For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दर्द में ऐसे जलता है दिल ।
मोम जैसे पिघलता है दिल ।

यादों में ही रहे बेकरार,
यादों में ही बहलता है दिल ।

दर बदर ठोकरें मिल रहीं,
पर भला कब सँभलता है दिल ।

कुछ कभी तो कभी है ये कुछ ,
लमहा लमहा बदलता है दिल ।

तनहा तनहा किसी शाम सा,
होके वीरान ढलता है दिल ।

प्यार का कोई दरिया सा है,
जिसमें हर वक्त घुलता है दिल ।

नीरज मिश्रा 

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 171

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2018 at 7:00pm

बड़े अच्छे भाव हुए आदरणीय..बाकी आदरणीय तस्दीक जी बता ही चुके हैं...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 14, 2018 at 8:22pm

जनाब नीरज साहिब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है , कोशिश करते रहिए ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ |
शेर 2 के मिसरों में लय बाधित हो रही है | यूँ कर सकते हैं " बे क़रारी बढ़े याद से -याद से ही बहलता है दिल "
शेर 3 उला यूँ करसकते हैं |"दर बदर खा रहा ठोकरें "
शेर 4 उला यूँ करलें |"सामने प्यार होता है जब "
शेर5 शेर 6 के मिसरों में रब्त की कमी है | यूँ करलें |"कोई शायद ख़यालों में है -यूँ न उसका मचलता है दिल "
ज़ख़्म अपने लगाते हैं जब ---अपने अंदर ही घुलता है दिल |

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on February 14, 2018 at 6:27pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय राम अवध जी

Comment by Neeraj Mishra "प्रेम" on February 14, 2018 at 6:27pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहजाद जी

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 14, 2018 at 5:39pm

खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 14, 2018 at 9:58am

बहुत बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई आदरणीय नीरज मिश्रा ' प्रेम' जी। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
3 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

   चल छुपे जो तेरे थे राज़ नुमायाँ कर दें।दर्द अपने को पराये या के दरमाँ कर दें।जिंदगी उम्र बताई न…See More
6 hours ago
Hariom Shrivastava posted a blog post

बरवै छंद -

1- हिरणाकुश नामक था, इक सुल्तान। खुद को ही कहता था, जो भगवान।। जन्मा उसके घर में, सुत प्रहलाद।जो…See More
6 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बाऊजी बहुत बहुत आभार"
11 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बृजेश जी बहुत बहुत आभार"
11 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,इस प्रयास के लिए बधाई ।"
12 hours ago
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'रहबरी तीरगी की रहे…"
12 hours ago
SALIM RAZA REWA posted photos
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय सुर्खाब बशर जी हार्दिक बधाई स्वीकार करे उम्दा ग़ज़ल कही आपने"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें अच्छी प्रस्तुति"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत खूब ग़ज़ल आदरणीय मुनीश तन्हा जी हार्दिक बधाई"
Saturday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service