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rakesh gupta
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टीम केजरीवाल की सोच आखिर है क्या?
21 Replies

वन्दे मातरम आदरणीय बंधुयों,आज समाज का बड़ा वर्ग आक्रोशित है, इस बड़े वर्ग को अन्ना जी में अपना रहनुमा नजर आया था, मगर शायद टीम अन्ना में वैचारिक स्तर पर सामन्जस्य नही बन पाया और एक बड़ा आन्दोलन अंत तक…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Oct 22, 2012.

मुंबई बम धमाकों पर विशेष : आखिर कब तक ?
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मुंबई धमाकों में 15 की मौत, 110 घायल…Continue

Started this discussion. Last reply by shalini kaushik Jul 17, 2011.

अब क्या होना चाहिए हमारा अगला कदम ?
3 Replies

वन्दे मातरम बंधुओं,निहायत ही नीचता की हद पार कर गई है कांग्रेस सरकार. यह साबित करने के लिए काफी है की सरकार खुद भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और भ्रष्टाचार पर कोई भी कार्यवाही करने की बात केवल जनता और…Continue

Started this discussion. Last reply by Tapan Dubey Jun 6, 2011.

आखिर कब तक होता रहेगा हिन्दू देवी देवताओं हिन्दू आस्थाओं का अपमान ???
6 Replies

वन्दे मातरम दोस्तों,आखिर कब तक होता रहेगा हिन्दू देवी देवताओं हिन्दू आस्थाओं का अपमान ???रमेश पब्लिशिंग हाउस अपनी पापुलर मास्टर गाइड राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय प्रवेश परीक्षा वर्ग 6 नामक पुस्तक के…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 17, 2011.

 

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.....रावण सी दानवी,और कभी राम सी ....

जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,

रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........

तोड़ती है एक झटके में कभी सपने सभी

अपने बेगाने होते, बेगाने अपने कभी,

कभी मुख में नीम सी कड़वाहट भर जाती है,

कभी खुद बनती साकी, कभी खुद जाम सी 

जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,

रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........

कई बार जिंदगी मृगतृष्णा शाम ओ शहर,

जेठ की दोपहरी से तपते चारो पहर,

कभी खुद बनके सावन, पींगे बढ़ाती है,

माँ के आँचल में कभी करती आराम…

Continue

Posted on February 2, 2016 at 3:00pm — 4 Comments

हक मांगे गर ये पीट पीट लाओ जी,

बिजली पानी के नाम लूटना ना छोड़िये,

डाकू हैं बेशक, दुशाला राम नाम ओडीए,

हमारे हाथ मरने को जनता लाचार है,

फ़िक्र काहे की तुम्हे मनमोहन सरदार है..........

दोनों हाथ लूट चाहे चार हाथ लूटिये, 

विरोध गर करे कोई ठोकिये और पीटिए,

लूटना ना छोड़ तुझे काहे का डर यार है,

इस हमाम नंगी सारी सरकार है..............

घोटाले कितने दिन याद रख पाएंगे,

भुल्लकड़ लोग ये सब भूल जायेंगे,

महंगाई का दंश इन्हें दो बारम्बार…

Continue

Posted on October 13, 2012 at 10:23am — 4 Comments

...कुली कैसे शहंशाह बने हम्माली में...

जनता को भी याद नही घोटाले कितने हुए,
कितने मुंह काले हुए कोयले की दलाली में...........
पचास लाख क्यूँकर पाँच सौ करोड़ बने,
कुली कैसे शहंशाह बने हम्माली में.............
विकलांगों का पैसा किस किस की जेब गया, 
रातों रात महल कैसे बने जगह खाली में.............
टू जी और थ्री जी का दौर कब गुजर गया,
सागर समाया क्यूँकर चाय की प्याली में...............
हर दिन इनका ईद, रात हर दिवाली,
दीवाला जनता का,…
Continue

Posted on October 13, 2012 at 9:07am — 4 Comments

भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी

वन्दे मातरम दोस्तों,



आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें



आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,

नाग वहशत के जलाओ…

Continue

Posted on August 20, 2012 at 11:30am

Comment Wall (15 comments)

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At 9:16pm on October 2, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:16pm on September 7, 2011, mohinichordia said…

 आपकी कविताओं में देशभक्ति  का जज्बा हे  

At 6:51pm on February 16, 2011, ratnesh said…

prabhu ji rachna aap ki hain mia to aap ki rachchna ko apne paper main ek stahan de kar aapne aap ko danya  samjhunga 

aap ek bar hamara news paper jaroor dekh lan  jiska link mai aapko de raha hoon

www.hamarametro.com 

At 12:59am on February 8, 2011, प्रमोद वाजपेयी said…
स्वागत है आपका राकेशजी ....
At 10:06pm on December 17, 2010, Nemichand Puniya said…

sir, I am much obelijed to u . many thanks

At 11:24pm on December 9, 2010, Lata R.Ojha said…
धन्यवाद राकेश जी :)
At 8:16pm on October 30, 2010, Admin said…
राकेश जी, एडमिन टीम का सदैव यह प्रयास रहता है कि हम आप सबको शिकायत का मौका ना दे | आप से निवेदन है कि आप इन सब बातों को ध्यान मे ना ले, आइये हम सब मिलकर साहित्य और ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार दोनों को समृद्ध करे |
At 8:16pm on October 30, 2010, Admin said…
आदरणीय राकेश जी,
सादर अभिवादन,
मैं आप के सभी प्रश्नों का उत्तर सिलसिलेवार दे रहा हूँ ................
आप ने कहा कि "एक फनकार के लिए उसकी कला को मिली प्रशंसा उसका सम्मान सबसे बड़ी पूँजी होती है"
राकेश जी सोलह आने सत्य, OBO एक परिवार है और परिवार के मंच पर आये सभी कृतियों पर प्रसंशा अथवा आलोचना परिवार के सदस्यों को ही करनी है, परिवार के बाहर के लोग आपकी कृतियों को पढ़ तो सकते है पर टिप्पणी नहीं दे सकते, अतः हम सबकी यह अपेक्षा रहती है कि सभी सदस्य एक दुसरे की रचनाओं पर अवश्य टिप्पणी दे, ताकि OBO का उद्देश्य पूरा हो |
आपने कहा "आपके मंच पर मुझे लगता है की केवल चंद लोगों को ही आपके द्वारा फीचर होने का अधिकार दिया गया है, या फिर ये है की अन्य रचनाये निम्न कोटि की हैं जो उन्हें फीचर नही किया जाता है"
राकेश जी ऐसी बात नहीं है, सबसे पहले तो मैं यह बता दूँ कि OBO मेरा मंच नहीं है बल्कि यह हम सबका है, मैं भी केवल सेवा भाव से ही OBO से जुड़ा हूँ , OBO एक नॉन प्रोफिट साईट है, उल्टे इसके संचालन मे प्रति महीने US डोलर मे भुगतान करना होता है, अतः हम सब को सेवा भाव से ही OBO को प्रगति पथ पर चलते देना है, जिसमे आपकी भी सहयोग कि जरूरत है |
OBO पर किसी को विशेष की दर्जा नहीं मिला हुआ है, सभी की रचनाओं को एक समान रूप से देखा जाता है, किसी रचना को फीचर करने का अधिकार OBO के प्रधान संपादक को है जो अपने विवेक के अनुसार समय समय पर करते है | आप की पहले आई रचना को भी फीचर किया जा चूका है |
आपने कहा "यदि मैं एक निम्न कोटि का रचनाकार हूँ तो सम्भवत इतने उत्क्रष्ट ग्रुप मैं बने रहने का मुझे कोई अधिकार नही है, या फिर आपको चाहिए की आप मुझे बताये की मेरी रचनाये मोलिक नही है, चोरी की है या फिर फीचर होने लायक क्यों नही हैं ?"
OBO साहित्यकारों का एक साझा मंच है जो सभी के लिये ओपन है, OBO परिवार के सभी साहित्यकार हमारे नजर मे उत्क्रष्ट ही है, OBO को आज यदि आप सब उत्क्रष्ट मानते है तो इसे उत्क्रष्ट आप के द्वारा बनाया गया है | जो रचनायें फीचर नहीं होती उसका यह अर्थ नहीं है कि वो मौलिक नहीं है, चोरी की है | किन्तु हम सभी रचनाओं को फीचर तो नहीं कर सकते ना |
At 10:20pm on October 25, 2010, कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said…
HELLO..RAKESH JI SWAGAT HAI...
At 3:39pm on October 21, 2010, Admin said…
आदरणीय राकेश जी,
सादर अभिवादन,
कोई भी ब्लॉग अनुमोदन तथा feature होने के उपरांत मुख्य पृष्ठ पर आता है, अनुमोदन और feature करने का विशेषाधिकार ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रधान संपादक के पास सुरक्षित है |
अधिक जानकारी नीचे दिये लिंक पर भी देखी जा सकती है ........
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साथ ही निवेदन है कि यदि ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रगति के सम्बन्ध मे कोई सुझाव हो तो अवश्य दीजियेगा |
धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO
 
 
 

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