For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खामोश आखें

होली आयी और चली गयी,
पिछले साल से भली गयी,
पर किसी ने देखा!
किसका क्या जला?
मैंने देखा,
’उसकी डूबती खामोश आॅंखें’
और भीगी पलकों को,
और वह खड़ा,
एकटक देख रहा था,
’होली को जलते’
जैसे उसे मालूम न हो,
अपनी ‘आॅंखों ’ के कारनामे

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 58

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manoj kumar shrivastava on November 22, 2017 at 8:01am

उत्साह वर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार आदरणीय शेख अहमद जी

Comment by Manoj kumar shrivastava on November 21, 2017 at 7:04pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी कोटिशः धन्यवाद, अप्रकाशित रचना पहले से थी, इसीलिए प्रेषित कर दिया।
Comment by Manoj kumar shrivastava on November 21, 2017 at 7:01pm
आदरणीय समर कबीर जी, सादर धन्यवाद स्वीकार करियेगा। आपका स्नेह बना रहे
Comment by Samar kabeer on November 21, 2017 at 2:49pm
जनाब मनोज कुमार श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी कविता है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
'एक टक' को "एक टुक" कर लें ।
Comment by Mohammed Arif on November 21, 2017 at 12:31pm
आदरणीय मनोज कुमार जी आदाब,
अच्छी अभिव्यक्ति मगर सामयिक कविता नहीं है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार posted a blog post

पिंजरा--लघुकथा

जैसे ही आशिया घर में घुसी उसे चिड़ियों के चहचहाने की आवाज़ आयी. चारो तरफ देखते हुए उसकी नज़र किनारे…See More
12 minutes ago
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 विजय निकोर जी, हृदय से धन्यवाद"
44 minutes ago
डॉ पवन मिश्र commented on डॉ पवन मिश्र's blog post नवगीत- लुटने को है लाज द्रौपदी चिल्लाती है
"आद0 रामबली गुप्त जी, हार्दिक आभार"
45 minutes ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar shrivastava's blog post निःशब्द देशभक्त
"जनाब मनोज कुमार जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post कुंडलियाँ-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,सुंदर कुण्डलिया छन्द के लिए बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -गीत कुछ वस्ल और अलगाओं की’ भी गानी मुझे-कालीपद 'प्रसाद'
"जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,कई अशआर में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग का…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on somesh kumar's blog post नंगे सच का द्वंद
"जनाब सोमेश जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post कुण्डलिया
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,बहुत बढ़िया कुण्डलिया छन्द हुए,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लोग तन्हाई में जब आपको पाते होंगे
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'लौट आएगी सबा कोई…"
1 hour ago
Neelam Upadhyaya posted a blog post

हाइकु

ठिठुरी अम्मा धूप तो लाजवंती दुपहरी में । कच्ची सी उम्र नौकरी खँगालता खाली है झोली मान न मान जिंदगी…See More
1 hour ago
vijay nikore commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post बदला परिवेश
"बहुत ही खूबसूरत लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय  डॉ.आशुतोष मिश्रा जी"
1 hour ago
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post रजिस्ट्री
"  अदरणीय समर कबीर जी लघु कथा पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।"
2 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service