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somesh kumar
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Sheikh Shahzad Usmani commented on somesh kumar's blog post ख्याल
"बहुत बढ़िया भावपूर्ण मुक्तक सृजन के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सोमेश कुमार जी।"
9 hours ago
Mohammed Arif commented on somesh kumar's blog post ख्याल
"आदरणीय सोमेश कुमार जी आदाब,                             प्यार के ख़ूबसूरत अहसासों से भरपूर अच्छे मुक्तक और अंतिम रचना में बुढ़ापे को रेखांकित बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार…"
18 hours ago
somesh kumar posted a blog post

ख्याल

यकीनयही सोच कर रुठीं हूँ मना लेगा वोगलतफहमियाँ जो हैं मिटा देगा वोप्यार से खींचकर भींच लेगा मुझेगलतियाँ जो की हैं भुला देगा वो |      पहली गुफ्तगूपहला जाम पी लिया खोलकर ये दिलजाम की आरज़ू है तू रोज़ यूँ ही मिलमझधार में भटकी सफीना दूर है साहिलबन जा पतवार मेरी ले चल मुझे मंजिल           बुढ़ावो जो एक शख्स झुका-झुका सा बैठा हैउसकी  पीठ  पर यह घर टिका  बैठा हैछातियाँ बात-बेबात गुब्बारा हुई जाती हैंहवा के दाब सहता हुआ  फेफड़ा बैठा हैसूख कर वो आँखे अब सहरा हो चली हैं  किसे खबर  है कि उनमें दरिया बैठा…See More
19 hours ago
Harihar Jha commented on somesh kumar's blog post तितली और सफ़ेद गुलाब
"बहुत सुन्दर!"
Monday
somesh kumar commented on somesh kumar's blog post वो छू के गई ऐसे
"रचना पर आने और अपनी अनमोल प्रतिक्रिया देने के लिए सभी मित्रों को साधुवाद l"
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somesh kumar commented on Harihar Jha's blog post सुर्ख़ियों में कहाँ दिखती?
"राजनीति बुद्धिजीवी मिडिया तीनो को अपनी इस व्यंग्य कविता से आप ने धो दिया l"
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somesh kumar commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"यह किसी पीड़ा का दृश्य लगता है क्या इसे दृश्य कविता कह सकते हैं ?"
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somesh kumar commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post इस नशेमन की मोहलत है तबतक...
"ऐसा लगा की रंग-बिरंगे मोतियों को सजाकर एक प्यारी सी माला बना दी हो जब तपे हो आग में तो ये कुंदन बना है एक लव स्टोरी दिमाग में चल रही है अगर आप को आपत्ति न हो तो एकाध शेर वहां प्रयोग करना चाहूंगा"
Monday
somesh kumar commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post बन गया तुम्हारी याद हूँ मैं/ग़ज़ल
"मै पंछी जग के पिंजरे का तू आसमान सा है मुझको, तू अपनी कैद में रख ले अब इस कैद में ही आज़ाद हूँ मै। बहुत उम्दा भाव है अच्छे प्रयास पर बधाई"
Monday
somesh kumar commented on Mohammed Arif's blog post कविता--नए संस्करण
"समय को कितनी सटीकता से पकड़ा है भाई जी आपने"
Monday
somesh kumar posted a blog post

तितली और सफ़ेद गुलाब

“भाई अरविन्द ,कब तक ताड़ते रहोगे ,अब छोड़ भी दो बेचारी नाजुक कलियाँ हैं |”“मैंsए ,नहीं तो -----“वो ऐसे सकपकाया जैसे कोई दिलेर चोर रंगे हाथों पकड़ा जाए और सीना ठोक कर कहे –मैं चोर नहीं हूँ |“अच्छा तो फिर रोज़ होस्टल की इसी खिड़की पर क्यों बैठते हो  ?”“यहाँ से सारा हाट दिखता है |”“हाट दिखता है या सामने रेलवे-क्वार्टर की वो दोनों लडकियाँ --–““कौन दोनों !किसकी बात कर रहे हो !देखों मैं शादी-शुदा हूँ ---और तुम मुझसे ऐसी बात कर रहे हो –“ उसने बीड़ी को झट से फैंका और पैरों के नीचे मसल के फटाफट कमरे में आकर…See More
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on somesh kumar's blog post वो छू के गई ऐसे
"अच्छी रचना है सोमेश जी..बधाई"
Feb 11
SALIM RAZA REWA commented on somesh kumar's blog post वो छू के गई ऐसे
"सोमेश जी गीत बहुत अच्छा बधाई, .... गीत के रदीफ़ का तुकांत हर आख़िरी बंद मे आना चाहिए जो नहीं है.. बहती है पवन जैसे आपकी तुकान्त है तो हर बंद के अखिर में जैसे. तैसे. कैसे.. आदि आना था...सादर"
Feb 9
Rakshita Singh commented on somesh kumar's blog post वो छू के गई ऐसे
"आदरणीय सोमेश जी, सुन्दर रचना । बहुत बहुत बधाई।"
Feb 8
somesh kumar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आज मौसम बड़ा आशिकाना रहा
"बहुत खूब "
Feb 8
somesh kumar commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post स्वप्न का जो नाभिकी ये संलयन प्रारम्भ है----ग़ज़ल
"इस जगत को श्रेष्ठतम रचना समर्पित कर सकूँ प्रति निशा मसि शब्द निद्रा का हवन प्रारम्भ है  यह कवि की नियति है यही उसकी तपस्या है ,वो रात भर जागकर अपनी नींद को हवन करके बेहतर शब्दों से भावनाएं रचता है, बधाई पंकज भाई"
Feb 8

Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
azamgardh
Profession
teacher and freelance writer
About me
passionate lover of hindi sahitya

Somesh kumar's Blog

ख्याल

यकीन

यही सोच कर रुठीं हूँ मना लेगा वो

गलतफहमियाँ जो हैं मिटा देगा वो

प्यार से खींचकर भींच लेगा मुझे

गलतियाँ जो की हैं भुला देगा वो |

 

     पहली गुफ्तगू

पहला जाम पी लिया खोलकर ये दिल

जाम की आरज़ू है तू रोज़ यूँ ही मिल

मझधार में भटकी सफीना दूर है साहिल

बन जा पतवार मेरी ले चल मुझे मंजिल

 

 

         बुढ़ा

वो जो एक शख्स झुका-झुका सा बैठा है

उसकी  पीठ  पर यह घर टिका  बैठा है

छातियाँ…

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Posted on February 16, 2018 at 11:31pm — 2 Comments

तितली और सफ़ेद गुलाब

“भाई अरविन्द ,कब तक ताड़ते रहोगे ,अब छोड़ भी दो बेचारी नाजुक कलियाँ हैं |”

“मैंsए ,नहीं तो -----“

वो ऐसे सकपकाया जैसे कोई दिलेर चोर रंगे हाथों पकड़ा जाए और सीना ठोक कर कहे –मैं चोर नहीं हूँ |

“अच्छा तो फिर रोज़ होस्टल की इसी खिड़की पर क्यों बैठते हो  ?”

“यहाँ से सारा हाट दिखता है |”

“हाट दिखता है या सामने रेलवे-क्वार्टर की वो दोनों लडकियाँ --–“

“कौन दोनों !किसकी बात कर रहे हो !देखों मैं शादी-शुदा हूँ ---और तुम मुझसे ऐसी बात कर रहे हो –“ उसने बीड़ी को झट से…

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Posted on February 11, 2018 at 7:30am — 1 Comment

वो छू के गई ऐसे

हौले से हिला कर के

नींद से जगा कर के

बहती है पवन जैसे

वो छू के गई ऐसे |

प्यारी सी एक लड़की

थी सांवले कलर की

एक ख़्वाब जगा करके

मुझे अपना बता कर के

वो छू के गई ऐसे-----

रात भर मुझे जगाना

बिन बात मुस्कुराना

सिर मेरा ही खाना

कहने पे रूठ जाना

वो छू के गई ऐसे----

दुनियाँ भली लगी थी

वो जब मुझे मिली थी

शायद थी भागवत वो

था मुझको गुनगुनाना |

वो छू के गई…

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Posted on February 8, 2018 at 9:30am — 4 Comments

पुआल बनती ज़िन्दगी(कहानी )

पुआल बनती ज़िन्दगी

 

जब मैं गाँव से निकला तो वह पुआल जला रही थी | ठीक उसी तरह जिस तरह वह पहले दिन जला रही थी,जब मैंने उसे इस बार,पहली बार देखा था | ना तो मैं उससे तब मिला था ना आज जाते हुए | पर मैं संतुष्ट था |मेरी अभिलाषा काफ़ी हद तक तृप्त थी |मेरे पास एक उद्देश्य था और एक जीवित कहानी थी |

 पहली बार जब मैं स्टेशन के लिए निकला तभी पत्नी ने फोन करके कहा की गाड़ी का समय आगे बढ़ गया है और जैसे ही मैं गाँव में लौटा मैंने खुशी मैं शोर मचाया और वह भी चिड़ियों की…

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Posted on January 15, 2018 at 8:29pm

Comment Wall (6 comments)

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At 11:52pm on January 26, 2015, kanta roy said…
बहुत बहुत आभार सोमेश जी
At 7:42pm on November 18, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…
आ, सोमेश भाई , महीने के सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको बहुत बहुत बधाई ।
At 10:14am on November 16, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है आदरणीय सोमेश जी.

सादर!

At 9:11pm on November 13, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सोमेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:49pm on November 11, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सोमेश जी

आपने  कठिन शब्दो के अर्थ  बताने के लिये कहा है - मेर्री समझ में जो शब्द कुछ कठिन है उनके अर्थ दे रहा हूँ

निर्माल्य - जो फूल देवता पर चढ़ चुका हो या माला से टूट गया हो

अनीह - इच्छारहित

अव्यय - अविनाशी

घट कर्ण -कुंभ कर्ण

रौप्य-- चाँदी 

At 6:12am on November 1, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय सोमेश भाई , आपको इस मंच पर देख कर बहुत खुशी हुई , आप सही जगह आये हैं । लगभग एक मही ने से मंच से जुड नही पाया , तबीयत ठीक हुई तो घर बदलने का भारी काम सामने आ गया , रिटायर्मेंट के बाद बी एस पी का मकान छोडना था , इसी महीने मेरा मकान बन के तैयार हुआ , दीवाली के पहले मकान बदलने का तय हुआ । मकान बदलने  के बाद मेरा ब्राड्बेंड कनेक्शन अभी तक ट्रांसफर नही हुआ है , नेट न होने के कारण भी दूरी बनी रही । अभी भी ब्राडबैंड नही है , एक डोन्गल से काम चला रहा हूँ , जो कल रात एक्टीवेट हुआ है । धीमा ही सही दोंगल लाम कर रहा है । अब रोज मुलाकात होगी यहीं ।

 
 
 

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