For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

समय की लाठियां (लघुकथा)

पार्क की ओर जाते हुए उन दोनों बुज़ुर्ग दोस्तों के दरमियाँ चल रही बातचीत और उनके हाथों में लहरा सी रही लाठियां नये दिवस की भोर के पूर्व, उनके अनुभव की लाठियां साबित हो रहीं थीं।


"... 'सही नीयत और सही तरक़्क़ी'! यह दावा करते हैं आजकल के दोगले नेता अपने मुल्क की ज़मीनी हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ करते हुए!" उनमें से एक ने कुछ झुंझलाते हुए कहा।


"... 'शाही नीयत और शाही तरक़्क़ी' है दरअसल! हम तो यही कहते हैं, यही देखते हैं हर तरफ़ और यही तो सुनते हैं!" दूसरे साथी बुज़ुर्ग ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहते हुए अपनी लाठी पार्क की नज़दीक़ी बस्तियों की ओर घुमाते हुए कहा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 83

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 31, 2018 at 9:26pm

टिप्पणियों के लिए पुनः हार्दिक आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी।

Comment by Mahendra Kumar on May 31, 2018 at 10:46am

शंका निवारण हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. सादर.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 30, 2018 at 1:46am

"लहराती सी लाठियां"  से दरअसल यहाँ  ' झूमती लाठियां' है। प्रायः हाथों में ली इन लाठियों का जानवर भगाने के अलावा कोई उपयोग नहीं होता, केवल हाथों मेंं 'झूमती सी' रहती हैं। बहुआयामी मतलब देने हेतु ऐसा शीर्षक दिया था। सुझाव हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय महेंद्र कुमार जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 30, 2018 at 1:41am

मेरी इस रचना के अवलोकन, अनुमोदन और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद और आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी और आदरणीया बबीता गुप्ता जी।

Comment by Mahendra Kumar on May 28, 2018 at 10:33am

सही कहा आपने, मुँह पर "सही नीयत और सही तरक़्क़ी" और दिल में "शाही नीयत और शाही तरक़्क़ी". यही है आजकल की राजनीति का चेहरा. इस बढ़िया लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय शेख़ शहजाद उस्मानी जी. 

1. //लहरा सी रही लाठियां// क्या लाठियां सच में नहीं लहरा रही हैं? यदि 'हाँ' तो कोई कोई बात नहीं, पर यदि 'नहीं' तो इसे "लहराती लाठियां" अथवा "लहरा रही लाठियां" होना चाहिए. 

2. शीर्षक पर पुनर्विचार निवेदित है.

सादर.

Comment by babitagupta on May 27, 2018 at 8:35pm

लघु  कथा का माध्यम से लाठी के दबदबे का सही कटाक्ष किया हैं,प्रस्तुत रचना पर बधाई .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-2
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब .... बहुत ही संवेदनशील विषय पर आपने सुलगते सवालों,विचारों पर एक बेहतरीन…"
7 minutes ago
Sushil Sarna commented on TEJ VEER SINGH's blog post गंगा सूख गयी - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी सामजिक विचारों की विकृति को उजागर करती इस मार्मिक लघुकथा के लिया हार्दिक बधाई।"
10 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"आदरणीय समर कबीर साहिब सृजन आपकी ऊर्जावान प्रशंसा एवं सुझाव का आभारी है। आपका शक सही है , पाँव होना…"
13 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"आदरणीया रक्षिता सिंह जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का आभारी है।"
14 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"आदरणीय गुमनाम पिथौरगढ़ी जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का आभारी है।"
14 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
14 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीय विजय निकोर साहिब सृजन आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया का आभारी है।"
18 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीय तस्दीक अहमद ख़ान साहिब , आदाब ... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। सर आपको…"
18 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... प्रस्तुति के भावों को अपनी आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से…"
19 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का आभारी है।"
19 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीया रक्षिता सिंह जी सृजन की गहनता को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से मान देने का दिल से आभार।"
19 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं(6) :
"आदरणीय नीलम उपाध्याय जी सृजन को अपनी मनोहारी प्रतिक्रिया से मान देने का दिल से आभार।"
24 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service