For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

न कर जिक्र

जब तक है जान

काहे की फिक्र

 

मन अंतस

जजवातों से भरा

पर अकेला

 

धरते धीर

शिखर पहुँचते

बैसाखी पर

  

क्या पा लिया था

ये तब जाना, जब

उसे खो दिया

खुशी ही नहीं

तल्खियाँ भी देती हैं

तनहाईयाँ

 

… मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 113

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neelam Upadhyaya on July 12, 2018 at 3:16pm
आदरणीय श्याम नारायण जी, बहुत बहुत आभार।
Comment by vijay nikore on July 12, 2018 at 1:08pm

हाइकू लिखने कभी आसान नहीं थे, परन्तु आपकी कलम ने तो कमाल ही कर दिया। आनन्द आ गया।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 12, 2018 at 10:44am

हार्दिक बधाई आदरणीय नीलम जी। लाज़वाब प्रस्तुति।

Comment by Mohammed Arif on July 11, 2018 at 7:26pm

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी आदाब,

                              सकारात्मक सोच को बढ़ाने वाले अच्छे हाइकु । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं जैसे:- जिक्र/ज़िक्र ,खुशी/ख़ुशी , तल्खियाँ/ तल्ख़ियाँ , तनहाईयाँ/ तन्हाइयाँ ( शायद आपने अक्षर भार को सही करने के लिहाज से ऐसा किया है )  "जजवातों" यह शब्द मैं पहली बार पढ़ रहा हूँ । सही शब्द " जज़्बात " है । यहाँ पर भी आप अक्षर भार का संतुलन बनाने के लिहाज से ऐसा कर दिया जो कि ग़लत है ।

                       हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 11, 2018 at 3:04pm

//'एकला चलो रे//..हर हाल से बहादुरी से आत्मविश्वास के साथ दो-चार होते हुए असली दोस्त और दुश्मन की परख़ करते हुए अपनी लड़ाई अकेले लड़ते हुए  सफ़ल जीवन सकारात्मक नज़रिए से जीने की प्रेरणा और सबक़ देते बढ़िया हाइकु सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया नीलम उपाध्याय साहिबा।

Comment by Samar kabeer on July 11, 2018 at 2:46pm

मुह्ततरमा नीलम जी आदाब,अच्छे हाइकू हुए, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Shyam Narain Verma on July 11, 2018 at 2:36pm
शानदार रचना आदरणीया बहुत२ बधाई  ..सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मुहतरम जनाब अशोक जी आदाब,  मैं आप सभी सीनियर हज़रात का बे इंन्तिहा मशकूर हूँ कि मुझ जेसे तालिब…"
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मुहतरम जनाब सौरभ पांडे साहिब आदाब , क़ीमती वक़्त देकर मेरी ग़ज़ल पर हौसला बढाती प्रतिक्रया…"
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मोहतरमा वंदना जी आदाब , सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब अफ़रोज़ सहर साहिब आदाब , हौसला अफ़जा़ई का बहुत बहुत शुक्रिया "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब , हौसला अफ़जा़ई का शुक्रिया "
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब संतोष साहिब जी आदाब,  सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया "
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल ===== छोड़ कर तू.. चला गया है मुझे सबसे कहना ये भा गया है मुझे   क्या हुआ वो निभा नहीं पाया…"
2 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"एक और शानदार पेशकश के लिए मुबारकबाद जनाब समर साहब एक बात जाननी थी ...."आफ़ियत है इसी में मेरी…"
3 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब उम्दा अशआर से सजी बहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारक बाद "
3 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"हुस्न जलवे दिखा गया है मुझे! ख़ुद से ग़ाफ़िल बना गया है मुझे ! अबरू-ए-ख़म दिखा के वो…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदाब। मेरी इस पहली प्रविष्टि-पटल पर अपना समय देकर स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"ग़ज़ल 2 यूँ दिलासा दिया गया है मुझेतू मेरा है कहा गया है मुझे छिड़ गया होगा तज़्किरा तेराफ़ासले पर रखा…"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service