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गीत - तुझे देखूँ यहाँ वहाँ

संदेसा तेरे दिल का , धड़कने है लातीं,

सवार तेरे धुन मे, खुद को कहाँ रोक पाते,
बस मुस्कुरकर तू देख लेती ज़रा,
दिल क्या, जान भी तेरे हो जाते,
तुझे देखूँ यहाँ वहाँ, ढूँढूँ मैं सारा जहाँ, 
बाहों से लगा लूँ तुझे, दिल मे बसा लूँ तुझे....(2)

तेरे कदमों के निशान, हर जगह ढूंढा करता हूँ,

मिल जाए वो धूल तो, उन्हे समेट लिया करता हूँ,
भले ही भूल जाऊं खुदा को,
पर तेरी बातें हर पल याद किया करता हूँ ,
तुझे देखूँ यहाँ वहाँ, ढूँढूँ मैं सारा जहाँ, 
बाहों से लगा लूँ तुझे, दिल मे बसा लूँ तुझे....(2)

 

फूलों का गुरूर, तेरी एक हँसी ने तोड़ दिया, 
खुश्बू ने तेरी, हवाओं का रुख़ मोड़ दिया,
तेरी अदाओं की नज़ाकत ने,
टूटे दिल को भी जोड़ दिया,
तुझे देखूँ यहाँ वहाँ, ढूँढूँ मैं सारा जहाँ, 
बाहों से लगा लूँ तुझे, दिल मे बसा लूँ तुझे....(2)

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by M Vijish kumar on October 13, 2017 at 10:07pm

आदरणीय KALPANA BHATT ('रौनक़') जी आपका ह्रदय  से धन्यवाद

Comment by M Vijish kumar on October 13, 2017 at 10:06pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी आपका ह्रदय  से धन्यवाद

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 11, 2017 at 5:42pm

अच्छा प्रयास आद ० एम् विजेश जी | बधाई आपको 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 9, 2017 at 4:35am
आद0 एम विजिश कुमार जी सादर अभिवादन, अच्छा गीत लिखा आपने, दिल खोल कर बधाई लीजिये। सादर
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 9, 2017 at 4:34am
आद0 एम विजिश कुमार जी सादर अभिवादन, अच्छा गीत लिखा आपने, दिल खोल कर बधाई लीजिये। सादर
Comment by M Vijish kumar on October 8, 2017 at 6:33pm

आदरणीय  Samar kabeer जी आपका ह्रदय  से धन्यवाद

Comment by Samar kabeer on October 8, 2017 at 6:02pm
जनाब विजिश कुमार जी आदाब,गीत का अच्छा प्रयास है,मार्गदर्शन के लिए गुणीजनों की प्रतीक्षा करें,इस प्रस्तुति पर बधाई ।

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