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लोग तन्हाई में जब आपको पाते होंगे

2122 1122 1122 22
लोग तन्हाई में जब आप को पाते होंगे।
मेरा मुद्दा भी सलीके से उठाते होंगे ।।

लौट आएगी सबा कोई बहाना लेकर ।
ख्वाहिशें ले के सभी रात बिताते होंगे ।।

सर फ़रोसी की तमन्ना का जुनूं है सर पर ।
देख मक़तल में नए लोग भी आते होंगे ।।

सब्र करता है यहां कौन मुहब्बत में भला।
कुछ लियाकत का असर आप छुपाते होंगे ।।

उम्र भर आप रकीबों को न पहचान सके ।।
गैर कंधो से वे बन्दूक चलाते होंगे ।।

ये हक़ीक़त तो जमाने को खबर है शायद ।।
ख्वाब रातों में उन्हें खूब सताते होंगे ।।

इश्क़ छुपता ही नहीं लाख छुपा कर देखो ।
खूब चर्चे वो सरेआम कराते होंगे ।।

ज़ुल्फ़ लहरा के गुज़रते वो अदाकारी में ।
आग सीने में कई बार लगाते होंगे ।।

-- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 14, 2017 at 8:37am

आद0 नवीन मणि जी सादर अभिवादन।बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने। मेरी शैर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल करें।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 13, 2017 at 10:05am

हार्दिक बधाई आदरणीय सोमेश कुमार जी।बेहतरीन प्रस्तुति।

ज़ुल्फ़ लहरा के गुज़रते वो अदाकारी में ।

आग सीने में कई बार लगाते होंगे ।।

Comment by Mohammed Arif on December 13, 2017 at 8:08am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,

                                  बहुत ही प्यारी ग़ज़ल और बड़े ही बेहतरीन शे'र । हर शे'र प्रभावशाली । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।बाक़ी। गुणीजन अपनी अमूल्य राय देंगे ।

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