़ बयानी से ।

के ख़ौफ़ इतना है जैसे वो क़त्ल गाह में है।।

नहीं है कुछ भी ख़बर रोज़-ए-हस्र क्या होगा।

फँसा हर एक बशर शौक से गुनाह में है।।

जो कर रहीं हैं सभी साँस की लहरों पे…

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Posted on November 21, 2018 at 5:55pm — 6 Comments

कौन है देख लें रो रहा कौन है

कौन है देख लें रो रहा कौन है

कौन है उस पे हँसता हुआ कौन है

कौन है लूट कर बन गया ज़िन्दगी

ज़िन्दगी ऐ तुझे भा गया कौन है

कौन है जिसका इक बार टूटे न दिल

दिल मुकम्मल जहाँ में बचा कौन है

कौन है ढूंढ़ता इक बशर बेखता

बेखता आज कल दिख रहा कौन है

कौन है आशना जो मिटा डाले ग़म

ग़म से रब के सिवा आशना कौन है

कौन है देखलूँ हू ब हू फूल सा

"फूल सा मुस्कुराता हुआ कौन है"

कौन है जान लें 'राज़' का…

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Posted on March 4, 2016 at 8:30pm — 5 Comments

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