For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...

३००वीं कृति .... श्रृंगार दोहे ...

मन चाहे करती रहूँ , दर्पण में शृंगार।
जब से अधरों को मिला, अधरों का उपहार।1।

अब सावन बैरी लगे, बैरी सब संसार।
जब से कोई रख गया, अधरों पे अंगार।2।

नैंनों की होने लगी , नैनों से ही रार।
नैन द्वन्द में नैन ही, गए नैन से हार।3।

जीत न चाहूँ प्रीत में , मैं बस चाहूँ हार।
'दे दे मेरी देह को', स्पर्शों का शृंगार।4।

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 63

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mohammed Arif on November 15, 2017 at 10:57am
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,सुंदर प्रेम की अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 14, 2017 at 7:08pm
आद सुशील सरना साहब ,
खुबसूरत , दोहे के लिए मुबारकवाद स्वीकार करें |
नैंनों की होने लगी , नैनों से ही रार।
नैन द्वन्द में नैन ही, गए नैन से हार।3। वाह
Comment by Sushil Sarna on November 14, 2017 at 11:48am
आदरणीय Kalipad Prasad Mandal साहिब, सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का दिल से आभारी है।"
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 14, 2017 at 7:57am

आद सुशील सरना साहब , खुबसूरत ,श्रृंगार रस से ओतप्रोत दोहे के लिए मुबारकवाद स्वीकार करें |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

पंकजोम " प्रेम " commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"वाह जनाब उम्दा ग़ज़ल हुई है ........ वाह वाह बहुत ख़ूब"
2 minutes ago
पंकजोम " प्रेम " posted a blog post

" शायरी "

वजन - 212 212 212 212..... " शायरी " .........मेरे रुख़ की हँसी कौन है , शायरी .....मेरी जां जिंदगी…See More
3 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"आदरणीय शुक्ला जी आपका कोटिशः आभार।"
4 minutes ago
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी ....."
5 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"आदरणीय मोहित मिश्रा जी आभार स्वीकार करें।"
5 minutes ago
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"बहुत बहुत शुक्रिया आ0 दादा आशुतोष जी ...आ0 दादा रामानुज जी .... आ0 दादा मुहम्मद आरिफ जी ...."
6 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"आदरणीय बृजेश जी सादर आभार।"
6 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"आदरणीय कुशक्षत्रप जी सादर आभार स्वीकार करें। सतत मार्गदर्शन की अपेक्षा करता हूँ।"
7 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post खामोश आखें
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी कोटिशः धन्यवाद, अप्रकाशित रचना पहले से थी, इसीलिए प्रेषित कर दिया।"
15 minutes ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post खामोश आखें
"आदरणीय समर कबीर जी, सादर धन्यवाद स्वीकार करियेगा। आपका स्नेह बना रहे"
19 minutes ago
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'
"बहुत ही ख़ूबसूरत  ग़ज़ल ... बधाई,"
51 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on rajesh kumari's blog post आइना जब क़ुबूल कहता है (ग़ज़ल 'राज')
"मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
52 minutes ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service