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somesh kumar
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somesh kumar's Page

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Mohammed Arif commented on somesh kumar's blog post खोयी कहानी
"सोमेश जी आदाब,             अतीत स्मृतियों की डायरी को टटोलने की तलाश करती लाजवाब रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 22
somesh kumar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - ढूँढ रहा हूँ
"सारा जीवन बीत चला है, अमृत का घट रीत चला है   लेकिन मैं तो वही पुराने, स्वप्न सलौने ढूँढ रहा हूँ  Hr koi miss kr rha hai vo bita smay"
Jul 18
somesh kumar commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post मेरे प्यार!
"जो अबतक पढ़ा था-उस दर्द को आज पहचाना,बड़ा मुश्किल होता है-अंदर-अंदर घुटना, बाहर मुस्कुराना,पर हम इसलिए नहीं पिते आँसू-कि दुनिया के सामने रोने में शर्म आती है,बस कोई प्यार को मज़ाक़ बना देता जब,कशम से बर्दाश्त नहीं होता। Sari kavita ka bhav in…"
Jul 18
somesh kumar posted a blog post

खोयी कहानी

कई दिनों से तलाश रहा हूँएक भूली हुई डायरीकुछ कहानियाँजो स्मृतियों में धुंधली हो गई हैं |कई सीढ़ियाँ चढ़ने के बादमुड़ कर देखता हूँकदमों के निशानजो ढूढें से भी नहीं मिलते हैं |कामयाबी के बाद बाँटना चाहता हूँहताशा और निराशाके वो किस्सेजो रहे हैं मेरी जिंदगी के हिस्से |पर उसे सुनने का वक्तकिसी पे नहीं हैऔर ये सही है कीनाकामयाबी सिर्फ अपने हिस्से की चीज़ है |इसलिए अपनी खोई हुई कहानियाँऔर नाकामयाबीहर किसी को अज़ीज़ है |खोयी कहानी का ढांचायूँ तो अब भी याद हैपर उसे फिर लिखने से मन कतरा रहा हैकामयाबी सिर चढ़ी…See More
Jul 18
babitagupta commented on somesh kumar's blog post पेड़ तले पौधा
"अंतिम चार पंक्तियाँ कविता का पूरा निचोड़ प्रस्तुत करती हैं.बेहतरीन रचना प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीयय सोमेश सरजी।"
Jul 17
Sushil Sarna commented on somesh kumar's blog post पेड़ तले पौधा
"वाह सोमेश जी बहुत सुंदर प्रस्तुति। निश्चय ही मौसम बदलने से होगा कुछ अंकुरित पर वो रसाल है मेरी जड़ो में नहीं होगा विस्मृत | अति सुंदर भाव हार्दिक बधाई।"
Jul 17
somesh kumar commented on somesh kumar's blog post पेड़ तले पौधा
"आदरणीय  समर कबीर जी  क्षमाप्रार्थी हूँ की आपके बार-बार आग्रह के बावजूद मंच पर सक्रिय अन्य मित्रों को उनकी रचना पर प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा हूँ |आग्रह है की इस तथ्य को समझें की मंच का हर सदस्य अलग-अलग परिस्थितियों और आयु-वर्ग से सम्बन्ध…"
Jul 17
बसंत कुमार शर्मा commented on somesh kumar's blog post पेड़ तले पौधा
"बहुत सुंदर भाव मन के "
Jul 16
Mohammed Arif commented on somesh kumar's blog post पेड़ तले पौधा
"सोमेश जी आदाब,                 अच्छी कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बात पर ध्यान दें ।"
Jul 16
Samar kabeer commented on somesh kumar's blog post पेड़ तले पौधा
"जनाब सोमेश कुमार जी आदाब, अच्छी कविता हुई है,उस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । एक निवेदन ये है कि मंच पर आपकी सक्रियत अपनी रचना तक ही सीमित है, दूसरे रचनाकार भी आपकी अमूल्य प्रतिक्रया के हक़दार हैं,उन्हें मायूस न करें ।"
Jul 16
somesh kumar posted a blog post

पेड़ तले पौधा

जिंदगी यूँ तो लौट आएगीपटरी परपर याद आएगा सफ़र काहर मोड़कुछ गडमड सड़कों केहिचकोलेकुछ सपाट रस्तों पर बेवजहफिसलनाऔर वक्त-बेवक्त तेरासाथ होना |याद आएगा  एक पेड़घना  छाँवदार  जिसके आसरे एक पौधापेड़ बना |मौसमों की हर तीक्ष्णता कासह वार  पौधे को सदा दियाओट प्यार  |निश्चय ही मौसम बदलने सेहोगा कुछ अंकुरित  पर वो रसाल है मेरी जड़ो मेंनहीं होगा विस्मृत |सोमेश कुमार (मौलिक एवं अमुद्रित )   See More
Jul 16
somesh kumar commented on somesh kumar's blog post दिल का साँचा
"आप सभी अग्रजों के स्नेह एवं स्वीकृत का शुक्रिया |क्षमाप्रार्थी हूँ की पारिवारिक जिम्मेवारियों के चलते लेखन-पठन के लिए बहुत कम समय निकाल पा रहा हूँ |इसलिए बामुश्किल कभी-कभी अपने पुराने लिखे में से छटनी कर मंच पर प्रकाशन हेतू समर्पित करता हूँ | उम्मीद…"
Jul 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on somesh kumar's blog post दिल का साँचा
"आ. सोमेश जी, भावप्रधान रचना के लिए बधाई । भाई समर जी की बात का संज्ञान लें ।"
Jul 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on somesh kumar's blog post दिल का साँचा
"आद0 सोमेश कुमार जी सादर अभिवादन। बढ़िया भाव सम्प्रेषण। बधाई देता हूँ इस प्रस्तुति पर। जनाब समर साहब के बातों का संज्ञान लीजिये। सादर"
Jul 5
Samar kabeer commented on somesh kumar's blog post दिल का साँचा
"जनाब सोमेश कुमार जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें। एक निवेदन है कि मंच पर आई दूसरी रचनाओं पर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया भी दिया करें ।"
Jul 5
Neelam Upadhyaya commented on somesh kumar's blog post दिल का साँचा
""वो आज भी रहता है मेरे आसपास,मेरे बच्चे में मुस्कुरा रहा है |" आदरणीय सोमेश कुमार जी, नमस्कार।  अच्छी रचना की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। "
Jul 5

Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
azamgardh
Profession
teacher and freelance writer
About me
passionate lover of hindi sahitya

Somesh kumar's Blog

खोयी कहानी

कई दिनों से तलाश रहा हूँ

एक भूली हुई डायरी

कुछ कहानियाँ

जो स्मृतियों में धुंधली हो गई हैं |

कई सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद

मुड़ कर देखता हूँ

कदमों के निशान

जो ढूढें से भी नहीं मिलते हैं |

कामयाबी के बाद बाँटना चाहता हूँ

हताशा और निराशा

के वो किस्से

जो रहे हैं मेरी जिंदगी के हिस्से |

पर उसे सुनने का वक्त

किसी पे नहीं है

और ये सही है की

नाकामयाबी सिर्फ अपने हिस्से की चीज़ है…

Continue

Posted on July 17, 2018 at 8:30am — 1 Comment

पेड़ तले पौधा

जिंदगी यूँ तो लौट आएगी

पटरी पर

पर याद आएगा सफ़र का

हर मोड़

कुछ गडमड सड़कों के

हिचकोले

कुछ सपाट रस्तों पर बेवजह

फिसलना

और वक्त-बेवक्त तेरा

साथ होना |

याद आएगा  एक पेड़

घना  छाँवदार  

जिसके आसरे एक पौधा

पेड़ बना |

मौसमों की हर तीक्ष्णता का

सह वार  

पौधे को सदा दिया

ओट प्यार  |

निश्चय ही मौसम बदलने से

होगा कुछ अंकुरित  

पर वो रसाल है मेरी जड़ो…

Continue

Posted on July 16, 2018 at 10:30am — 6 Comments

दिल का साँचा

नींद आँखों से खफा –खफा है /

चली है ठंडी हवा वो याद आ रह है /

लिखा था मौसम किसी कागज़ पे/

टहलती आँख लफ्ज़ फड़फड़ा रहा है /

सिलवटें बिस्तरों पे नहीं सलामत /

दिल का साँचा हुबहू बचा हुआ है/

नक्ल करके नाम तो पा सकता हूँ /

पर मेरा वजूद इसमें क्या है?

वो आज भी रहता है मेरे आसपास /

मेरे बच्चे में मुस्कुरा रहा है |

सोमेश कुमार(मौलिक एवं अमुद्रित…

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Posted on July 5, 2018 at 7:24am — 5 Comments

स्वप्न,यथार्थ और प्रेरणा (कहानी )

पुश्तैनी घर में होने वाले रोज़-रोज़ के झगड़े से तंग आ चुका था और मंशा थी की अपना एक अलग घोसला बनाया जाए |श्री वर्मा जी जो की मेरे शिक्षक,मार्गदर्शक एवं प्रेरणाश्रोत रहे हैं उनसे इस सिलसिले में मिलने पहुँचा |

मिलते ही उन्होंने प्रश्न किया-सबसे पहले यह बताओ की कितनी नकद राशि है और घर लेने की क्या योजना है |

“पैसे तो छह-सात लाख के आसपास हैं बाकि पैसे लोन करा लूँगा |सोच रहा हूँ की कोई जड़ सहित मकान या फ़्लोर मिल जाए |”मैंने हिचकिचाते हुए कहा

“लेकिन या परंतु बाद में ---सबसे पहले…

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Posted on July 2, 2018 at 9:59am — 4 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 11:52pm on January 26, 2015, kanta roy said…
बहुत बहुत आभार सोमेश जी
At 7:42pm on November 18, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…
आ, सोमेश भाई , महीने के सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको बहुत बहुत बधाई ।
At 10:14am on November 16, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है आदरणीय सोमेश जी.

सादर!

At 9:11pm on November 13, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सोमेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:49pm on November 11, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सोमेश जी

आपने  कठिन शब्दो के अर्थ  बताने के लिये कहा है - मेर्री समझ में जो शब्द कुछ कठिन है उनके अर्थ दे रहा हूँ

निर्माल्य - जो फूल देवता पर चढ़ चुका हो या माला से टूट गया हो

अनीह - इच्छारहित

अव्यय - अविनाशी

घट कर्ण -कुंभ कर्ण

रौप्य-- चाँदी 

At 6:12am on November 1, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय सोमेश भाई , आपको इस मंच पर देख कर बहुत खुशी हुई , आप सही जगह आये हैं । लगभग एक मही ने से मंच से जुड नही पाया , तबीयत ठीक हुई तो घर बदलने का भारी काम सामने आ गया , रिटायर्मेंट के बाद बी एस पी का मकान छोडना था , इसी महीने मेरा मकान बन के तैयार हुआ , दीवाली के पहले मकान बदलने का तय हुआ । मकान बदलने  के बाद मेरा ब्राड्बेंड कनेक्शन अभी तक ट्रांसफर नही हुआ है , नेट न होने के कारण भी दूरी बनी रही । अभी भी ब्राडबैंड नही है , एक डोन्गल से काम चला रहा हूँ , जो कल रात एक्टीवेट हुआ है । धीमा ही सही दोंगल लाम कर रहा है । अब रोज मुलाकात होगी यहीं ।

 
 
 

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