For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Samar kabeer's Blog – June 2015 Archive (5)

एक ग़ज़ल ग़ालिब की ज़मीन में

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन



एक मिसरे में इधर मैंने मेरा दिल बाँधा

दूसरे में तेरे रुख़्सार का ये तिल बाँधा



यूँ लगा जैसे हुवा सारा ज़माना रौशन

मैंने दौरान-ए-ग़ज़ल जब महे कामिल बाँधा



ख़ून आँखों से टपकता है तो हैरत कैसी

तूने क्यूँ कस के बदन से ये सलासिल बाँधा



मुनकशिफ़ हो गया दुनिया पे मेरा फ़न आख़िर

उसने साफ़ा मेरे सर पे सर-ए-महफ़िल बाँधा



उस से अल्फ़ाज़ की कुछ भीक थी दरकार मुझे

इस लिये मैंने मियाँ शैर…

Continue

Added by Samar kabeer on June 17, 2015 at 7:00pm — 31 Comments

ग़ज़ल :- आज जिस रंग में ढालोगे मैं ढल जाऊँगा

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन



आज जिस रंग में ढालोगे मैं ढल जाऊँगा

दैर कर दोगे तो हाथों से निकल जाऊँगा



एक हालत में यहाँ कौन रहा है,मैं भी

जैसे हर चीज़ बदलती है,बदल जाऊँगा



ऐसे ही बनते हैं,दुनिया में मिसाली किरदार

मैं भी फूलों की तरह काँटों में पल जाऊँगा



मोम या बर्फ़ के जैसा नहीं,पर जानता हूँ

मैं तिरे जिस्म की गर्मी से पिघल जाऊँगा



मैं तो इक ख़ाक का पुतला हूँ,तू मिस्ल-ए-ख़ुर्शीद

पास आऊँगा अगर तेरे तो जल… Continue

Added by Samar kabeer on June 14, 2015 at 10:57am — 32 Comments

मुंह देखते हैं मेरा हुनर देखते नहीं

मफ़ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फ़ाइलुन/फ़ाइलान





मुंह देखते हैं मेरा हुनर देखते नहीं

हर दिल पे हो रहा है असर देखते नहीं



दीवाने अपने हाल से रहते हैं बेख़बर

किस सम्त हो रहा है सफ़र देखते नहीं



उर्यानियत के खेल इन्हें भी पसंद हैं

ख़ामोश हैं ये एहल-ए-नज़र देखते नहीं



वो देश हित की फ़िक्र में ग़लताँ हैं आज कल

ये और बात है कि इधर देखते नहीं



अंजान बन के पूछ रहे हो कि क्या हुवा

अख़बार में छपी है ख़बर देखते नहीं



कुछ देर… Continue

Added by Samar kabeer on June 8, 2015 at 11:09am — 36 Comments

ग़ज़ल :- तनाबें सब उखड़ गईं तुम्हारे एतबार की

मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन





तनाबें सब उखड़ गईं तुम्हारे एतबार की

हमें न अब सुनाइये कहानियाँ बहार की



फ़क़ीर की,न शाह की,न जोहरी ,सुनार की

यहाँ पे बात कर रहा हूँ मैं तो सिर्फ़ प्यार की



ज़रा सी देर बाद ये चराग़ बुझ ही जाएगा

हदें तमाम ख़त्म हो रही हैं इन्तिज़ार की



चढ़े दिमाग़ पर तो फिर कभी न वो उतर सके

मुझे तलाश है जनाब-ए-मन उसी ख़ुमार की



नदी किनारे झाड़ियों में छुप के बैठता है वो

सताए उसको भूक जब तलब लगे शिकार… Continue

Added by Samar kabeer on June 3, 2015 at 11:04pm — 25 Comments

कोई सुने तो बयाँ दिल का दर्द करता हूँ

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन



मैं कैसे कर्ब से तकलीफ़ से गुज़रता हूँ

कोई सुने तो बयाँ दिल का दर्द करता हूँ



तमाम टैक्स चुकाता हूँ ज़िंदा रहने के

प शाईरी का अलग से लगान भरता हूँ



यही सबब है ,मुझे कम ही लोग जानते हैं

मैं इन फ़ुज़ूल की रुसवाईयों से डरता हूँ



अज़ल से आज तलक सिलसिला ये जारी है

मैं रोज़ जीता हूँ दुनिया में रोज़ मरता हूँ



यही तो है,मिरे फ़न का कमाल,देखो तो

जहाँ पे मिटते हैं सब लोग,मैं सँवरता हूँ



वो जिस… Continue

Added by Samar kabeer on June 1, 2015 at 11:00am — 29 Comments

Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)

(1212 1122 1212  22 /112 )यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर हैहयात जैसे बशर लग रही सिनाँ पर…See More
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सम्पूर्ण ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार को दसवीं वर्षगाँठ की  हार्दिक शुभकामनाएँ"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"सच बहुत ही मुँह लगा है ओ बी ओ हाँ समर जी का नशा है ओ बी ओ   सच कहा है “देख लो दिल चीर…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओ बी ओ को एक दशक का सफ़र सफलता पूर्वक संपन्न करने के लिए हृदय से बधाई. बधाई प्रबंधक जी को बधाई…"
10 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
11 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"यहाँ सवाल इज़ाफ़त का है,और इज़ाफ़त का नियम ये है कि हिन्दी और अंग्रेज़ी शब्दों में नहीं लगाई जा सकती ।"
13 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"आदरणीय Samar kabeer साहेब , मेरे जिज्ञासा है कि  , व्यक्तिवाचक संज्ञा ,जातिवाचक…"
13 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post आसमाँ .....
"'आँखों की नमीं का'--'नमीं'--"नमी"?"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"वाह आदरणीय समर कबीर साहिब वाह। ... ओ बी ओ की सालगिरह पर इससे अच्छा तुहफ़ा और क्या होगा। इस…"
13 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
""कोविड" शब्द उर्दू का कैसे हुआ?"
14 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'शांत लहरों में भी…"
14 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"आपकी क़ीमती दाद मेरे लिए वाइस-ए-फ़ख्र है मोहतरम Samar kabeer  साहेब | नवाज़िश-ओ-करम का दिल…"
14 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service