For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

माँ के हाथों से जब खाया जाता है (ग़ज़ल)

अरकान-फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फ़ा

ऐसे रिश्ता यार निभाया जाता है
वक़्त पड़े तो ग़म भी खाया जाता है ।।

भूख लगी हो और न हो कुछ खाने को
बच्चे का फिर दिल बहलाया जाता है।।

लाख छुपाने से भी जब ये छुप न सके
फिर क्यों यारो इश्क़ छुपाया जाता है।।

तब होती है घर में बरकत ही बरकत
मुफ़लिस को महमान बनाया जाता है ।।

रुखा सूखा खाना लज़्ज़त दार लगे
माँ के हाथों से जब खाया जाता है ।।

चुंगल में सेठों के जो इक बार फँसे
सदियों तक फिर कर्ज चुकाया जाता है ।।

फूलों की ख़ुशबू का कोई जुर्म नहीं
भवरों पर इल्ज़ाम लगाया जाता है ।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 273

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shyam Narain Verma on January 8, 2018 at 9:46pm
बहूत उम्दा हार्दिक बधाई
Comment by Sushil Sarna on January 8, 2018 at 7:12pm

फूलों की ख़ुशबू का कोई जुर्म नहीं
भवरों पर इल्ज़ाम लगाया जाता है ।।

वाह आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण अशआर कहे हैं आपने। मधुर भाव गंध से सुवासित इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई सर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"क्या बात है लाजवाब | समर सर की इस्लाह भी लाजवाब | "
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (मुहब्बत के सफ़र में सैकड़ों आज़ार आने हैं)
"लाजवाब ग़ज़ल | आदरणीय समर सर की इस्लाह से तो जबरदस्त निखार आ गया है | "
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कितना अफ़्कार में मश्ग़ूल हर इक इन्साँ है(४३ )
"आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत आभार  Pradeep Devisharan Bhatt जी "
2 hours ago
केशव commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"वाह असाधारण रचना  बधाई स्वीकार हो मोहित जी "
3 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt shared Sushil Sarna's blog post on Facebook
4 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"मोहित जी,उत्तम रचना हुई"
4 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt shared Mohit mishra (mukt)'s blog post on Facebook
4 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt shared Sheikh Shahzad Usmani's blog post on Facebook
4 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कितना अफ़्कार में मश्ग़ूल हर इक इन्साँ है(४३ )
"अच्छि गज़ल हुई गह्लौत जी"
4 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"जीने के सलीके का मैं अंदाज सिखा दुंगा"
5 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Sushil Sarna's blog post विदाई से पहले : 4 क्षणिकाएं
"खुबसुरत कविता हुई। बधाई स्वीकार करे सुशील जी"
5 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

छुट्टियों में हिंदी (संस्मरण)

विद्यालयीन हिंदी विषय पाठ्यक्रमों में हिंदी साहित्य की विभिन्न गद्य या काव्य विधायें बच्चे क्यों…See More
6 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service