For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

dandpani nahak
Share

Dandpani nahak's Friends

  • Mohammed Arif
  • Samar kabeer
  • Harash Mahajan
 

dandpani nahak's Page

Latest Activity

dandpani nahak left a comment for babitagupta
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का"
Apr 13
dandpani nahak left a comment for नादिर ख़ान
"बहुत शुक्रिया आदरणीय नादिर ख़ान साहब"
Apr 13
dandpani nahak left a comment for Ashok Kumar Raktale
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का"
Apr 13
dandpani nahak left a comment for Asif zaidi
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब हौसला बढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया"
Apr 13
dandpani nahak left a comment for rajesh kumari
"बहुत शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी"
Apr 13
dandpani nahak left a comment for Samar kabeer
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें"
Apr 13
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"ग़ज़ल 22 22 22 22 सारे कौव्वे द्वार खड़े हैं चुनने को सरकार खड़े हैं हमने जिनको वोट दिया था किस पार्टी इस बार खड़े हैं मुख में राम बगल में छुरी ले कब से हम तैयार खड़े हैं इधर कुआँ तो उधर है खाई जन बीच मंझधार खड़े हैं चारों खम्भे लोकतंत्र के घुटनों के…"
Apr 12
dandpani nahak commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"शेर दर शेर दाद देता हूँ कुबूल फरमाएं!"
Apr 4
dandpani nahak commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"वाह आदरणीय समर क़बीर साहेब बहुत खूब ग़ज़ल हर एक शेर लाज़वाब और बहुत सादगी से कही गयी !मक़्ता के क्या कहने ऐसी ग़ज़ल जो ओ बी ओ को पूरी शिद्दत से बयाँ करती है"
Apr 4
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Mar 23
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय सुर्खाब बशर जी हार्दिक बधाई स्वीकार करे उम्दा ग़ज़ल कही आपने"
Mar 23
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें अच्छी प्रस्तुति"
Mar 23
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत खूब ग़ज़ल आदरणीय मुनीश तन्हा जी हार्दिक बधाई"
Mar 23
dandpani nahak left a comment for मिथिलेश वामनकर
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का"
Mar 23
dandpani nahak left a comment for munish tanha
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का"
Mar 23
dandpani nahak left a comment for rajesh kumari
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत शुक्रिया"
Mar 23

Profile Information

Gender
Male
City State
arang
Native Place
arang
Profession
service

Dandpani nahak's Blog

आओ एक सपना देखो

आओ एक सपना देखो

और उसपे विश्वास करो

कठिन डगर मिले अगर

गौरव का अहसास करो

आओ एक सपना देखो.....



देखो बाज़ जो होता है

फ़िक्र न करता मेघों की

और जंगल में हाथी भी

क्या चिंता करे है बाघों की

उड़ो सारा आकाश तुम्हारा

डैनों का विकास करो



आओ एक सपना देखो.....



लगातार लगे रहने से

पर्बत बी देता रास्ता है

कोई चीज़ असंभव है

कौन यहाँ ऐसा कहता है



नया इतिहास रच बसने को

रोज यूँ ही प्रयास करो



आओ एक… Continue

Posted on March 12, 2019 at 10:09am — 2 Comments

जब क़सम हिंदुस्तान की है

जब क़सम हिंदुस्तान की है
फिक्र फिर किसे जान की है

फ़लक है समूचा तिरंगा
यही बात तो शान की है

ज़माने हुए थी सचाई
तस्वीरें ही पहचान की है

मुद्दतों से तो हम न सुधरे
घडी आज इम्तहान की है

शिखर पर मुल्क हो हमारा
ये ख्वाहिश ही नादान की है

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on August 15, 2018 at 10:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल : 2122 2122 2122

एक दुजे के अब हबीब नहीं रहे हैं
लोकतंत्र औ हम करीब नहीं रहे हैं

फसल की वाज़िब मिले क़ीमत ऐसी तो
हम किसानों के नसीब नहीं रहें हैं

खत्म करके सब गरीबों को मुल्क से
घोषणा कर दो गरीब नहीं रहे हैं

हर ज़ुल्म हमने सहे हैं मगर फिर भी
यूँ कभी भी बेतर्तीब नहीं रहें हैं

मंदिर मस्जिद एक साथ न हो कभी भी
इस क़द्र तंग तहज़ीब नहीं रहे हैं


दण्डपाणि नाहक
मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 8:00pm — 5 Comments

कविता जीवन का समकोण त्रिभुज

जीवन का समकोण त्रिभुज
अनिश्चितताओं के दो न्यून कोणों से
कुछ नहीं ज्यादा
बड़ी मश्शक्कत के बाद भी
योग एक सरल रेखा
बहुत संभावनाओं के बावजूद
जिन्दा रहने की संभाव्यता
आधा-आधा
हाँ, दुःख और सुख का
पूर्ण वर्ग
जरूर बीजगणित का सूत्र है
क्या मृत्यु ही जीवन का
एकमात्र सत्य है

दण्डपाणि नाहक

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Posted on March 5, 2018 at 7:32pm — 3 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:31pm on January 26, 2019, Samar kabeer said…

प्रयासरत रहें ।

At 10:27am on January 25, 2019, Samar kabeer said…

जनाब नाहक़ साहिब आदाब,

कृपया ये ग़ज़ल मुझे वाट्सऐप कर दें, मेरा नम्बर है 09753845522

At 8:07am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 8:06pm on December 15, 2017, dandpani nahak said…
122 122 122 122
हजारों किस्म से नुमायाँ हुए हैं
जहाँ से चले थे वहीँ पे खड़े हैं

निगाहें चुराना उन्होंने सिखाया
हमें भी नज़ारे कहाँ देखनें हैं

जिन्होनें हमें लूटना नाहिं छोड़ा
उन्हें क्या बताएं उन्हीं के धड़े हैं

तुम्हारा हमारा यहाँ क्या बचा है
चलो की यहाँ से रस्ते नापने हैं

हमें जी हजूरी नहीं 'शौक' जाओ
तुम्हारे लिए ही नहीं हम बनें हैं

दण्डपाणि नाहक 'शौक'

मौलिक अप्रकाशित
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तूलिकायें (लघुकथा) :
"ऐसी ही निम्न स्तर की बयानबाज़ी ने राजनीति का चेहरा ही बदल दिया है।मतदाता ही देश का भविष्य निर्माण…"
4 hours ago
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post विवशतायें (लघुकथा) :
"फिर कोई उपाय भी नही था जीवन बचाने की विवशता थी ,आनलाइन,आफलाइन बस मूकदर्शक थे विवशता ऐसी भी ।बधाई…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तूलिकायें (लघुकथा) :
"आदाब। मेरे इस रचना पटल पर भी अपना अमूल्य समय देने, मुझे प्रोत्साहित करने हेतु बहुत -बहुत शुक्रिया…"
4 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"

कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"तन-मन छीन किये अति पागल,हे मधुसूदन तू सुध ले।श्रवणन गूँज रही मुरली वह,जो…See More
7 hours ago
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
""भाई ब्रिजेश" हौसलाअफजाई के लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद|"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

आम चुनाव और समसामायिक संवाद (लघुकथाएं) :

(1).चेतना : ग़ुलामी ने आज़ादी से कहा, "मतदाता सो रहा है, उदासीन है या पार्टी-प्रत्याशी चयन संबंधी…See More
10 hours ago
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

कोई तो दीद के क़ाबिल है आया

1222-1222-122श'हर  में शोर ये  फैला हुआ है ।। पडोसी गाँव में मुजरा हुआ है।।कोई तो दीद के…See More
10 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

अधूरी सी ज़िंदगी ....

अधूरी सी ज़िंदगी ....कुछ अधूरी सी रही ज़िंदगी कुछ प्यासी सी रही ज़िंदगी चलते रहे सीने से लगाए एक उदास…See More
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"सुधीजनों के प्रति हार्दिक आभार"
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, लोकतंत्र की महत्ता पर सुंदर रचना हुई है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
20 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"पुराने शाइरों में कई उस्ताद शाइरों ने इसका प्रयोग किया है,और ये उर्दू में क़तई ग़लत नहीं,हाँ हिन्दी…"
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी साहब सादर, मतदाओं के प्रकार बताते सुंदर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई…"
20 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service