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somesh kumar
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रातरानी और भौरा(कहानी )

 “ रात महके तेरे तस्सवुर में दीद हो जाए तो फिर सहर महके ““अमित अब बंद भी करो !बोर नहीं होते |कितनी बार सुनोगे वही गजल |” सुनिधि ने चिढ़ते हुए कहाप्रतिक्रिया में अमित ने ईयरफोन लगाया और आँखें बंद कर लीं |कुछ देर बाद सुनिधि ने करवट बदली और अपना हाथ अमित की छाती पर रख दिया |पर अमित अपने ही अहसासों में खोया रहा और उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी |“ऐसा लगता है तुम मुझे प्यार नहीं करते |” सुनिधि ने हाथ हटाते हुए कहा पर अमित अभी भी अपने ख्यालों में खोया रहा |प्ले लिस्ट अपने आप रिस्फ्ल हुई तो –“आओगे जब तुम…See More
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इश्क ने हाल पूछा

रात भर महकती रही यादेंलुत्फ़ आया बहुत जुदाई काविरह से उठा रोग दबा हुआपता लेता हूँ अब दवाई का | सिक्के जेब को काटने लगेखर्च ने हाल पूछा कमाई कानमक-मिर्च से मुँह जलाकरपूछा भाव फिर से मिठाई का | हर रात सिराहन से शिकायतेंढिंढोरा कब तलक ढिठाई काहथेलियाँ-हथेलियों के लिए तड़पीइश्क ने हाल पूछा रुसवाई का  | सोमेश कुमार(मौलिक एवं अमुद्रित )  See More
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somesh kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जलने लगे जो ख्व़ाब सब नैन धुआँ धुआँ रहे
"तन्हा तुम्हारे दर्द को रहने नहीं दिया कभी   दर्द जहाँ जहाँ रहा हम भी वहाँ वहाँ रहे.  अच्छी गजल है ऊपर वाला शे र खास पसंद आया | रचना पर बधाई |"
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"है रंग बदलने में माहिर, हर शख़्स सियासत के अंदर कुछ भी कहे वो लेकिन मतलब, कुछ और निकलकर आता है   सियासत का यह शे र बेहद पसन्द आया |सारी गजल ही व्यंग्य से भरी हुई है |इस रचना पर दिली बधाई |"
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somesh kumar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post ख़ामोशी की ज़ुबान (लघुकथा)
"अच्छी लघुकथा है |कुछ टंक-त्रुटियाँ  हैं उन्हें सही कर लें | शायद जेठानी की आत्मस्तुति के तुरंत बाद पुलिस का आगमन एवं उससे जेठ की मंशा का राज खोलकर लघुकथा को और प्रभावी बनाया जा सकता था |और शायद इसमें" वह जो आज तक भीगी बिल्ली थी अब…"
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somesh kumar commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--अपील
"लघुकथा अच्छी है पर शायद इसी प्रकार की लघुकथा पहले कभी पढ़ी थी |खैर ! समान विषय पर कई सारी रचनाएँ सम्भव हैं ,मुख्य वस्तु है रचना का संदेश और प्रस्तुतिकरण |स्वयम दिल्ली के रामलीला मैदान  में मोदी जी के किसी भाषण के बाद ऐसे ही खबर आई थी | पिछले…"
Mar 25

Profile Information

Gender
Male
City State
delhi
Native Place
azamgardh
Profession
teacher and freelance writer
About me
passionate lover of hindi sahitya

Somesh kumar's Blog

रातरानी और भौरा(कहानी )

 “ रात महके तेरे तस्सवुर में

 दीद हो जाए तो फिर सहर महके “

“अमित अब बंद भी करो !बोर नहीं होते |कितनी बार सुनोगे वही गजल |” सुनिधि ने चिढ़ते हुए कहा

प्रतिक्रिया में अमित ने ईयरफोन लगाया और आँखें बंद कर लीं |

कुछ देर बाद सुनिधि ने करवट बदली और अपना हाथ अमित की छाती पर रख दिया |पर अमित अपने ही अहसासों में खोया रहा और उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी |

“ऐसा लगता है तुम मुझे प्यार नहीं करते |” सुनिधि ने हाथ हटाते हुए कहा पर अमित अभी भी अपने ख्यालों में खोया…

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Posted on March 30, 2018 at 12:00am — 2 Comments

इश्क ने हाल पूछा

रात भर महकती रही यादें

लुत्फ़ आया बहुत जुदाई का

विरह से उठा रोग दबा हुआ

पता लेता हूँ अब दवाई का |

 

सिक्के जेब को काटने लगे

खर्च ने हाल पूछा कमाई का

नमक-मिर्च से मुँह जलाकर

पूछा भाव फिर से मिठाई का |

 

हर रात सिराहन से शिकायतें

ढिंढोरा कब तलक ढिठाई का

हथेलियाँ-हथेलियों के लिए तड़पी

इश्क ने हाल पूछा रुसवाई का  |

 

सोमेश कुमार(मौलिक एवं अमुद्रित )

 

 

Posted on March 25, 2018 at 2:30pm

शुतरमुर्ग(लघुकथा )

तीसरे माले पर वो करवट बदलते हैं तो खटिया चर्र-चर्र बोलती है |अंगोछा उठाकर पहले पसीना पोंछते है फिर उस से हवा करने लगते हैं |

“साsला पंखा भी ---“ बड़बड़ा कर बैठ जाते हैं और एक साँस में बोतल का शेष पानी गटक जाते हैं

“अब क्या ? अभी तो पूरी रात है |”

भिनभिनाते मच्छर को तड़ाक से मसल देते हैं |

दूसरे माले का टी.वी. सुनाई देता है – “तू मेरा मैं तेरी जाने सारा हिंदुस्तान |”

“बुढ़िया को क्या पड़ी थी पहले जाने की ---“

गला फिर सूखने लगा तो जोर–जोर से खाँसना…

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Posted on March 20, 2018 at 8:00pm — 9 Comments

घुटनें एवं छड़ी(कहानी )

रामदीन |” अख़बार एक तरफ रखते हुए और चाय का घूंट भरते  हुए पासवान बाबू ने आवाज़ लगाई

“जी बाबू जी |”

“मन बहुत भारी हो रहा है |दीपावली गुजरे भी छह महीने हो गए | सोचता हूँ दोनों बेटे बहुओं से मिल लिया जाए|---- ज़िन्दगी का क्या भरोसा !”

“ऐसा क्यों कहते हैं बाबूजी !हम तो रोज़ रामजी से यही प्रार्थना करते हैं की बाबूजी को लंबा और सुखी जीवन दे |”

“ये दुआ नहीं मुसीबत है |बुढ़ापा ---अकेलापन----तेरे माई जिंदा थी तब अलग बात थी पर अब ---“ वो गहरी साँस भरते हुए कहते हैं

“हम क्या…

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Posted on March 18, 2018 at 11:00pm — 8 Comments

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At 11:52pm on January 26, 2015, kanta roy said…
बहुत बहुत आभार सोमेश जी
At 7:42pm on November 18, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…
आ, सोमेश भाई , महीने के सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको बहुत बहुत बधाई ।
At 10:14am on November 16, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है आदरणीय सोमेश जी.

सादर!

At 9:11pm on November 13, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सोमेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:49pm on November 11, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सोमेश जी

आपने  कठिन शब्दो के अर्थ  बताने के लिये कहा है - मेर्री समझ में जो शब्द कुछ कठिन है उनके अर्थ दे रहा हूँ

निर्माल्य - जो फूल देवता पर चढ़ चुका हो या माला से टूट गया हो

अनीह - इच्छारहित

अव्यय - अविनाशी

घट कर्ण -कुंभ कर्ण

रौप्य-- चाँदी 

At 6:12am on November 1, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय सोमेश भाई , आपको इस मंच पर देख कर बहुत खुशी हुई , आप सही जगह आये हैं । लगभग एक मही ने से मंच से जुड नही पाया , तबीयत ठीक हुई तो घर बदलने का भारी काम सामने आ गया , रिटायर्मेंट के बाद बी एस पी का मकान छोडना था , इसी महीने मेरा मकान बन के तैयार हुआ , दीवाली के पहले मकान बदलने का तय हुआ । मकान बदलने  के बाद मेरा ब्राड्बेंड कनेक्शन अभी तक ट्रांसफर नही हुआ है , नेट न होने के कारण भी दूरी बनी रही । अभी भी ब्राडबैंड नही है , एक डोन्गल से काम चला रहा हूँ , जो कल रात एक्टीवेट हुआ है । धीमा ही सही दोंगल लाम कर रहा है । अब रोज मुलाकात होगी यहीं ।

 
 
 

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