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फूलों का सफर या

कांटों की कहानी

क्‍या कहूं कैसी है

ये जिंदगानी

कभी तो इसी ने

आंखों से पिलाया

बड़ी बेरूखी से

कभी मुंह फिराया

गम की इबारत या

जलवों की कहानी

क्‍या कहूं कैसी है

ये जिंदगानी

 

कभी सब्‍ज पत्‍तों पर

शबनम की लिखावट

कभी चांदनी में

काजल की मिलावट

 

कभी शोखियों की

गुलाबी शरारत

कभी तल्‍ख तेवर की

चुभती हरारत

 

आंखों से बरसती

लबों की कहानी

क्‍या कहूं कैसी है

ये जिंदगानी

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Comment

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Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on October 1, 2012 at 12:14pm

बहुत सुन्दर मधुर बधाई राजेश झा जी...........!!!

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 30, 2012 at 12:50am

कभी सब्‍ज पत्‍तों पर

शबनम की लिखावट

कभी चांदनी में

काजल की मिलावट

आदरणीय राजेश  जी  ..बहुत सुन्दर शब्द बन्ध  ...सुन्दर कल्पना ....

जय श्री राधे 
अपना स्नेह बनाये रखें 
भ्रमर ५ 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 29, 2012 at 7:35pm

सुन्दर मधुर शब्दों को प्रयुक्त करके लिखी गयी सहज मनोभावों की हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति हेतु बधाई राजेश झा जी 

कृपया ध्यान दे...

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