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अनावरण या आडंबर [लघु कथा]

तड़के सुबह से ही रिश्तेदारों का आगमन हो रहा था.आज निशा की माँ कमला की पुण्यतिथि थी. फैक्ट्री के मुख्यद्वार से लेकर अंदर तक सजावट की गई थी.कुछ समय पश्चात मूर्ति का कमला के पति,महेश के हाथो अनावरण किया गया.

कमला की मूर्ति को सोने के जेवरों से सजाया गया था.एकत्र हुए रिश्तेदार समाज के लोग मूर्ति देख विस्मय से तारीफ़ महेश से किये जा रहे थे. प्रतिउत्तर में महेश बार-बार मूर्ति देख भावुकता में बस हाथ जोड़कर ,पनीली आँखों से कह रहे थे कि -बस,मन में उसे ऐसे ही देखने की तमन्ना थी,जो आज पूरी हो गई. आपस में सभी कमला के प्रति श्रद्धान्वत हो ,उसके कुशल व्यवहार को स्मरण करने के साथ-साथ महेश का पत्नी के प्रति अगाध प्रगाढ़ता देख सराहना के पुल बांधे जा रहे थे. पीछे उदास खड़ी  निशा सबकी बातें सुनकर,उसके जेहन में उन दिनों का चलचित्र शब्दों सहित,सामने घट गया. माँ से पिताजी कहते थे कि- चिंता क्यों करती हो ,देखना एक दिन तुम्हें जेवरों से लाद दूँगा।

'मेरी तो, बस.....ये कांच की चूड़ी सलामत बनी रहे.....',माँ कहती.

हर बार पिताजी यही कहकर माँ से कुछ ना कुछ गहनें ले जाते,बिना ना नकुर के देते हुए ,माँ का जबाव यही रहता।

समय आया,पर ,पिता की महत्वाकांक्षाये वायदे को पूरा ना कर सकी,और एक दिन माँ ऐसी ही चल बसी.....

याद कर निशा की आँखे भर आई,तभी महेश की आवाज सुन आँखे पोछने लगी.ऐसा करते देख महेश उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहने लगे- बेटा,आज मुझे चैन मिला,तेरी माँ को ज़िंदा रहते वो सब  ना दे सका,जो उसके जीते जी....ना.दे......

बीच में ही ,निष्ठुरता से निशा बोल पड़ी- 'पत्थरों को तो सभी चढ़ावा चढ़ाते हैं,जीते जी तो कभी कुछ.... दिया ...होता........उसकी बात सुन,महेश उसे फ़टी आँखों से देखते रह गए......शायद उन्हें कमला के प्रति उपेक्षा का..........

 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by babitagupta yesterday

बहुत बहुत सधन्यवाद,आदरणीया नीलम दी और राजेश दी एवं आदरणीय ब्रजेश सर जी.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on Friday

बहुत ही भावपूर्ण लघु कथा है आदरणीया..बधाई

Comment by Neelam Upadhyaya on Friday

आदरणीया बबिता गुप्ता जी, बढ़िया लघु कथा की प्रस्तुति के बधाई । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 12, 2018 at 6:37pm

बहुत अच्छी, मार्मिक, संदेशप्रद लघु कथा बबिता जी बहुत बहुत बधाई 

Comment by babitagupta on July 12, 2018 at 4:07pm

रचना की सराहना के लिए आदरणीय समर सर जी और तेज वीर सर जी का सधन्यवाद. 

Comment by Samar kabeer on July 12, 2018 at 11:12am

मुहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,लघुकथा का अच्छा प्रयास हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 12, 2018 at 10:40am

हार्दिक बधाई आदरणीय बबिता गुप्ता जी।लाज़वाब मार्मिक लघुकथा।

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