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कवि का काम है।
जो नहीं कहा गया हो,
अब तक जमाने में,
वो कहा जाये।
पिछला कहा हुआ
सच रहे,बचा रहे।
उससे आगे कुछ कहा जाये।।
आदमी बोलता रहे
आदमी चुप न होने पाये।
पानी से पत्थर को काटा जाये।
खुद को बार-बार डाँटा जाये।।
दूसरों से प्यार किया जाये
आदमी को आदमी ही रहने दिया जाये।
आदमी बहुत बेहतर है।
मशीन भी बनाई जाये।
लेकिन ज्यादा न चलाई जाये।
अपनी आँखों में ही,
सबकी आँखों को लाया जाये।


।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।सुजान

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Comment

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Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on September 27, 2012 at 10:41am

फूल सिंह जी..

बहुत सुन्दर आपको बधाई ..........

Comment by सूबे सिंह सुजान on September 26, 2012 at 10:19pm
फूल सिंह जी, हां मैं यही कहना चाह रहा हूँ कि कवि को केवल अच्छा ही कहना चाहिये बुरा नहीं,बुरा तो लोग बहुत कहते हैं समाज में..........लेकिन कवि के लिये तो यह शोभा नहीं देता।
Comment by PHOOL SINGH on September 26, 2012 at 12:11pm

सूबे जी प्रणाम

बहुत ही सुंदर व्याख्यान कवि के स्वरुप का .......

फूल सिंह

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