For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दुआ कर ग़म-ए-दिल, दुआ कर तू

दुआ कर ग़म-ए-दिल, दुआ कर तू

नफ़रत को नफ़रत से न देख तू,  रात भर बेकरार न हो

रुसवा  है  वह,  पर  रह्म  दिल  है  तू,  रऊफ़  है  तू 

कर दुआ  कि सोच पर उसकी,  रहमत खुदा की हो

रफ़ीक ने दी है  चोट तुम्हें, उसका  उसे  मलाल  हो

माना  कि  महकमए  इंसाफ़  से  तुम्हें

फ़कत  नाइंसाफ़ी  ही  मिली

पर इतना तो जानो कि वह मुज्रिम नहीं है

गुनहगार  भी  नहीं 

हाँ,  कुव्वत-ए-फ़िक्र  कम  है  उसमें

कैदी रहा है वह हर इनसान की मानिंद

अपनी  छोटी-सी  मुट्ठी  भर  सोच  का

जानता हूँ मैं कि आसां नहीं है कभी भी

मार-ए-सियाह-सी डसती रात में रात भर

करवट पर करवट बदलते, आहें भरते

बातिल  परस्त  को  माफ़  कर  देना

या

दुखते जिगर को सहला-सहला तसल्ली देना ...

अर्बाब-ए-अक़्ल  हो, बारबरदार  हो  तुम

दिलखराश दोस्त पर आज

तुम्हारी बारान-ए-रहमत ही हो जाए

रंज  का  तुम्हारे

रंजोअलम मुझको भी है, बस इसीलिए

अर्ज़ करता हूँ तुमसे कि इस रफ़ाकत में

दिल  को  तेरे  दुखाया  है  जिसने                   

दुआ कर ग़म-ए-दिल, दुआ कर तू

खता उसकी है, खताबख़्शी तुम्हारी सही

दुआ से अब रुह को उसकी ही नहीं

आज रूह को अपनी  रिहा कर तू

दुआ कर  गम-ए-दिल,  दुआ कर तू

                  -------

--- विजय निकोर

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

रुसवा                =   निंदित                                     रह्म दिल    = दयालु

रऊफ़               =   बहुत अधिक दया करने वाला       कुव्वत-ए-फ़िक्र = विचार-शक्ति              

दिलसखराश       =   बहुत कष्ट देने वाला                    रहमत         = करुणा

रफ़ीक               =  दोस्त                                        मलाल         = पश्चाताप

महकमए-इंसाफ़  = न्याय विभाग                              अर्बाब-ए-अक्ल = बुद्धिमान

मानिंद                = समान, तुल्य                              मार-ए-सियाह  =  काला साँप

बातिल परस्त     =  असत्यता का पालन करने वाला        

बारबरदार         =  बोझ उठाने वाला                         दिलसखराश = बहुत कष्ट देने वाला

बारान-ए-रहमत     =  लाभदायक वर्षा                        रंजोअलम     = बहुत अधिक शोक

रफ़ाकत             = मैत्री                                          खताबख़्शी    = गलती माफ़ करना                     

 

Views: 64

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore yesterday

सराहना के लिए हृदयतल से आपका आभार, आदरणीया नीलम जी

Comment by vijay nikore yesterday

सराहना के लिए हृदयतल से आपका आभार, आदरणीय छोटेलाल जी

Comment by Neelam Upadhyaya yesterday

आदरणीय विजय निकोर जी नमस्कार । बहुत ही बढ़िया भावपूर्ण कविता हुई है । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on Tuesday

आदरणीय भाई समर जी, मार्ग-दर्शन के लिए और रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार।सुधार कर दिए हैं।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on Tuesday

आदरणीय विजय निकोर जी आपने जिस अंदाज में उर्दू शब्दों का बेहतरीन प्रयोग किया वह काबिलेतारीफ है इस भावात्मक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Samar kabeer on Tuesday

जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत उम्दा और भावपूर्ण कविता हुई है,उर्दू अल्फ़ाज़ की शमूलियत ने इसे और भी ख़ूबसूरत बना दिया है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'इंसाफी न मिली'

इस पंक्ति को यूँ कर लें "इंसाफ़ न मिला" या "नाइंसाफ़ी मिली", क्योंकि "इंसाफ़ी" कोई शब्द नहीं है ।

'माफ़ कर देना', को "मुआफ़ कर देना" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 84 in the group चित्र से काव्य तक
"सुधी जनों का आआयोजन में स्वागत है।"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जनाब चंद्रेश कुमार साहिब, अच्छी लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
"बहतर है जनाब ।"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
" वर्तमान/ समसामयिक नकारात्मक घटनाचक्र/ यथार्थ पर तमाम मीडिया में प्रकाशित हो रही विभिन्न…"
5 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जो किताबों ने दिया वो फ़लसफ़ा अपनी जगह.
"जनाब नीलेश नूर साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें । शेर2 के सानी में तुम की जगह वह…"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,ग़ज़ल पर आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत…"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on vijay nikore's blog post तब्दीले आबोहवा
"आ.जनाब विजय निकोरे साहिब ,गज़ब की मंज़र कशी आपने रचना में की है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on vijay nikore's blog post मुंतज़िर मुंतज़िर रहा
"आ.विजय निकोरे साहिब ,दिल के एहसास बयान करती सुन्दर रचना हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मक़्ते के ऊला…"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Neelam Upadhyaya's blog post बेटी का विवाह
"मुहतर्मा नीलम साहिबा ,दिल को छू लेने और संदेश देती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
"आ.जनाब डॉक्टर आशुतोष साहिब ,ग़ज़ल पर आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post नज़्म (इंसानियत का ख़ून )
"आ .  जनाब डॉक्टर आशुतोष साहिब ,आपकी  नज़्म पर सुन्दर प्रतिक्रिया और  हौसला अफ़ज़ाई का…"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service