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pratibha tripathi
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Welcome, pratibha tripathi!

Profile Information

Gender
Female
City State
Ghaziabad
Native Place
jhansi
Profession
house wife
About me
writing gazal &poetry,singing ,dansing,

मन का दुस्साहस

मन का दुस्साहस

तो देखो।

नापना चाहता है ,

आकाश की ऊंचाई ,सागर की गहराई ,

और

पृथ्वी पर अपनी परछाईं  । 

वो सब कुछ जो ,

उसकी पहुँच से दूर है ,असीमित है । 

चौतरफ़े विचार उसे ,

बरगलाना चाहते है । 

और वो है कि,

एक हाथ से नापता ,

और दूसरे पोरों पर गिनता जा रहा है । 

जैसे उसे अनुमान ही नहीं ,

कि असंभव भी कुछ होता है । 

'मन ' ये जानकर भी यह 

जानना नहीं चाहता । 

क्यूंकी वो तो भली भांति 

समझता है कि

शरीर में दो हाथ  और उँगलियाँ । 

और उँगलियों में पोरे तो 

सीमित हो सकते है । 

किन्तु उँगलियों कि थिरकन ,

विश्वास का आयाम ,

आँखों कि दृष्टि सीमित नहीं ।

बस एक असीमित लगन से ,

उपजा एक साहस है । 

कि वो गगन सा विशाल ,

समुद्र सा गहरा और 

पृथ्वी सा ठहरा ,

बना लेगा स्वयं को । 

 मौलिक व  अप्रकाशित 

   प्रतिभा 

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Pratibha tripathi's Blog

किस पर हक़ जताऊं

मैं बिकी नहीं थी फिर भी मेरे खरीदार थे वो

मेरी देह आत्मा अभिलाषा सबके हक़दार थे वो

किसी ने नुमाइश की ,किसी ने पसंद किया

किसी ने भर दी मांग बेपनाह हसरतों से

किसी ने दरकार की वारिस की

किसी ने छोड़ दिया अनाथों की तरह

किसी ने पुछा तो बस स्वार्थ को भरमाया

न किसी ने अपना समझा न मुझे अपनाया

इस दहलीज़ से उस दहलीज़ पर मेरा एक

इंच भी नहीं अपना

किस पर हक़ जताऊं ,मैं किस घर जाऊँ

जिसने मुझे बोझ समझा या जिसने

मुझे रिश्तों का बोझ ढोंने वाली ।

किसी ने… Continue

Posted on September 23, 2016 at 6:12pm — 2 Comments

बेटियां है रौशनी रौशन करें सारा जहाँ

बेटियों को कोख में कब तक गिराया जाएगा

क़त्ल का ये सिलसिला कब तक चलाया जायेगा ।



कब तलक लड़ते रहें हम अपने ही अस्तित्व को

फ़ासला यह सोच का कब तक निभाया जायेगा ।



हम ही चाहत और रहमत को तरसते क्यों रहें

कब हमें सबके बराबर में बिठाया जायेगा ।



हम तो घर की खूबसूरत चीज़ बनकर रह गए

कब हमें भी फैसलों में हक़ दिलाया जाएगा ।



हम हमारी हसरतों की थैलियाँ क्यूँ फेंक दें

कब हमारे ख्वाब को सर पर उठाया जाएगा ।



आज इस दहलीज़ पर तो कल किसी… Continue

Posted on August 23, 2016 at 10:00am — 9 Comments

लम्हा लम्हा -गीत

लम्हा लम्हा तेरी यादों में बिताया हमने ।

तिनका तिनका खोये लम्हों को चुराया हमने ।

कभी रोये कभी हंसकर तुझे महसूस किया

कतरा कतरा तेरे वादों को निभाया हमने ।



साथ रहकर भी न तुम जान सके

मेरी आदत को न पहचान सके

कभी रूठे कभी मुझको ही नाराज़ किया

कतरा कतरा तेरे नखरों को उठाया हमने



जितना चाहा है मेरे दिल ने तुम्हें

उतना पाया है मेरे दिल ने तुम्हे

कभी तूने यही दिल तोड़कर मायूस किया

कतरा कतरा इन्हीं टुकड़ों को बचाया हमने



फिर भी…

Continue

Posted on July 28, 2016 at 4:00pm — 8 Comments

नफरत का सैलाब दबाकर देख ज़रा [22 22 22 22 22 2]

नफरत का सैलाब दबाकर देख ज़रा

दिल से इक आवाज़ लगाकर देख ज़रा ।

तनहाई भी एक मसर्रत देती है

कुछ रिश्तों से हाथ छुड़ाकर देख ज़रा ।

मरते मरते जीवन को कुछ जी लेगा

एक हसीं एहसास बसाकर देख ज़रा ।

जीवन की हर मुश्किल हल हो जाती है

चेहरे पर मुस्कान खिलाकर देख ज़रा ।

धरती प्यासी रूठ गए हैं बादल…

Continue

Posted on July 10, 2015 at 12:00am — 9 Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 9:29am on July 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आदरणीया प्रतिभा त्रिपाठी जी ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें।
At 8:42am on May 24, 2015, pratibha tripathi said…

मित्रो आज इतने अंतराल के बाद इस मंच पर आई हूँ तो सबसे पहले इस मंच को प्रणाम करती हूँ ।  आप सभी को सुप्रभात मित्रों मेरा स्वस्थ्य काफी दिनो से ठीक न चलने के  कारण मैं अपनी पोस्ट पर भी न आ सकी आप सभी से इसके लिए क्षमा चाहती हूँ । मैं आजसे 15 दिन पहले हॉस्पिटल मे अपने maigrain के दर्द से पीढ़ित थी 5 दिन admit रहने के बाद विश्राम ही कर रही हूँ ,सर दर्द की वजह से ज़्यादा laptop पर काम  नहीं कर पा रही थी ,किन्तु अब ayurvaidik उपचार ले रही हूँ आराम भी है ,आप सभी के स्नेह भरे comment देखकर प्रसन्न हूँ आशा करती हूँ की काव्यात्मक निखार और सुधार करने का और प्रयास करुगीऔर  आप सभी को बेहतर रचनाए देने की पूरी कोशिश करूंगी । आप ऐसे ही स्नेह बनाए रखिए । धन्यवाद 

At 12:33pm on May 1, 2015, Madan Mohan saxena said…

Nice Poems & Pictures too. keep sharing

At 7:46am on April 18, 2015, pratibha tripathi said…

सभी को सुप्रभात ,   कृष्णा मिश्रा भाई जी आपको महीने के सक्रिय सदस्य होने की हार्दिक शुभकामनाए । आदरणीय मोहन सेठी जी को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए मनोनीत होने पर बहुत बहुत शुभकामनाए । 

At 5:55am on March 21, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आपका स्वागत है। सादर ।
At 9:02pm on March 6, 2015, pratibha tripathi said…

आप सभी ओ बी ओ सदस्यों और मित्रों को मेरे और मेरे परिवार की ओर से होली की बहुत शुभकामनायें । ये होली  आपके जीवन और मन को रंग दे बस इसी कामना के साथ आप सभी को होली शुभ हो । 

At 8:06pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीया प्रतिभा जी ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें |सादर अभिनंदन |

At 5:59pm on February 18, 2015, maharshi tripathi said…

आ. प्रतिभा जी आपकी कविता को महीने की  सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई| 

At 4:48pm on February 17, 2015, डिम्पल गौड़ 'अनन्या' said…

आदरणीया प्रतिभा जी,  आपको हार्दिक बधाई |

At 3:22pm on February 17, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

क्रपया वकाला  को' व् कला ' पढ़े i सादर i

 
 
 

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