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amod shrivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
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amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

बहुत पछतायेगा वो मेरा पता पा कर - ग़ज़ल

बह्र - 1222-122-2212-22कोई यूँ खुश हुआ हो अपना खुदा पाकर।।बहुत पछताएंगे वो मेरा पता पाकर।।सफर चलना है कैसे ,लेकर चलन कैसा।उन्हें अहसास होगा ,आबोहवा पाकर।।वो अपनी ज़द में ही अपना आशियाँ चुन लें ।कहाँ होता है आदम से बा वफ़ा पाकर।।मुझे अब मुल्क़ से ये मजहब ही निकालेगा ।बहुत खुश है मुझे यह जलता हुआ पा कर ।।मैं अपनी आरजू अब अपना कहूँ कैसे ।ये तो खुश है मेरे बच्चों से दगा पा कर ।।आमोद बिन्दौरी / मौलिक अप्रकाशितSee More
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"अच्छी ग़ज़ल कही है...आदरणीय समर जी ने बहुत ही बारीक़ नजर डाली है..यही सीखने में सहायक है।"
Oct 11
Naveen Mani Tripathi commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"आ0 आमोद श्रीवास्तव जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई । बधाई आपको।"
Oct 9
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,आपकी ग़ज़ल में क़वाफ़ी सहीह नहीं हैं,इस पर विचार करें ।"
Oct 8
Mohammed Arif commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"आदरणीय आमोद जी आदाब,                                 बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने का प्रयास । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे । मेरी ओर से दिली मुबारकबाद ।"
Oct 8
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं

बह्र- 2122-2122-2122-212ज्यों हवा दस्तक करे खटखट कोई होता नहीं।।मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं।।इस तरह परछाई सा महसूस होता वो मुझे।जैसे कोई दरमियाँ अपने है पर दिखता नहीं।।हर बुढ़ापा रात भर कुछ खोजता है जाने क्यानींद में भी जागता रहता है क्यों सोता नहीं ।।चौक में करता नुमाइश ,वक्त भी दल्ला हुआ।एक झटके में मुझे क्यों नग्न कर देता नहीं।।इक समंदर कैद है आँखों में अपने दर्द का ।जो भरा रहता है अंदर,पर कभी बहता नहीं।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशितSee More
Oct 8
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"aa brajesh sir .. aabhar"
Oct 7
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय अमोद जी..."
Sep 18
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"आ तेजवीर दादा सादर नमन ..प्रोत्साहन का बहुत बहुत आभार , आ समर दादा सादर नमन  दादा रचना मार्गदर्शन के लिए दिल से आभार "
Sep 14
amod shrivastav (bindouri) posted blog posts
Sep 14
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है ,बधाई स्वीकार करें । ' अवाज़ आज मेरी महफिलों से आती है' इस मिसरे में 'अवाज़' ग़लत शब्द है,इसकी वजह से मिसरा गड़बड़ हो रहा है,इसे यूँ कर सकते हैं:- 'सदा ये आज मेरी महफिलों से…"
Sep 14
TEJ VEER SINGH commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"हार्दिक बधाई आदरणीय आमोद श्रीवास्तव जी।बेहतरीन गज़ल। कदम रुके हैं मुहब्बत की राह में जबसे।है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है।।"
Sep 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले
"आ. भाई आमोद जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 10
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का ऊला कुछ और कसावत चाहता है ।"
Sep 10
babitagupta commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले
"बेहतरीन रचना ,आखिरी दो पंक्तियाँ बहुत सटीक,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय आमोद सरजी."
Sep 8
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले

बह्र - 2122-1221-22इतना उलझा है आदम बसर में।। खुद से पूछे वो है किस सफर में ।।क्या समझ पाएगे रात भर में।। फर्क है इस नजर उस नजर में।।ना बदल पाऊं बिलकुल न बदले। पर है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर में।।अपनी मंजिल से है लापता जो । चीखता फिर रहा, रह-गुजर में।।हर मुसाफिर की कोशिस यही बस।सब सलामत रहे मेरे घर में।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक- अप्रकाशितSee More
Sep 8

Profile Information

Gender
Male
City State
fatehpur
Native Place
Bindour
Profession
writing ,& job
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog

बहुत पछतायेगा वो मेरा पता पा कर - ग़ज़ल

बह्र - 1222-122-2212-22

कोई यूँ खुश हुआ हो अपना खुदा पाकर।।

बहुत पछताएंगे वो मेरा पता पाकर।।

सफर चलना है कैसे ,लेकर चलन कैसा।

उन्हें अहसास होगा ,आबोहवा पाकर।।

वो अपनी ज़द में ही अपना आशियाँ चुन लें ।

कहाँ होता है आदम से बा वफ़ा पाकर।।

मुझे अब मुल्क़ से ये मजहब ही निकालेगा ।

बहुत खुश है मुझे यह जलता हुआ पा कर ।।

मैं अपनी आरजू अब अपना कहूँ कैसे ।

ये तो खुश है मेरे बच्चों से दगा पा कर…

Continue

Posted on October 18, 2018 at 7:29pm

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं

बह्र- 2122-2122-2122-212



ज्यों हवा दस्तक करे खटखट कोई होता नहीं।।

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं।।



इस तरह परछाई सा महसूस होता वो मुझे।

जैसे कोई दरमियाँ अपने है पर दिखता नहीं।।



हर बुढ़ापा रात भर कुछ खोजता है जाने क्या

नींद में भी जागता रहता है क्यों सोता नहीं ।।



चौक में करता नुमाइश ,वक्त भी दल्ला हुआ।

एक झटके में मुझे क्यों नग्न कर देता नहीं।।



इक समंदर कैद है आँखों में अपने दर्द का ।

जो भरा रहता है अंदर,पर… Continue

Posted on October 7, 2018 at 11:06pm — 4 Comments

है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है

बहर

 1212-1122-1212-22

मेरे खयाल में अब फासलों से आती है।।

तुम्हारी याद भी अब दूसरों से आती है।।

कदम रुके हैं मुहब्बत की राह में जबसे।

है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है।।

की जर्रा जर्रा कही टूट कर है बिखरा यूँ।

सदा ये आज मेरी महफिलों से आती है।।

मसल चुका हुँ सभी कुछ मैं जह्न के भीतर।

अभी भी तेरी कसक , हौसलों से आती है।।

गुजर रही है मुहब्बत की तिश्नगी दे कर।

जो…

Continue

Posted on September 13, 2018 at 9:30pm — 5 Comments

बस है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर ले

बह्र - 2122-1221-22

इतना उलझा है आदम बसर में।।
खुद से पूछे वो है किस सफर में ।।

क्या समझ पाएगे रात भर में।।
फर्क है इस नजर उस नजर में।।

ना बदल पाऊं बिलकुल न बदले।
पर है कोशिश उड़ूँ कुतरे पर में।।

अपनी मंजिल से है लापता जो ।
चीखता फिर रहा, रह-गुजर में।।

हर मुसाफिर की कोशिस यही बस।
सब सलामत रहे मेरे घर में।।

आमोद बिन्दौरी /मौलिक- अप्रकाशित

Posted on September 7, 2018 at 8:30pm — 3 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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At 5:43am on July 13, 2015,
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मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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