For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दर्द में ऐसे जलता है दिल ।
मोम जैसे पिघलता है दिल ।

यादों में ही रहे बेकरार,
यादों में ही बहलता है दिल ।

दर बदर ठोकरें मिल रहीं,
पर भला कब सँभलता है दिल ।

कुछ कभी तो कभी है ये कुछ ,
लमहा लमहा बदलता है दिल ।

तनहा तनहा किसी शाम सा,
होके वीरान ढलता है दिल ।

प्यार का कोई दरिया सा है,
जिसमें हर वक्त घुलता है दिल ।

नीरज मिश्रा 

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 55

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' 14 hours ago

बड़े अच्छे भाव हुए आदरणीय..बाकी आदरणीय तस्दीक जी बता ही चुके हैं...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on Wednesday

जनाब नीरज साहिब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है , कोशिश करते रहिए ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ |
शेर 2 के मिसरों में लय बाधित हो रही है | यूँ कर सकते हैं " बे क़रारी बढ़े याद से -याद से ही बहलता है दिल "
शेर 3 उला यूँ करसकते हैं |"दर बदर खा रहा ठोकरें "
शेर 4 उला यूँ करलें |"सामने प्यार होता है जब "
शेर5 शेर 6 के मिसरों में रब्त की कमी है | यूँ करलें |"कोई शायद ख़यालों में है -यूँ न उसका मचलता है दिल "
ज़ख़्म अपने लगाते हैं जब ---अपने अंदर ही घुलता है दिल |

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on Wednesday

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय राम अवध जी

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on Wednesday

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहजाद जी

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on Wednesday

खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on Wednesday

बहुत बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीय नीरज मिश्रा ' प्रेम' जी। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता --पारदर्शिता
"बहुत -बहुत आभार आदरणीय विजय निकोर जी ।"
5 minutes ago
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"बहुत ही उम्दा संवेदनाएं उम्दा रचना आदरणीया रक्षिता जी"
9 minutes ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222 अभी ये आँख बोझिल है निहाँ कुछ बेक़रारी है न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी…See More
2 hours ago
रामबली गुप्ता posted a blog post

गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता

गीतभावना में प्रेम का रस घोल प्यारे। प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे। भावना में.........शब्द-शर मुख…See More
2 hours ago
vijay nikore commented on Mohammed Arif's blog post कविता --पारदर्शिता
"//मगर ग़रीब के पास आधार कार्ड न होने सेराशन से वंचित किया जा रहा हैक्या इतनी पारदर्शिता काफी नहीं है…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"सुंदर गजल हुई है आदरणीय हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"आदरणीय बृजेश कुमार जी बहुत बहुत धन्यबाद।"
10 hours ago
Rakshita Singh commented on नादिर ख़ान's blog post सहे ज़ुल्म हमने सदा हँसते हँसते
"आदरणीय नादिर जी, बहुत ही उम्दा गजल।मुबारकबाद कुबूल करें।"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"रुमानियत को समेटे हुए सुन्दर रचना..."
10 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता
"हृदय से आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता
"अनुपम सरस रचना हुई आदरणीय..सादर"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"क्या कहने आदरणीय दुबे जी ..बहुत ही सुन्दर गीतिका कही.."
10 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service