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जाने के बाद ... लघु रचना

जाने के बाद ... लघु रचना

गुज़र गयी
एक आंधी
तुम्हारे स्पर्शों की
मेरी देह की ख़ामोश राहों से
समेटती हूँ
आज तक
मोहब्बत की चादर पर
वो बिखरे हुए लम्हे
तुम्हारे
जाने के बाद

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 34

Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 27, 2018 at 6:54pm

आदरणीय रक्षिता सिंह जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया।

Comment by Rakshita Singh on June 27, 2018 at 1:42pm

आदरणीय सुशील जी नमस्कार 

कम शब्दों में दिल को छू लेने वाली रचना....बहुत-बहुत मुबारकबाद ।।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 2:45pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन को आत्मीय मान देने एवं सुझाव देने का दिल से आभार। मैं अभी एडिट करता हूँ। हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 2:45pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी सृजन आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 2:45pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी प्रस्तुति के भावों पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 2:43pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब , सृजन को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 2:43pm

आदरणीय गुमनाम पिथौरगढ़ी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on June 25, 2018 at 2:18pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'गुजर'--"गुज़र"

'खामोश'--"ख़ामोश"

Comment by TEJ VEER SINGH on June 25, 2018 at 1:00pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। लाज़वाब प्रस्तुति।

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 23, 2018 at 9:19pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति , आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई , सादर।

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