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ग़ज़ल "कहता हूँ अब ग़ज़ल मैं उसे सोचते हुए"

  

221 2121 1221 212

इंसानियत के तंग सभी दायरे हुए।
दिखते नहीं हैं लोग जमीं से जुड़े हुए।।

जो सुर्खियों में रहते हमेशा बने हुए।
रहते है लोग वो ही ज़ियादा डरे हुए।।

आहट हुई जरा सी बुरे वक़्त की तभी।
कुछ साँप आस्तीन से निकले छुपे हुए।।

वो इस लिये खड़ा है बुलन्दी पे आज भी।
डरता नहीं है झूठ कोई बोलते हुए।।

ख्वाबों में देखता हूँ जिसे रोज रात में।
कहता हूँ अब ग़ज़ल मैं उसे सोचते हुए।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by surender insan on March 20, 2018 at 8:32pm

 आदाब मोहतरम मुहम्मद आरिफ साहब। बहुत बहुत शुक्रिया आपका  । बहुत बहुत आभार जी। सही कहा आपने बेहतरी की गुंजाइश हमेशा रहती है।

Comment by surender insan on March 20, 2018 at 8:27pm

    बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय सुशील सरना  जी । बहुत बहुत आभार जी।

Comment by surender insan on March 20, 2018 at 8:27pm

   बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय हर्ष महाजन  जी । बहुत बहुत आभार जी। सादर नमन जी।

Comment by surender insan on March 20, 2018 at 8:25pm

मोहतरम समर कबीर साहब आदाब। बहुत बहुत शुक्रिया आपका ,आपने ग़ज़ल को समय दिया । आखरी शेर में सुधार करता हूँ। सादर जी।

Comment by surender insan on March 20, 2018 at 8:22pm

  बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय नीलेश भाई  जी । बहुत बहुत आभार जी।

Comment by surender insan on March 16, 2018 at 11:17pm

बहुत बहुत शुक्रिया आपका रोहित डोबरियाल जी।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 15, 2018 at 12:05pm

हार्दिक बधाई ...

जो सुर्खियों में रहते हमेशा बने हुए।
रहते है लोग वो ही ज़ियादा डरे हुए।

वो इस लिये खड़ा है बुलन्दी पे आज भी।
डरता नहीं है झूठ कोई बोलते हुए।।.....वाह 

Comment by somesh kumar on March 15, 2018 at 9:33am

वो इस लिये खड़ा है बुलन्दी पे आज भी।
डरता नहीं है झूठ कोई बोलते हुए।

SMAY AUR KAAL PR STIK VNGY KRTA SHER HAI YE 

Comment by Ajay Tiwari on March 14, 2018 at 8:21pm

वो इस लिये खड़ा है बुलन्दी पे आज भी
डरता नहीं है झूठ कोई बोलते हुए

यह एक असाधारण शेर है जो अपने देश के ही नहीं आज के पूरे वैश्विक परिदृश्य पर प्रभावी टिप्पणी करता है.

आदरणीय सुरेन्द्र जी, ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 14, 2018 at 7:54pm

वाह क्या कहने बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..

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