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"सुनो जी, कल माँ को वृद्धाश्रम से एक दिन की छुट्टी पर ले आना।"
"क्यों, कल ऐसा क्या है?"
"कल मदर्स डे है।"

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Sudhir Dwivedi on May 12, 2015 at 11:33am

गागर में सागर , चरितार्थ करती सफल लघुकथा , बधाई आ. विनोद जी 

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on May 11, 2015 at 5:17pm

आदरणीय विनोद जी मात्र दो पंक्तियों में आज का कटु सत्य दिखा कर जबदस्त चोट करती रचना के लिए बधाई स्वीकार करे.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 10, 2015 at 10:12pm
बेहतरीन और सफल लघुकथा।
बहुत बहुत बधाई
Comment by Jitendra Upadhyay on May 10, 2015 at 5:04pm

badhai ! marmik kahani ke liye

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 10, 2015 at 2:54pm

दो पंक्तियों में ही सब कुछ कह  दिया | बहुत  बहुत  बधाई 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 10, 2015 at 11:49am

मात्र दो पंक्तियों में ही कमाल का पंच. बधाई आदरणीय विनोद जी

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