For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

rakesh gupta
  • Male
  • DELHI
  • India
Share

Rakesh gupta's Friends

  • deepti sharma
  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"
  • AK Rajput
  • mohinichordia
  • Shashi Mehra
  • kalpana
  • alpana bhattacharya
  • Shyam Bihari Shyamal
  • vishnukantmisra
  • mayur garg
  • राजेश शर्मा
  • कमल वर्मा "गुरु जी"
  • अर्श
  • गौतम राजरिशी
  • R. K. PANDEY "RAJ"

rakesh gupta's Discussions

टीम केजरीवाल की सोच आखिर है क्या?
21 Replies

वन्दे मातरम आदरणीय बंधुयों,आज समाज का बड़ा वर्ग आक्रोशित है, इस बड़े वर्ग को अन्ना जी में अपना रहनुमा नजर आया था, मगर शायद टीम अन्ना में वैचारिक स्तर पर सामन्जस्य नही बन पाया और एक बड़ा आन्दोलन अंत तक…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Oct 22, 2012.

मुंबई बम धमाकों पर विशेष : आखिर कब तक ?
12 Replies

मुंबई धमाकों में 15 की मौत, 110 घायल…Continue

Started this discussion. Last reply by shalini kaushik Jul 17, 2011.

अब क्या होना चाहिए हमारा अगला कदम ?
3 Replies

वन्दे मातरम बंधुओं,निहायत ही नीचता की हद पार कर गई है कांग्रेस सरकार. यह साबित करने के लिए काफी है की सरकार खुद भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और भ्रष्टाचार पर कोई भी कार्यवाही करने की बात केवल जनता और…Continue

Started this discussion. Last reply by Tapan Dubey Jun 6, 2011.

आखिर कब तक होता रहेगा हिन्दू देवी देवताओं हिन्दू आस्थाओं का अपमान ???
6 Replies

वन्दे मातरम दोस्तों,आखिर कब तक होता रहेगा हिन्दू देवी देवताओं हिन्दू आस्थाओं का अपमान ???रमेश पब्लिशिंग हाउस अपनी पापुलर मास्टर गाइड राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय प्रवेश परीक्षा वर्ग 6 नामक पुस्तक के…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 17, 2011.

 

rakesh gupta's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
dehli
Profession
ngo worker
About me
एक सीधा सादा मगर धुन का पक्का, सभी को प्रेम करने वाला इन्सान

rakesh gupta's Photos

  • Add Photos
  • View All

Rakesh gupta's Blog

.....रावण सी दानवी,और कभी राम सी ....

जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,

रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........

तोड़ती है एक झटके में कभी सपने सभी

अपने बेगाने होते, बेगाने अपने कभी,

कभी मुख में नीम सी कड़वाहट भर जाती है,

कभी खुद बनती साकी, कभी खुद जाम सी 

जिंदगी को जानिए, शहर, शब शाम सी,

रावण सी दानवी,और कभी राम सी ..........

कई बार जिंदगी मृगतृष्णा शाम ओ शहर,

जेठ की दोपहरी से तपते चारो पहर,

कभी खुद बनके सावन, पींगे बढ़ाती है,

माँ के आँचल में कभी करती आराम…

Continue

Posted on February 2, 2016 at 3:00pm — 4 Comments

हक मांगे गर ये पीट पीट लाओ जी,

बिजली पानी के नाम लूटना ना छोड़िये,

डाकू हैं बेशक, दुशाला राम नाम ओडीए,

हमारे हाथ मरने को जनता लाचार है,

फ़िक्र काहे की तुम्हे मनमोहन सरदार है..........

दोनों हाथ लूट चाहे चार हाथ लूटिये, 

विरोध गर करे कोई ठोकिये और पीटिए,

लूटना ना छोड़ तुझे काहे का डर यार है,

इस हमाम नंगी सारी सरकार है..............

घोटाले कितने दिन याद रख पाएंगे,

भुल्लकड़ लोग ये सब भूल जायेंगे,

महंगाई का दंश इन्हें दो बारम्बार…

Continue

Posted on October 13, 2012 at 10:23am — 4 Comments

...कुली कैसे शहंशाह बने हम्माली में...

जनता को भी याद नही घोटाले कितने हुए,
कितने मुंह काले हुए कोयले की दलाली में...........
पचास लाख क्यूँकर पाँच सौ करोड़ बने,
कुली कैसे शहंशाह बने हम्माली में.............
विकलांगों का पैसा किस किस की जेब गया, 
रातों रात महल कैसे बने जगह खाली में.............
टू जी और थ्री जी का दौर कब गुजर गया,
सागर समाया क्यूँकर चाय की प्याली में...............
हर दिन इनका ईद, रात हर दिवाली,
दीवाला जनता का,…
Continue

Posted on October 13, 2012 at 9:07am — 4 Comments

भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी

वन्दे मातरम दोस्तों,



आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें



आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,

नाग वहशत के जलाओ…

Continue

Posted on August 20, 2012 at 11:30am

Comment Wall (15 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:16pm on October 2, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:16pm on September 7, 2011, mohinichordia said…

 आपकी कविताओं में देशभक्ति  का जज्बा हे  

At 6:51pm on February 16, 2011, ratnesh said…

prabhu ji rachna aap ki hain mia to aap ki rachchna ko apne paper main ek stahan de kar aapne aap ko danya  samjhunga 

aap ek bar hamara news paper jaroor dekh lan  jiska link mai aapko de raha hoon

www.hamarametro.com 

At 12:59am on February 8, 2011, प्रमोद वाजपेयी said…
स्वागत है आपका राकेशजी ....
At 10:06pm on December 17, 2010, Nemichand Puniya said…

sir, I am much obelijed to u . many thanks

At 11:24pm on December 9, 2010, Lata R.Ojha said…
धन्यवाद राकेश जी :)
At 8:16pm on October 30, 2010, Admin said…
राकेश जी, एडमिन टीम का सदैव यह प्रयास रहता है कि हम आप सबको शिकायत का मौका ना दे | आप से निवेदन है कि आप इन सब बातों को ध्यान मे ना ले, आइये हम सब मिलकर साहित्य और ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार दोनों को समृद्ध करे |
At 8:16pm on October 30, 2010, Admin said…
आदरणीय राकेश जी,
सादर अभिवादन,
मैं आप के सभी प्रश्नों का उत्तर सिलसिलेवार दे रहा हूँ ................
आप ने कहा कि "एक फनकार के लिए उसकी कला को मिली प्रशंसा उसका सम्मान सबसे बड़ी पूँजी होती है"
राकेश जी सोलह आने सत्य, OBO एक परिवार है और परिवार के मंच पर आये सभी कृतियों पर प्रसंशा अथवा आलोचना परिवार के सदस्यों को ही करनी है, परिवार के बाहर के लोग आपकी कृतियों को पढ़ तो सकते है पर टिप्पणी नहीं दे सकते, अतः हम सबकी यह अपेक्षा रहती है कि सभी सदस्य एक दुसरे की रचनाओं पर अवश्य टिप्पणी दे, ताकि OBO का उद्देश्य पूरा हो |
आपने कहा "आपके मंच पर मुझे लगता है की केवल चंद लोगों को ही आपके द्वारा फीचर होने का अधिकार दिया गया है, या फिर ये है की अन्य रचनाये निम्न कोटि की हैं जो उन्हें फीचर नही किया जाता है"
राकेश जी ऐसी बात नहीं है, सबसे पहले तो मैं यह बता दूँ कि OBO मेरा मंच नहीं है बल्कि यह हम सबका है, मैं भी केवल सेवा भाव से ही OBO से जुड़ा हूँ , OBO एक नॉन प्रोफिट साईट है, उल्टे इसके संचालन मे प्रति महीने US डोलर मे भुगतान करना होता है, अतः हम सब को सेवा भाव से ही OBO को प्रगति पथ पर चलते देना है, जिसमे आपकी भी सहयोग कि जरूरत है |
OBO पर किसी को विशेष की दर्जा नहीं मिला हुआ है, सभी की रचनाओं को एक समान रूप से देखा जाता है, किसी रचना को फीचर करने का अधिकार OBO के प्रधान संपादक को है जो अपने विवेक के अनुसार समय समय पर करते है | आप की पहले आई रचना को भी फीचर किया जा चूका है |
आपने कहा "यदि मैं एक निम्न कोटि का रचनाकार हूँ तो सम्भवत इतने उत्क्रष्ट ग्रुप मैं बने रहने का मुझे कोई अधिकार नही है, या फिर आपको चाहिए की आप मुझे बताये की मेरी रचनाये मोलिक नही है, चोरी की है या फिर फीचर होने लायक क्यों नही हैं ?"
OBO साहित्यकारों का एक साझा मंच है जो सभी के लिये ओपन है, OBO परिवार के सभी साहित्यकार हमारे नजर मे उत्क्रष्ट ही है, OBO को आज यदि आप सब उत्क्रष्ट मानते है तो इसे उत्क्रष्ट आप के द्वारा बनाया गया है | जो रचनायें फीचर नहीं होती उसका यह अर्थ नहीं है कि वो मौलिक नहीं है, चोरी की है | किन्तु हम सभी रचनाओं को फीचर तो नहीं कर सकते ना |
At 10:20pm on October 25, 2010, कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said…
HELLO..RAKESH JI SWAGAT HAI...
At 3:39pm on October 21, 2010, Admin said…
आदरणीय राकेश जी,
सादर अभिवादन,
कोई भी ब्लॉग अनुमोदन तथा feature होने के उपरांत मुख्य पृष्ठ पर आता है, अनुमोदन और feature करने का विशेषाधिकार ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रधान संपादक के पास सुरक्षित है |
अधिक जानकारी नीचे दिये लिंक पर भी देखी जा सकती है ........
http://www.openbooksonline.com/page/notice-1

साथ ही निवेदन है कि यदि ओपन बुक्स ऑनलाइन के प्रगति के सम्बन्ध मे कोई सुझाव हो तो अवश्य दीजियेगा |
धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to सतविन्द्र कुमार राणा's discussion चन्द बाल कविताएं ( शक्ति छंद) in the group बाल साहित्य
"जीवन शैली में हमारी छोटी-बड़ी  ग़लतियों पर बेहतरीन विचारोत्तेजक, प्रेरक और प्रोत्साहक सृजन के…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s discussion कोयल (बाल कविता) in the group बाल साहित्य
"बहुत बढ़िया शैली में रोचक और गुनगुनाने योग्य ताटंक छंदों के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s discussion बाल प्रार्थना (शक्ति छंद) in the group बाल साहित्य
"बेहतरीन प्रेरक और प्रोत्साहक प्रार्थना सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s discussion गौरैया (विश्व गौरेया दिवस पर बाल कविता) in the group बाल साहित्य
"बच्चों की प्रिय चिरैया पर बढ़िया रोचक और गेय कविता के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Shyam Narain Verma's discussion तब ही मंज़िल पाओगे | in the group बाल साहित्य
"ग्रीष्मावकाश के दौरान बढ़िया प्रेरणा देती प्रोत्साहक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद…"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"प्रिय कल्पना भट्ट जी आपका तहे दिल से शुक्रिया "
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"मोहतरम जनाब तस्दीक जी आपकी दाद और इस्स्लाह का तहे दिल से स्वागत है मूल पोस्ट में सुधार कर चुकी हूँ…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"आद० नरेन्द्र सिंह जी आपका तहे दिल से शुक्रिया "
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"आद० राज लाली बटाला जी ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाज़ी का बेहद शुक्रिया "
4 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s blog post ग़ज़ल : नौकरी है कहाँ बता भाई. (२१२२ १२१२ २२)
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय | "
6 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post नंगापन (लघुकथा)
"शीर्षक पर विचार करियेगा आदरणीय शहजाद जी | कुछेक शब्दों को भी देख लें | सादर|"
6 hours ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आऊं तो निशानी देखना
"सुंदर ग़ज़ल हुई है आदरणीय  नवीन मणि त्रिपाठी जी| हार्दिक बधाई|"
6 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service