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dandpani nahak
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"आदरणीय डॉ गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल' जी प्रणाम बहुत धन्यवाद आपका आपने वक़्त दिया और विस्तार से समझाया! मैने जल्दबाज़ी की है ये मुझे भी लग रहा था! भविष्य में अवश्य खयाल रखूँगा! "
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-135
"कुंडलिया छन्द जीवन भर की स्मृतियाँ, और बिखरे संवाद आओ इकट्ठी कर चलें, भूली बिसरी याद भूली बिसरी याद, करतबें सब बचपन की गुंथे हुए मनके से, भीतर तह तक मन की उलटें पन्ने अतीत, किताबों के एक एक कर रहें समृद्ध हम सब, नए सिरे से जीवन भर मौलिक एवं…"
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"भूली बिसरी याद, करताबें बचपन की"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"जी शुक्रिया!"
Dec 29, 2021
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमित कुमार 'अमित ' जी सादर अभिवादन! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें! छठा शैर लाज़वाब और सच्चा शैर वाह! बहुत बधाई आपको!"
Dec 29, 2021
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय आज़ी तमाम जी नमस्कार! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब आदाब! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय आशीष यादव जी नमस्कार! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
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"आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन! ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
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"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन! ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
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"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन! अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
Dec 29, 2021
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी सादर अभिवादन! बहुत-बहुत धन्यवाद आपका "
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"आदरणीय भाई साहब सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन! बहुत-बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आये और सराहा बहुत शुक्रिया आपका!"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय भाई लक्ष्मण जी सादर अभिवादन! बहुत- बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आये हौसलाअफ़ज़ाई की! बहुत शुक्रिया आपका!"
Dec 29, 2021
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय मुनीश 'तन्हा' जी नमस्कार! बहुत-बहुत शुक्रिया आपका "
Dec 29, 2021
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला और हौसला बढ़ाया बहुत शुक्रिया!"
Dec 29, 2021

Profile Information

Gender
Male
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arang
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arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई
ज़िन्दगी है की हादसा कोई

वो पुराने ज़माने की बात है
अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का है न फ़लसफ़ा कोई

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 27, 2020 at 6:02pm — 13 Comments

ग़ज़ल 2122 1212 22

इश्क़ हो या कि हादसा कोई
सब का होता है कायदा कोई

वो पुराने ज़माने कि बात हैं
अब नहीं करता हैं वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का हैं न फ़लसफ़ा कोई

सब यहाँ बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का हैं टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 9, 2020 at 2:17am

122 122 122 12 ग़ज़ल

कभी इस तरह से भी सोचा है क्या
भला ज़िन्दगी का भरोसा है क्या

यूँ रहता है जैसे यहाँ सदियों तक
रहेगा मगर ये तो धोका है क्या

नकाबों में दिल्ली है सरकारें दो
अजीबो गरीब ये तमाशा है क्या

अगर ना सियासत हो दिल्ली में तो
तभी कुछ किया जा भी सकता है क्या

दिवाली मनाई है दिल्ली ने भी
खुदा ने दिवाला निकाला है क्या

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on November 3, 2019 at 11:41pm — 1 Comment

इस दीवाली

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम

बनकर प्रकाश अँधेरे में उतर जाना तुम



देखना कहीं कोई मासूम

बुझी फुलझड़ियों में गुमसुम

चिंगारी ढूंढ रहा हो तो

उसके पास जाना तुम



रौशन कर दुनिया उसको गले लगाना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना तुम



और देखना घर की झुर्रियाँ सभी

दूर कर के दिलों की दूरियाँ सभी

साथ मिलके सब अपनों के

एक एक कर जलाना मजबूरियाँ सभी



एकता में बल है कितना ये बताना तुम

इस दीवाली सिर्फ दीये मत जलाना… Continue

Posted on October 27, 2019 at 4:24pm — 8 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 6:03pm on March 29, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय नाहक जी
बहुत आभार है आपका. मैं कोशिश करूंगा कि भविष्य में और भी बेहतर लिख संकू.
At 10:32am on August 7, 2019, Samar kabeer said…

नाहक़ जी,प्रयासरत रहें ।

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

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