For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

(1222 1222 122)

जिन्हें आने की फुरसत ही नहीं है

उन्हे मिलने की हसरत ही नहीं है

 

अगर तुझमें शराफत ही नहीं है

मुझे तेरी ज़रूरत ही नहीं है

 

डुबो देगी हमें ये बेईमानी

ये इंसानों की फ़ितरत ही नहीं है

 

उगलते हैं ज़ुबाँ से आग अपनी

बची इनमें शराफत ही नहीं है

 

चलो छोड़ो जुदा थी राह अपनी

हमें तुमसे शिकायत ही नहीं है

 

असल मुद्दों से ही भटकाये रखना

सियासत की रिवायत ही नहीं है

 

बुराई इस कदर शामिल है सबमें

दिलों में अब शराफत ही नहीं है

 

अमानत में खयानत करने वालों

तुम्हें इसकी इजाज़त ही नहीं है

 

हुआ घायल मै फूलों से हमेशा

मुझे काँटो से दिक्कत ही नहीं है

 

(मौलिक एवम अप्रकाशित)

Views: 85

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 9, 2018 at 9:21am

सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 7, 2018 at 7:27pm

आद0 नादिर खान जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बेहतरीन प्रयास। शैर दर शैर मुबारकबाद कुबूल करें। शेष गुणीजनों से सहमत

Comment by नादिर ख़ान on February 7, 2018 at 12:00pm

मार्गदर्शन हेतु आभार जनाब तसदीक साहब ...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 6, 2018 at 11:09am

जनाब नादिर साहिब आदाब , मतले का उला मिसरा यूँ करके देखें ।

"ग़लत है उनको फ़ुरसत ही नहीं है " और शेर 6 का उला यूँ कर सकते हैं "वो कैसे छोड़ दे मज़हब का दामन " 

Comment by नादिर ख़ान on February 6, 2018 at 12:23am

जनाब तस्दीक साहब जनाब समर साहब और जनाब सलीम साहब,  रचना मे आप सभी की उपस्थिति देखकर बहुत खुशी हुयी  मूल्यवान सुझाओ के लिए शुक्रिया ...

मतले के शेर और छठे शेर मे कुछ संशोधन किया है कृपया मार्गदर्शन करें ...

जिन्हें मिलने की फुरसत ही नहीं है

उन्हें हमसे मुहब्बत ही नहीं है

अदावत ही अदावत है जहाँ में

बिना इसके सियासत ही नहीं है

Comment by नादिर ख़ान on February 6, 2018 at 12:12am

आदरणीया रक्षिता जी, रचना को आपने जो मान दिया उसके लिए आपका बहुत  बहुत शुक्रिया ...

Comment by SALIM RAZA REWA on February 5, 2018 at 7:41pm
जनाब नादिर ख़ान साहिब,
बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बांकी.. जनाब तस्दीक साहब, जनाब समर साहब आपकी ग़ज़ल पर अपनी राय दे चुके हैं.. अमल बे‍हतर होगा
Comment by Samar kabeer on February 5, 2018 at 10:50am

जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

पहले मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,देखियेग ।

छटे शैर के ऊला में सही शब्द है "अस्ल",और सानी मिसरे में आप उलट बात कह रहे हैं,सियासत का तो काम ही अस्ल मुद्दों से भटकाना है,ग़ौर कीजियेगा ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 5, 2018 at 9:29am

जनाब नादिर साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

शेर6 उला मिसरे में सही शब्द " अस्ल " है  असल नहीं देखियेगा 

Comment by Rakshita Singh on February 5, 2018 at 9:00am

आदरणीय नादिर जी , सुन्दर पंक्तियों के उपलक्ष्य में हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -खेल सारे, हर तमाशा छोड़ कर
"वाह i बहुत सुन्दर, हार्दिक बधाई l सादर"
59 seconds ago
Shyam Narain Verma commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है )
"बहूत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर"
3 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post इसी दुनिया में अपनी मुख़्तसर दुनिया बनाता हूँ
"क्या बात है, बहुत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर"
6 minutes ago
पीयूष कुमार द्विवेदी commented on पीयूष कुमार द्विवेदी's blog post सरसी छंद-२
"हार्दिक आभार आदरणीय"
7 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on somesh kumar's blog post ख्याल
"बहूत खूब, हार्दिक बधाई l सादर"
8 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकु
"वसंत ऋतु का सुंदर चित्रण है, हार्दिक शुभकामनाएं l सादर"
10 minutes ago
Neelam Upadhyaya posted a blog post

कुछ हाइकु

झूमी सरसोंधरती इतरायीफगुनाहट बसंत आयाओढ़ पीली चुनरखेत बौराया बौर आम केफैल गयी सुगंधझूमा बसंत टेसू…See More
53 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर posted an event

ओबीओ साहित्योत्सव भोपाल 2018 at महादेवी वर्मा कक्ष, हिंदी भवन

April 15, 2018 from 10:30am to 7pm
आप सादर आमंत्रित हैं.See More
57 minutes ago
Mohammed Arif and KALPANA BHATT ('रौनक़') are now friends
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--फागुन
"दिली आभार आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी । "
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता--फागुन
"बहुत-बहुत दिली शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी । लेखन सार्थक हुआ ।"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manan Kumar singh's blog post हेडलाइन(लघुकथा)
"आद0 मनोज जी सादर अभिवादन। बढिया व्यंग्यात्मक लघुकथा। इस प्रस्तुति पर बधाई क़ुबूल करें। सादर"
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service