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amod shrivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
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amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं ..
"आ ब्रजेश भाई साहब ...हृदय से आप का आभार "
Friday
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं ..
"आ समर दादा प्रणाम  प्रोत्साहन और मर्गदर्शन के लिए आभार ..."
Friday
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..

2121-212-2121-212सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई।। ख़ैरख्वाह वो बने,खैर-ख्वाही' की गई।।मुद्दतों के बाद गर जो यूँ बात की गई।। खामियां जता के ही गात फिर भरी गई।।गर दो'-आब की पवन,रोंक लें ये खिड़कियां । रूह चंद दिवारों के दरमियाँ सिली गई।।गर कहूँ जो' उनकी' तो साफ़ लफ़्ज हैं यही। रात-ओ-दिन युँ आदतन हमसे बात की गई ।।बिन पढ़े किताब -ए- दिल ,ग़र हिंसाब कर दिया ।। तो दरख़्ती' जिंदगी क़त्ल ही तो की गई।।मैं गरीब ए आह हूँ , गर कहूँ तो क्या कहूँ। के तबाह जिंदगी कर के दिल्लगी गई।।हम नशे में डूब कर जिंदगी गुजार…See More
Friday
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post कोई ऐसे रूठता है क्या
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,अच्छा प्रयास है,बधाई । मतले के सानी मिसरे में क़ाफ़िया दोष है ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं ..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प और व्याकरण पर अभी और अभ्यास की ज़रूरत है,ध्यान दें ।"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं ..
"वाह खूब ग़ज़ल हुई अमोद जी बधाई"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन ..गीत
"आदरणीय बिन्दौरी जी अच्छी रचना के लिए बधाई"
Wednesday
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

कोई ऐसे रूठता है क्या

122-1212-22.कोई रोकने लगा है क्या  ? कोई राज दरमियां है क्या?तेरा फोन अब नहीं आता!! कोई और मिल गया है क्या ?मुझे गैर कह दिया तुमने!! मेरा वास्ता बुरा है क्या ?मेरे रूबरू नहीं रहते!! मेरा साथ बददुआ है क्या?तू ही खैरख्वाह बस मेरा!! तू भी आजकल खफा है क्या?मिरे साथ साथ चलना था!! भटक रास्ता गया है क्या?तू क्यूँ बोलता नही कुछ अब!! कोई ऐसे रूठता है क्या???आमोद बिंदौरी / मौलिक - अप्रकाशितSee More
Mar 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन भी कितना आतुर है ..
"आद0 आमोद श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया सृजन पर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Mar 17
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं वक्त कहाँ कब रुकता हूँ .
"आद0 आमोद श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया प्रयास है, बधाई स्वीकार कीजिये।"
Mar 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मन भी कितना आतुर है ..
"आ. भाई आमोद जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Mar 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ ..
"आ. भाई आमोद जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।"
Mar 15
surender insan commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सच की झूठी जिल्दकारी क्या करूँ ..
"ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास किया आपने बहुत बहुत बधाई हो।"
Mar 13
amod shrivastav (bindouri) commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल ( इश्क़ उम्मीद है)
"आ कमर भाई साहब नमन अच्छी गजल के लिए आप को बधाई"
Mar 12
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन ..गीत
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 12

Profile Information

Gender
Male
City State
fatehpur
Native Place
Bindour
Profession
writing ,& job
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog

सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..

2121-212-2121-212

सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई।।

ख़ैरख्वाह वो बने,खैर-ख्वाही' की गई।।

मुद्दतों के बाद गर जो यूँ बात की गई।।

खामियां जता के ही गात फिर भरी गई।।

गर दो'-आब की पवन,रोंक लें ये खिड़कियां ।

रूह चंद दिवारों के दरमियाँ सिली गई।।

गर कहूँ जो' उनकी' तो साफ़ लफ़्ज हैं यही।

रात-ओ-दिन युँ आदतन हमसे बात की गई ।।

बिन पढ़े किताब -ए- दिल ,ग़र हिंसाब कर दिया ।।

तो दरख़्ती' जिंदगी क़त्ल ही तो की…

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Posted on March 22, 2019 at 10:30am

कोई ऐसे रूठता है क्या

122-1212-22

.

कोई रोकने लगा है क्या  ?

कोई राज दरमियां है क्या?

तेरा फोन अब नहीं आता!!

कोई और मिल गया है क्या ?

मुझे गैर कह दिया तुमने!!

मेरा वास्ता बुरा है क्या ?

मेरे रूबरू नहीं रहते!!

मेरा साथ बददुआ है क्या?

तू ही खैरख्वाह बस मेरा!!

तू भी आजकल खफा है क्या?…

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Posted on March 17, 2019 at 9:00pm — 1 Comment

मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं ..

2122-2122-2122

वक्त से दो चार हो जाने लगे हैं।।

मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं।।

अब जो अरमानों को टहलाने-लगे* हैं।।(बहाने बाजी करना)

जीस्त की सच्चाई अपनाने लगे हैं।।

उम्र की दस्तक़ जो है चहरे प मेरे।

श्वेत होकर केश लहराने लगे हैं।।

बचपना अब रूठता सा जा रहा है ।

पौढ़पन* अब अक्श दरसाने लगे हैं।।

मंजिलों में जिनके परचम दिख रहे उन।

सब के तर* पे शाल्य* मनमाने लगे हैं।।( निचला हिस्सा,…

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Posted on March 16, 2019 at 1:21pm — 4 Comments

जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन ..गीत



शीत जैसी चुभन, आग जैसी जलन।।

जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन।।

इक कशिश पल रही है हृदय में कहीं।

कश्मकश चल रही , साथ मेरे कोई।।

डुबकियां ले रहा ही मेरा आज मन।।

इस कदर है अधर से अधर का मिलन।।

जैसे पुरवा पवन छू रही हो बदन।।..१

जाने क्या कह रहा है .....

गर हूँ तन्हा मेरे साथ तन्हाई है।

भीड़ के साथ हूँ तो ये रूसवाई है।

दौड़कर पास आना लिपटना तेरा।।

मेरे आगोश में यूँ सिमटना तेरा।।

यूँ लगे जैसे मिलतें हो धरती…

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Posted on March 12, 2019 at 10:48am — 2 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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At 5:43am on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
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At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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