For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल ( अंधी गली के मोड़ पर.....)

 (221 2121  1221 212)

अंधी गली के मोड़ पे सूना मकान है

तन्हा-सा आदमी अब इस घर की शान है

हमसे उन्होंने आज तलक कुछ नहीं कहा

हर बार उससे पूछा है जो बेज़बान है

हालात-ए- माज़ूर यक़ीनन हुये बुरे

ऊपर चढ़ाई है वहीं नीचे ढलान है

बदक़िस्मती का ये भी नमूना तो देखिये

गड्ढे नहीं मिले थे जहाँ पर खदान है

मरने के बाद भी तो फ़राग़त नहीं मिली

सारे बदन पे बोझ है मिट्टी लदान है

*मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 77

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सालिक गणवीर on May 25, 2020 at 4:50pm

आदरणीय समर कबीर साहब .

आदाब
ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार.आपके मार्गदर्शन और स्नेह 

की मुझे सख्त ज़रूरत है. आपकी इस्लाह पर तुरंत अमल कर आपको सूचित करता हूँ.ईद की मुबारकबाद कुबूल फरमायें.

Comment by सालिक गणवीर on May 25, 2020 at 4:44pm

आदरणीय भाई डा.छोटे लाल सिंह जी.
ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार.

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 25, 2020 at 9:00am

सारे वदन पर बोझ है मिट्टी लदान हैं, हकीकत को बयां करती बहुत ही दमदार गजल आदरणीय गणवीर साहब बहुत बहुत बधाई

Comment by Samar kabeer on May 25, 2020 at 6:21am

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,देखियेगा ।

'हर बार उनसे पूछा है जो बेज़बान है'

इस मिसरे में 'उनसे' की जगह "उससे" कर लें ,'उनसे' के कारण रदीफ़ 'हैं' हो रही है,ग़ौर करें ।

'माज़ूर की हालत का तमाशा बना दिया

ऊपर चढ़ाई है वहीं नीचे ढलान है'

इस शैर का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है,और शैर का भाव भी स्पष्ट नहीं हुआ,देखियेगा ।

Comment by सालिक गणवीर on May 24, 2020 at 11:38am

आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी

सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए आपका ह्रदय से आभार.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 24, 2020 at 9:00am

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी,  प्रदत्त विषय पर सुंदर सर्जन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
2 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय मनन कुमार जी, प्रदत्त विषय पर अति सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।"
5 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत विषय पर अति सुंदर दोहों के लिए बधाई स्वीकार करें।"
8 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"रोटी पर गज़ल खेल रोटी का निराला है बहुत संसार मेंरोटी सबको चाहिए इस भूख के बाजार में जो कभी झुकता…"
14 minutes ago
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post रोटी
"बहुत बहुत शुक्रिया जी,पहले मुझे पता नहीं था ,जैसे ही पता चला मैंने वहां पोस्ट कर दी,"
15 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आद0 चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन। विषयानुकूल बढ़िया हाइकू और कुण्डलिया सृजित हुए हैं। बधाई स्वीकार…"
24 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको

था सब आँखों में मर्यादा का पानी याद है हमको पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको।भले खपरैल छप्पर…See More
24 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। बढ़िया विषयानुकूल दोहे हुए हैं। बधाई स्वीकार कीजिये"
25 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"धन्यवाद सुरेन्द्र नाथ जी। कर लिया है गौर।"
28 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Neeta Tayal's blog post रोटी
"आद0 नीता त्यागी जी सादर अभिवादन। आपको यह रचना ओ बी ओ के आयोजन में पोस्ट करनी थी,, आपने यहाँ पोस्ट…"
29 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। हिंदी उर्दू शब्दो से मिश्रित शब्दों से उम्दा ग़ज़ल कही है आपने। बधाई…"
31 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post वर्षा के दोहे -१
"आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। बरसात को विषय बनाकर बहुत बेहतरीन दोहे रचे हैं।बधाई स्वीकार कीजिये"
35 minutes ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service