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(1) राष्ट्रीय पर्व पर
मिला किसी को
पद्म भूषण , पद्म विभूषण
तो किसी को मिला पद्म श्री
लेकिन जो थे सच्चे हक़दार
नहीं मिला उन्हें यह सम्मान
क्योंकि उनकी नहीं थी कोई
राजनैतिक पहचान । 

 
(2) जिन बच्चों को माँ-बाप ने
चलना -फिरना , उठना-बैठना
आदि का सलीका सिखाया
उन्हीं बच्चों ने बड़ा होकर
बुढ़ापे में वृद्धाश्रम पहुँचाया ।

 

(3) दुर्घटना और बीमारियाँ
बहुत सस्ती हो गईं हैं
इसीलिए तो-
बीमा किश्त महँगी हो गई है ।

 

 

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 15, 2018 at 5:39am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। बेहतरीन कताक्षिकाएँ लिखी आपने, दोनों उत्तम है। सच भी आज का यहीं है, अगर पहचान है तो बड़ा आदमी। अन्यथा करो संघर्ष। आपको इस प्रस्तुति पर बधाई देता हूँ
Comment by Mohammed Arif on January 14, 2018 at 10:39am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय मोहित जी । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on January 14, 2018 at 10:32am

आदणीय आरिफ़ जी सादर अभिवादन ,

                   अच्छी कटाक्षिकाओं के लिए बधाई

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