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काल कोठरी

निस्तब्धता

अँधेरे का फैलाव

दिशा से दिशा है काला आकाश

रात है मानो अँधेरे की

एक बहुत बड़ी कोठरी

सोचता हूँ तुम भी कहीं 

बंधी-बंधी-सी  खोई-खोई

अन्यमनस्क, अवसन्न

इस गहन अँधेरे में भी

परखती होगी तिरछी लकीरों को

इस रात की कोठरी में अकेली रुआँसी

दर्द की दानवी जड़ों से जुड़ती-टूटती

गरमीली यादों की भीगी वाष्प को ठेलती

बेबस, उदास, उसी ज़हरीली भाफ से

बेचैन आँखों को आँज रही होगी

आँजते-आँजते 

कोई तीखी एक सलाई दर्द की

चुभ जाती होगी

तिर आते होंगे गरमीले आँसू ...

सिसकारी भरती  बींधती उदासी

नहीं बदलता दृश्य, नहीं बदलता

रात-देर-तक अपलक गहरे भीतर

अतिशय चिन्ता

नामंज़ूर है फिर भी मन को कोई शर्त

ना ही मंज़ूर है उसे तजुर्बों से समझोता

अकस्मात अनपेक्षित खयालों की कंपकपी

कभी इस कभी उस मजबूरी का तनाव तुममें

मुझमें भी रहा है कब से व्याप

हरदम किसी बेबस कमज़ोरी का संताप

अनुच्चरित विशाद

अजगरी रात, पराजित आस

पास सरकता धुंधलका

काल-कोठरी में हैं फ़ासलों में खोए

दो भीगे हुए मन एकाकार

आर-पार हिमाच्छादित नि:शब्दता

       

                  -------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on February 22, 2018 at 12:22am

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय नादिर खान जी।

Comment by नादिर ख़ान on February 18, 2018 at 7:59pm

उत्तम सृजन के लिए बधाई आदरणीय विनय निकोर जी .....

Comment by vijay nikore on February 17, 2018 at 6:39pm

आपका हार्दिक आभार, आ० लक्ष्मण जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 16, 2018 at 6:32am

आ. भाई विजय जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on February 14, 2018 at 9:56am

आपका हार्दिक आभार, आ० कल्पना बहन।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 13, 2018 at 6:52pm

गंभीर भावपूर्ण रचना | हार्दिक बधाई आदरणीय | कुछ ज्यादा ही उदासीन हो गयी है कविता | सादर |

Comment by vijay nikore on February 13, 2018 at 1:46pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय नरेन्द्रसिंह जी।

Comment by vijay nikore on February 13, 2018 at 1:45pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय सुरेन्द्र जी

Comment by vijay nikore on February 13, 2018 at 1:44pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय भाई तस्दीक अहमद खान साहिब।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 13, 2018 at 10:55am

आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन।बहुत बेहतरीन भाव सम्प्रेषण के साथ बढिया अतुकांत। बहुत बहुत बधाई

कृपया ध्यान दे...

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