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ग़ज़ल नूर की-हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा

2122 /1122 /1122 /22 (112)
.
हँसता चेहरा यूँ तो रुख्सत उसे कर आएगा 
दिल पे टूटेंगे सितम..... दर्द से भर आएगा.
.
एक दूजे को जो देखेंगे अगर हम यूँ ही 
किसी चेहरे का किसी पर तो असर आएगा.
.
अपनी आँखों से हटा ले ये अना की पट्टी
तुझ को हर शख्स तेरा अक्स नज़र आएगा.
.
सोच के गहरे समुन्दर में लगा ले गोते,   
उथले पानी में कहाँ हाथ गुहर आएगा?  
.
रूह को अश्क-ए-नदामत से कभी धो कर देख,   
हुस्न हस्ती का तेरी और निखर आएगा.
.
कोई मंज़िल ही नहीं है तो कहाँ पहुँचेंगे
इस सफ़र बाद कोई और सफ़र आएगा

.
नूर बुलवाए कभी “नूर” को मिलने के लिए
जिस्म की ख़ाक यहीं राख में धर आएगा. 
.

निलेश “नूर”
मौलिक अप्रकाशित 

Views: 113

Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 28, 2017 at 7:23pm

आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by Mahendra Kumar on December 27, 2017 at 11:26am

बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आ. निलेश सर. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 26, 2017 at 8:52am

आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने। बहुत खूब। शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल फरमायें। सादर

Comment by दिनेश कुमार on December 26, 2017 at 6:49am

बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई आ. निलेश सर जी। दिली दाद क़ुबूल करें। वाह वाह वाह


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 25, 2017 at 9:19pm

नीलेश भैया ,बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बहुत बहुत बधाई आपको 

सोच के गहरे समुन्दर में लगा ले गोते,   
उथले पानी में कहाँ हाथ गुहर आएगा?  -----बहुत खूब 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 25, 2017 at 8:41pm

जनाब नीलेश साहिब ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें

Comment by Balram Dhakar on December 25, 2017 at 4:25pm

आदरणीय नीलेश जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई।
सादर।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 25, 2017 at 3:48pm

शुक्रिया आ. अजय तिवारी जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 25, 2017 at 3:47pm

शुक्रिया आ. मोहम्मद आरिफ़ साहब 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 25, 2017 at 3:47pm

शुक्रिया आ. समर सर 

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