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amod shrivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
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amod shrivastav (bindouri) commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"आ बहुत खूब ..कभी गम के बादल,कभी सर्द आहें।पड़ी कितनी बातें भुलानी न पूछो .... बहुत बढ़िया सर"
6 hours ago
amod shrivastav (bindouri) commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ मजोज भाई सा , बढ़िया कही है , सादर बधाई "
6 hours ago
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है
"जी दादा प्रणाम  दादा मार्गदर्शन का शुक्रिया , व्याकरण  की अशुद्धियाँ दूर क्ररने के लिए मुझे और वक्त लगेगा, करता हूँ कोशिस ... नमन"
8 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । बह्र पर आपकी पकड़ अच्छी हो गई है,लेकिन शिल्प और व्याकरण पर अभी अभ्यास की ज़रूरत है,इस पर विचार करें । 'तुम्हारा प्यार, तुम सा यार तेरी यादें वो सारी।भुला हर कुछ अवारा बनके…"
16 hours ago
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है

बह्र 1222-1222-1222-1222बता हर सिम्त तेरा बनके मुझमें कौन रहता है।।तुझे लेकर अकेला बनके मुझमे कौन रहता है।।अगर अब मुस्कुराते हो मेरी जद्दोजहद से तुम।तो बोलो आज तुम सा बनके मुझमें कौन रहता है।।तुम्हारा प्यार, तुम सा यार तेरी यादें वो सारी।भुला हर कुछ अवारा बनके मुझमे कौन रहता है।।गरीबी के दिये सा गर्दिशों में भी मैं जगमग हूँ।मेरे घर अब उजाला बन के मुझमें कौन रहता है।।बहा कर खत तेरे सारे यूँ गंगा के किनारे पर।फकीरां मस्त आला बनके मुझमे कौन रहता है।।आमोद बिन्दौरी/ मौलिक-अप्रकाशितSee More
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।।
"अच्छी ग़ज़ल है अमोद जी...बाकी आदरणीय समर साहब से इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ.."
Dec 27, 2018
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।।
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन अभी शिल्प पर बहुत अभ्यास की ज़रूरत है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । ' खुश नशीबी है मेरी नफ़रत मुहब्बत जंग की' इस मिसरे में 'खुश नशीबी' को "ख़ुश नसीबी" कर…"
Dec 24, 2018
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।।

बह्र- 2122-2122-2122-22है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।।जो समझ पाए न तुम क्या फायदा कहकर है।।शोर कितना ही मचाये, या करे अब बकझक।मैं समझ लेता हूँ मेरा दिल भी इक दफ्तर है।।खुश नशीबी है मेरी नफ़रत मुहब्बत जंग की।हार कर भी जीतने जैसा ही इक अवसर है।।अब मैं ढक लेता हूँ  खुद-का ये बदन अच्छे से।अब नहीं मैं पहले जैसा गन्दगी अंदर है।।गीत गाता खुश है लगता घाट का यह पीपल।आस की चादर ढके पर दर्द का सागर है।।प्रेम शब्दों में लिखूँ या फिर उकेरू संग में।प्रेम का हर एक आखर स्वर्ण हस्ताक्षर है।।क्या अचम्भा…See More
Dec 23, 2018
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 92 in the group चित्र से काव्य तक
"है हौसला विश्वास जिसमें वो कठिनता पार है।जिसमें भरा है प्रेम सागर, हर जगह उद्धार है।जो राह में चलता निरंतर,दो कदम विश्वास का।वो खोज लेता है समय के साथ अपना रास्ता। आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशित"
Dec 23, 2018
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

बहुत पछतायेगा वो मेरा पता पा कर - ग़ज़ल

बह्र - 1222-122-2212-22कोई यूँ खुश हुआ हो अपना खुदा पाकर।।बहुत पछताएंगे वो मेरा पता पाकर।।सफर चलना है कैसे ,लेकर चलन कैसा।उन्हें अहसास होगा ,आबोहवा पाकर।।वो अपनी ज़द में ही अपना आशियाँ चुन लें ।कहाँ होता है आदम से बा वफ़ा पाकर।।मुझे अब मुल्क़ से ये मजहब ही निकालेगा ।बहुत खुश है मुझे यह जलता हुआ पा कर ।।मैं अपनी आरजू अब अपना कहूँ कैसे ।ये तो खुश है मेरे बच्चों से दगा पा कर ।।आमोद बिन्दौरी / मौलिक अप्रकाशितSee More
Oct 18, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"अच्छी ग़ज़ल कही है...आदरणीय समर जी ने बहुत ही बारीक़ नजर डाली है..यही सीखने में सहायक है।"
Oct 11, 2018
Naveen Mani Tripathi commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"आ0 आमोद श्रीवास्तव जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई । बधाई आपको।"
Oct 9, 2018
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,आपकी ग़ज़ल में क़वाफ़ी सहीह नहीं हैं,इस पर विचार करें ।"
Oct 8, 2018
Mohammed Arif commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
"आदरणीय आमोद जी आदाब,                                 बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने का प्रयास । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे । मेरी ओर से दिली मुबारकबाद ।"
Oct 8, 2018
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं

बह्र- 2122-2122-2122-212ज्यों हवा दस्तक करे खटखट कोई होता नहीं।।मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं।।इस तरह परछाई सा महसूस होता वो मुझे।जैसे कोई दरमियाँ अपने है पर दिखता नहीं।।हर बुढ़ापा रात भर कुछ खोजता है जाने क्यानींद में भी जागता रहता है क्यों सोता नहीं ।।चौक में करता नुमाइश ,वक्त भी दल्ला हुआ।एक झटके में मुझे क्यों नग्न कर देता नहीं।।इक समंदर कैद है आँखों में अपने दर्द का ।जो भरा रहता है अंदर,पर कभी बहता नहीं।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशितSee More
Oct 8, 2018
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
"aa brajesh sir .. aabhar"
Oct 7, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
fatehpur
Native Place
Bindour
Profession
writing ,& job
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog

मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है

बह्र 1222-1222-1222-1222

बता हर सिम्त तेरा बनके मुझमें कौन रहता है।।

तुझे लेकर अकेला बनके मुझमे कौन रहता है।।

अगर अब मुस्कुराते हो मेरी जद्दोजहद से तुम।

तो बोलो आज तुम सा बनके मुझमें कौन रहता है।।

तुम्हारा प्यार, तुम सा यार तेरी यादें वो सारी।

भुला हर कुछ अवारा बनके मुझमे कौन रहता है।।

गरीबी के दिये सा गर्दिशों में भी मैं जगमग हूँ।

मेरे घर अब उजाला बन के मुझमें कौन रहता है।।

बहा कर खत तेरे सारे यूँ गंगा के…

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Posted on January 17, 2019 at 6:35pm — 1 Comment

है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।।

बह्र- 2122-2122-2122-22

है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।।

जो समझ पाए न तुम क्या फायदा कहकर है।।

शोर कितना ही मचाये, या करे अब बकझक।

मैं समझ लेता हूँ मेरा दिल भी इक दफ्तर है।।

खुश नशीबी है मेरी नफ़रत मुहब्बत जंग की।

हार कर भी जीतने जैसा ही इक अवसर है।।

अब मैं ढक लेता हूँ  खुद-का ये बदन अच्छे से।

अब नहीं मैं पहले जैसा गन्दगी अंदर है।।…

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Posted on December 23, 2018 at 3:01pm — 2 Comments

बहुत पछतायेगा वो मेरा पता पा कर - ग़ज़ल

बह्र - 1222-122-2212-22

कोई यूँ खुश हुआ हो अपना खुदा पाकर।।

बहुत पछताएंगे वो मेरा पता पाकर।।

सफर चलना है कैसे ,लेकर चलन कैसा।

उन्हें अहसास होगा ,आबोहवा पाकर।।

वो अपनी ज़द में ही अपना आशियाँ चुन लें ।

कहाँ होता है आदम से बा वफ़ा पाकर।।

मुझे अब मुल्क़ से ये मजहब ही निकालेगा ।

बहुत खुश है मुझे यह जलता हुआ पा कर ।।

मैं अपनी आरजू अब अपना कहूँ कैसे ।

ये तो खुश है मेरे बच्चों से दगा पा कर…

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Posted on October 18, 2018 at 7:29pm

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं

बह्र- 2122-2122-2122-212



ज्यों हवा दस्तक करे खटखट कोई होता नहीं।।

मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं।।



इस तरह परछाई सा महसूस होता वो मुझे।

जैसे कोई दरमियाँ अपने है पर दिखता नहीं।।



हर बुढ़ापा रात भर कुछ खोजता है जाने क्या

नींद में भी जागता रहता है क्यों सोता नहीं ।।



चौक में करता नुमाइश ,वक्त भी दल्ला हुआ।

एक झटके में मुझे क्यों नग्न कर देता नहीं।।



इक समंदर कैद है आँखों में अपने दर्द का ।

जो भरा रहता है अंदर,पर… Continue

Posted on October 7, 2018 at 11:06pm — 4 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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At 5:43am on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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