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"कितनी बार कहा कि ऐसी पवित्र धार्मिक जगहों पर मंद-मंद मुस्कराया मत करो!" रामदीन को कोहनी मारते हुए उसके दोस्त ने कहा - " यहां चलते-फिरते सीसीटीवी कैमरे भी हैं! स्टिंग ऑपरेशन तक हो सकते हैं, समझे!"


"कितने दर्शन और करने होंगे! इस सदी में भी यहां ये कस्टम-सिस्टम! .. और कहां-कहां जाना पड़ेगा!" बड़ी बेचैनी के साथ धार्मिक औपचारिकताएं निभाते हुए रामदीन ने धीरे से कहा।


"आदत डाल ही लो! बड़े नेता के बेटे हो! अब जीवन में यही करना होगा!" - रामदीन के माथे से पसीने की बूंदें अपने गमछे से पोंछते हुए दोस्त ने कहा - " थोड़ी देर बाद एक बस्ती में चलेंगे। चुपचाप मेरे एक साथी की रसोई में ज़मीन पर बैठ कर भोजन कर लेना उसके परिवार के साथ! जो जैसा जहां है, देख लेना और जो कुछ भी जो कहे, सुन लेना! बाक़ी ज़िम्मेदारी हमारी, समझे!"


"लेकिन!"


" लेकिन-वेकिन कुछ नहीं! सारे मीडिया की नज़र तुम पर है! चुनावों के बाद विदेश घूम आना, राहत मिलेगी!"


"लेकिन कब तक बेमन से ये सब करूं! यार, हद हो गई! बड़े भैया होते, तो मेरी ये नौबत न आती!" रामदीन बुरा सा मुंह बनाकर अपनी जूतियां पहनते हुए बड़बड़ाया।


"पिता के नक्शे क़दम चलो, बड़े नेताओं जैसे या फिर देश और घरवाले छोड़ विदेश में जम जाओ!" दोस्त ने रामदीन को फिर से समझाइश दी।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Naveen Mani Tripathi on April 17, 2018 at 9:45pm

बहुत अच्छी कथा के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 13, 2018 at 2:53am

अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब

विजय निकोरे साहिब।

Comment by vijay nikore on April 11, 2018 at 11:50am

इस खूबसूरत लघुकथा के लिए  हार्दिक बधाई, आदरणीय शैख शहज़ाद उस्मानी जी

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 11, 2018 at 4:17am

मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर समय के दे कर अपने विचार व्यक्त कर मेरी लेखनी की हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब, जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा साहिब, जनाब तेजवीर सिंह साहिब , जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब और आदरणीया नीलम उपाध्याय जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 11, 2018 at 4:14am

बहुत ही गर्मजोशी के साथ हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब। आप भी तो लघुकथा संग कुछ विधाओं में मंच पर सक्रिय सहभागिता निभा करव टिप्पणियों से हमें प्रेरित व मार्गदर्शित करते रहते हैं न।

Comment by Mohammed Arif on April 10, 2018 at 4:17pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                        भीषण गरमी के प्रकोप में ओबीओ के पटल पर आपकी सर्वश्रेष्ठ लघुकथाओं का दौर चल रहा है । तापमान में वृद्धि के साथ ही श्रेष्ठता का ज़बर्दस्त प्रदर्शन बड़ा ही सराहनीय है । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 9, 2018 at 5:38pm

आदरणीय शेख उस्मानी जी शानदार कटाक्ष करती इस लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by TEJ VEER SINGH on April 9, 2018 at 1:33pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी।बेहतरीन लघुकथा।अच्छा कटाक्ष।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 9, 2018 at 12:18pm

आदरणीय उसमानी जी, नमस्कार । बहुत बढ़िया लघुकथा । प्रस्तुति के लिए बधाई।

Comment by Samar kabeer on April 8, 2018 at 6:13pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,ये लघुकथा भी उम्दा हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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